सऊदी अरब के सुपरमार्केट में नौकरी का सपना दिखाकर AIMIM नेता नाहिद गनी ने 1.85 लाख रुपए ठग लिए। जब विदेश पहुंचे तो बांग्लादेशी एजेंट ने हमारा पासपोर्ट तक छीन लिया।

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नौकरी के नाम पर चिलचिलाती धूप में बालू-मिट्टी उठवाया गया। करीब 6 महीने तक नौकरी रही, इसके बाद वो भी चली गई। इस वजह से 15 महीने तक भूखे रहने की नौबत तक आ गई थी। किसी तरह वहां के कुछ साथियों के घर पर रहकर गुजारा किया।

ये दर्द है किशनगंज के मोहम्मद सरफराज का, जो दुबई में नौकरी के नाम पर ठगी और शोषण का आरोप AIMIM नेता पर लगा रहे हैं। इस मामले में 1 सितंबर को सरफराज और एक अन्य युवक ने थाने में FIR दर्ज कराई है। आरोप है कि सीमांचल के करीब 10 युवकों से विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे लिए गए है।

दुबई में फंसे सीमांचल के लड़कों के साथ 2 साल तक क्या-क्या हुआ? आपबीती में लड़कों ने क्या कहानी बताई? लड़कों का दुबई में बिना जॉब, बिना पासपोर्ट कैसे गुजारा हो रहा था? पढ़िए, पूरी रिपोर्ट….।

पहले देखें कुछ वीडियो…

दुबई एयरपोर्ट पर भारत आने के लिए फ्लाइट का इंतजार करते सीमांचल के 7 लड़के।

दुबई एयरपोर्ट पर भारत आने के लिए फ्लाइट का इंतजार करते सीमांचल के 7 लड़के।

पश्चिम बंगाल के बागडोगरा एयरपोर्ट पहुंचने के बाद 7 लड़कों के चेहरे पर खुशी की लहर दिखी।

पश्चिम बंगाल के बागडोगरा एयरपोर्ट पहुंचने के बाद 7 लड़कों के चेहरे पर खुशी की लहर दिखी।

किशनगंज के दोनों युवकों ने SP ऑफिस पहुंचकर शिकायत की है।

किशनगंज के दोनों युवकों ने SP ऑफिस पहुंचकर शिकायत की है।

'सुपरमार्केट में काम की जगह बालू-मिट्टी उठवाया'

दिसंबर 2024 से 24 अगस्त 2026 तक दुबई में फंसे लड़कों में से दो किशनगंज जिले के कोचाधामन प्रखंड की पुरन्दाहा पंचायत के मिर्चान टोला के रहने वाले हैं। इनकी पहचान मोहम्मद सरफराज (25) और जावेद आलम (21) के रूप में हुई है।

सरफराज आलम ने आरोप लगाया कि नाहिद गनी ने करीब 1.85 लाख रुपए लिए थे और 2024 में उन्हें सऊदी अरब भेजा था। उन्हें सुपरमार्केट में नौकरी, रोजाना 9 घंटे काम और 1,500 रियाल (करीब 37 हजार भारतीय रुपए) मासिक वेतन देने का भरोसा दिया था। हालांकि, सऊदी अरब पहुंचने के बाद उन्हें सुपरमार्केट में नौकरी देने के बजाय कंस्ट्रक्शन का काम दिया गया।

सरफराज के मुताबिक, करीब 6 महीने तक काम करने के बाद कंपनी ने काम देना बंद कर दिया। इसके बाद 15 महीने तक बिना काम के रहे। इस दौरान हमारे पास खाने और रहने तक के पैसे नहीं थे।

उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी ने रहने के लिए जो कमरा दिया था, उसे भी खाली करवा लिया गया। जिस कमरे में वे लोग रह रहे थे, उसका किराया कंपनी की ओर से नहीं दिया गया था। इसकी वजह से किराए का बकाया भी उन्हें घर से पैसे मंगाकर चुकाना पड़ा। इसके बाद हमे कमरे से निकाल दिया गया।

सरफराज ने बताया कि कंपनी की ओर से कहा जाता था कि काम नहीं है, जहां जाना है जाओ और जो करना है करो। इसके बाद करीब 15 महीने तक घर से पैसे मंगाकर अपना गुजारा करना पड़ा।

‘बांग्लादेशी एजेंट बोलता था- खाओ या मरो, मुझे कोई मतलब नहीं’

सरफराज ने बताया, "विदेश भेजने वाले एजेंट से लगातार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई मदद नहीं मिली। हमलोग बार-बार एजेंट को फोन करते थे। वह कहता था कि एक वीडियो बनाकर भेजो, अच्छे से ‘सर-सर’ करके बोलो।

हमलोगों ने हजारों वीडियो बनाकर भेजे और लगातार फोन किया। वह हर बार कहता रहा कि कुछ करते है, लेकिन उसने हमारे लिए कुछ नहीं किया।”

