भोपाल31 मिनट पहलेलेखक: रोहित श्रीवास्तव

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मप्र-छग में 500+ छात्रों ने एक राज्य में नीट दी, दूसरे में काउंसलिंग... पोर्टल जुड़े नहीं, इसलिए पकड़ में नहीं आ रहे... 54 में 36 को सीट अलॉट भी हो चुकी

मप्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तराखंड व ओडिशा में मिले ऐसे केस

नीट यूजी-2026 की स्टेट कोटा काउंसलिंग में एक ही छात्र के दो राज्यों में मूल निवासी होने के मामले सामने आए हैं। दैनिक भास्कर ने मप्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तराखंड और ओडिशा के रिकॉर्ड खंगाले तो 54 उम्मीदवार एक से ज्यादा राज्यों में डोमिसाइल कैटेगरी में रजिस्टर्ड मिले। यानी एक ही उम्मीदवार दो राज्यों में वहां का मूल निवासी बनकर स्टेट कोटे की काउंसलिंग में शामिल हुआ। कई मामलों में राज्य बदलते ही रिजर्वेशन कैटेगरी भी बदल गई।

इन 54 उम्मीदवारों में 29 को एमबीबीएस और 7 को बीडीएस सीट अलॉट हुई है। हालांकि, इनमें से कितनों ने अलॉट सीट पर प्रवेश लिया, इसकी सूची अभी जारी नहीं हुई है। भास्कर पड़ताल में तो मप्र के 300 सीरीज और छत्तीसगढ़ के 170 सीरीज वाले रोल नंबर दूसरे राज्य की काउंसलिंग में भी मिले। ऐसे 500 से ज्यादा उम्मीदवार सामने आए, जिन्होंने नीट एक राज्य में दी, पर काउंसलिंग के लिए दूसरे राज्य में भी रजिस्ट्रेशन कराया। इसके बाद नाम, रैंक, डोमिसाइल, कैटेगरी और सीट अलॉटमेंट मिलाने पर डबल डोमिसाइल के मामले सामने आए।

केस-1 : दोनों राज्यों के मूल निवासी का सर्टिफिकेट, छत्तीसगढ़ में सीट भी मिली

आरुषि जैसवाल मप्र और छत्तीसगढ़ दोनों में मूल निवासी उम्मीदवार के रूप में दर्ज हैं। मप्र में रैंक 8293 और छग में 3377 है। सेकेंड राउंड में श्री शंकराचार्य इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस, भिलाई में सीट मिली।

केस-2 : मप्र में एससी, छत्तीसगढ़ मेंं ओबीसी

अहाना बेथशिवा मसीह मप्र की काउंसलिंग में एससी कैटेगरी में 13610 रैंक पर हैं। छत्तीसगढ़ में वे ओबीसी कैटेगरी में 5879 स्टेट रैंक पर दर्ज हैं। सेकेंड राउंड में उन्हें रायपुर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस में एमबीबीएस सीट अलॉट हुई।

केस-3 : कैटेगरी 2, दोनों राज्यों में एमबीबीएस सीट

अमित सिंह मप्र में एससी में 7765 रैंक पर हैं, आरकेडीएफ मेडिकल कॉलेज में सीट मिली। छत्तीसगढ़ में अनारक्षित कैटेगरी में 3135 रैंक पर हैं और अभिषेक मिश्रा मेमोरियल मेडिकल कॉलेज में सीट मिली।

भास्कर एक्सपर्ट- डॉ. एके श्रीवास्तव, रिटायर्ड संचालक, मप्र चिकित्सा शिक्षा विभाग ऐसा क्यों हुआ: राज्यों के पोर्टल अलग, इसलिए नहीं पकड़ पाए हर राज्य का काउंसलिंग पोर्टल अलग है, इसलिए एक राज्य को दूसरे में छात्र के डोमिसाइल व कैटेगरी की जानकारी नहीं मिलती। दस्तावेज सीट अलॉट होने के बाद कॉलेज जांचता है। राष्ट्रीय पोर्टल बने तो रोल नंबर से राज्यों का रिकॉर्ड जुड़ जाएगा।

असर: उम्मीदवारी रद्द तो मेरिट बदलेगी, सीट अगले पात्र को

डबल डोमिसाइल वाले उम्मीदवार को सीट मिलने से उसके बाद के पात्र छात्र की सीट छूट सकती है। उम्मीदवारी रद्द हुई तो मेरिट अपडेट होगी। काउंसलिंग से खाली सीटअगले पात्र छात्र को मिलेगी। डबल डोमिसाइल साबित हुई तो FIR हो सकती है।

शक है तो ऐसे जांचें : मेरिट लिस्ट में ऑल इंडिया रैंक और रोल नंबर से सीट व डोमिसाइल जांचें। गड़बड़ी पर चिकित्सा शिक्षा संचालनालय, प्रशासन या नेशनल मेडिकल कमीशन में शिकायत करें।

मप्र, छग और महाराष्ट्र के अफसर बोले- जांच होगी, नहीं तो सीट रद्द

मप्र की डीएमई डॉ. अरुणा कुमार ने कहा- मूल निवासी और कैटेगरी की जांच कॉलेज की स्क्रूटनी कमेटी करती है। दो राउंड में डबल डोमिसाइल का मामला सामने नहीं आया। दो राज्यों में डोमिसाइल क्लेम मिला तो जांच कर कार्रवाई करेंगे। छत्तीसगढ़ के डीएमई डॉ. यूएस पैकरा बोले- कोई उम्मीदवार दो राज्यों में डोमिसाइल कैटेगरी क्लेम नहीं कर सकता। ऐसे मामलों की जांच कराएंगे। राजस्थान चिकित्सा शिक्षा के कमिश्नर बीएल गोयल बोले- मामले की जांच कराएंगे। गड़बड़ी साबित होने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।

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