संबंधित एजेंट बांग्लादेशी नागरिक था और जरूरत के समय हमारे साथ खड़ा नहीं हुआ। वह कहता था- खाओ, मरो, रहो या जाओ।

‘1.85 लाख देकर गए थे, लौटने के बाद 3.50 लाख का कर्ज हुआ’

सरफराज ने कहा कि सऊदी में वीजा को लेकर हमलोग काफी परेशान रहे। बाद में वहां ऐसा नियम आया कि जिन लोगों का इकामा/वीजा नहीं है, उन्हें निर्धारित समय सीमा के अंदर देश छोड़ना होगा, वरना जुर्माना देना पड़ेगा।

हमें एजेंट से बार-बार मदद की उम्मीद थी। वह लगातार इंतजार करने को कहता रहा। आखिरकार जब स्थिति ज्यादा खराब हो गई तो हमलोगों ने खुद ही भारत लौटने का फैसला किया। हमलोग समय रहते भारत लौट आए।

सरफराज ने आगे बताया, विदेश जाने के लिए हमने करीब 1.85 लाख रुपए खर्च किए थे। सऊदी में काम नहीं मिलने और 15 महीने तक वहां रहने के दौरान खाने-पीने और अन्य खर्च के लिए परिवार से पैसे मंगाने पड़े। बाद में जब भारत लौटे तो करीब 3.50 लाख रुपए का कर्ज हो गया। अभी सबसे बड़ी परेशानी यही है कि मेरे ऊपर जो कर्ज है, उसे कैसे चुकाऊं।

मैं मांग करता हूं कि विदेश भेजने के नाम पर मेरे से लिए गए पैसे वापस किए जाएं, ताकि मेरे ऊपर चढ़ा कर्ज खत्म हो सके। नाहिद गनी के माध्यम से कई लोगों को विदेश भेजा गया है और उनमें से कई लोग अब भी परेशान हैं। अभी भी हजारों लोग फोन कर रहे हैं कि हमें भी यहां से निकाल दीजिए।

आरोपी नाहिद गनी ने कहा- मैं गल्फ कंट्रीज में 1 लाख से ज्यादा युवाओं को रोजगार दिला चुका हूं।

आरोपी नाहिद गनी ने कहा- मैं गल्फ कंट्रीज में 1 लाख से ज्यादा युवाओं को रोजगार दिला चुका हूं।

दुबई में 1200 दिरहम सैलरी का भरोसा, 650 दिरहम देने का आरोप

कोचाधामन क्षेत्र के जावेद आलम ने बताया कि मुझे दुबई में एक कंपनी में नौकरी दिलाने का भरोसा देकर 1.35 लाख रुपए लिए गए। इसमें नकद और ऑनलाइन भुगतान दोनों शामिल थे। नाहिद ने कहा था कि मुझे 1200 रियाल (30 हजार भारतीय पैसे) महीने की सैलरी मिलेगी। रहने और खाने के लिए कंपनी की तरफ से व्यवस्था की जाएगी। जैसे ही वहां पहुंचे हमारी परिस्थिति बदल गई।

जावेद ने बताया, ‘हमें जानवरों की तरह एक कमरे में बंद थे। खाने-पीने तक के लिए बहुत परेशानी हुई। घर से पैसे मंगाकर किसी तरह गुजारा किया। जब एजेंट ने फोन ब्लॉक कर दिया तो हमारे पास भारत लौटने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। आखिरकार इंडियन एंबेसी और स्थानीय पुलिस की मदद से व्हाइट पासपोर्ट बनवाकर घर लौट पाए हैं। मैं 21 अक्टूबर 2025 को दुबई गया था।'

दुबई से वीडियो जारी कर नाहिद गनी पर आरोप लगाते सीमांचल के सभी 7 लड़के।

दुबई से वीडियो जारी कर नाहिद गनी पर आरोप लगाते सीमांचल के सभी 7 लड़के।

आधा पैसा कंपनी ने मांगना शुरू कर दिया

दुबई पहुंचते ही मुझे नौकरी तो मिली, लेकिन सैलरी से हर महीने 650 रियाल देने का दबाव बनाया जाने लगा। पहले महीने हमने पैसे दिए, दूसरे महीने भी दिए।

तीसरे महीने हमने विरोध किया तो उनलोगों ने हमारे साथ मारपीट की। इसके बाद उनलोगों ने मुझे कंपनी से बाहर कर दिया। कंपनी से निकाले जाने के बाद मैं कुछ दिनों तक कमरे में ही रहा। बाद में कंपनी की ओर से कमरा भी खाली करने का दबाव बनाया जाने लगा। इसके बाद मैंने संबंधित एजेंट से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन मदद नहीं मिली।

‘नाहिद गनी ने फोन नहीं उठाया, बाद में नंबर ब्लॉक कर दिया’

जावेद का आरोप है कि विदेश भेजने वाले एजेंट नाहिद गनी से मैंने लगातार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन एजेंट ने फोन उठाना बंद कर दिया। बार-बार फोन करने पर एक दिन उन्होंने कॉल रीसीव किया। इस दौरान उन्होंने कहा, चार-पांच दिन काम पर जाओ। इसके बाद मैं कुछ देखता हूं।

उनकी बातों को मान कर मैं कुछ दिनों तक फिर से काम पर गया, लेकिन वहां हमें वापस नहीं रखा गया। इसके बाद नाहिद ने मुझसे कहा, मुझे डेढ़ लाख रुपए और दो मैं कुछ और इंतजाम करता हूं। मैंने उनसे कहा, मेरे पास इतने रुपए नहीं हैं। इसपर उन्होंने कहा, वहां तुम कुछ काम देखो और पैसे दो तभी मैं भारत बुला पाऊंगा।

इस दौरान मैंने इल्लीगल काम भी किया। किसी तरह मैंने 600 रियाल का जुगाड़ किया, इसके बाद मैंने उसने कहा अब और मैं कोई गलत काम नहीं कर पाऊंगा। इसपर उन्होंने मेरा फोन काटा और मुझे ब्लॉक कर दिया। इस दौरान किसी तरह मैंने भारत लौटने के लिए टिकट भी बनवाया, लेकिन वापसी के समय एजेंट ने संपर्क तोड़ दिया।

पाकिस्तानी एजेंट के घर में 22 दिन रहने का आरोप

जावेद ने बताया कि उनकी फ्लाइट सुबह करीब 6:30 बजे की थी, लेकिन उससे कुछ घंटे पहले एजेंट ने मेरा नंबर ब्लॉक कर दिया। 23 जुलाई की रात करीब 2 बजे मेरा नंबर ब्लॉक कर दिया गया। दूसरे नंबर से संपर्क किया तो उसे भी ब्लॉक कर दिया। इसके बाद मेरा संपर्क टूट गया। मैंने दूसरे लोगों के माध्यम से भी संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई मदद नहीं मिली।

जावेद ने दुबई में सुल्तान नाम के एक पाकिस्तानी एजेंट का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, 'नाहिद गनी से जुड़े लोगों ने मुझे सुल्तान के पास भेजा था। सुल्तान नाम का एक पाकिस्तानी एजेंट दुबई में था। उसी के घर में मुझे लाकर करीब 22 दिनों तक एक कमरे में बंद रखा गया था। वहां खाने-पीने की बहुत दिक्कत थी। घर से पैसे मंगाकर किसी तरह खाना खाते थे। इस दौरान उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया गया और मानसिक रूप से भी परेशान किया गया।'

नाहिद का दुबई जाने से पहले लड़कों और उनके परिजन से पैसे लेने का वीडियो पीड़ित परिवार ने दैनिक भास्कर को उपलब्ध कराया।

नाहिद का दुबई जाने से पहले लड़कों और उनके परिजन से पैसे लेने का वीडियो पीड़ित परिवार ने दैनिक भास्कर को उपलब्ध कराया।

‘घर से कर्ज लेकर और जेवर गिरवी रखकर गए थे’

जावेद ने बताया, “विदेश जाने के लिए मेरे परिवार ने कर्ज लिया था। हम कोई अमीर आदमी नहीं हैं। बहुत गरीब परिवार से हैं। विदेश जाने के लिए करीब 1.45 लाख रुपए के जेवर गिरवी रखे थे। इसमें से करीब 1.35 लाख रुपए एजेंट को दिए। बाकी खर्च के लिए पैसे लेकर गए थे। जेवर अभी भी गिरवी हैं और उसका प्रूफ मेरे पास है।”

दुबई में फंसने के दौरान खाने-पीने और अन्य जरूरतों के लिए मैंने दोबारा घर से पैसे मांगे थे। इस पूरी घटना में परिवार पर आर्थिक बोझ और बढ़ गया है।

जावेद के मुताबिक, एजेंट से संपर्क टूटने के बाद उन्होंने किसी तरह इंडियन एंबेसी से संपर्क किया। इसके बाद स्थानीय पुलिस की मदद ली गई और उनके भारत लौटने की प्रक्रिया शुरू हुई।

उन्होंने बताया, “मास्टर साहब के माध्यम से हमने एंबेसी से संपर्क किया। एंबेसी की मदद से व्हाइट पासपोर्ट बनवाया गया। वहां की पुलिस की मदद और इंडियन एंबेसी के माध्यम से आखिरकार हम भारत लौट सके। 22 अगस्त को घर पहुंचे।”

‘एसपी से मिलकर की शिकायत ’

भारत लौटने के बाद जावेद SP से मिलकर शिकायत की है। उसने कहा कि मेरे साथ विदेश में जो कुछ हुआ, उसकी पूरी जानकारी एसपी को दी है। मेरी मांग है कि विदेश भेजने के नाम पर पैसे लेने, नौकरी के बदले अतिरिक्त रकम मांगने और उन्हें बंधक बनाकर रखने के मामले की जांच हो।

जावेद का कहना है कि उनके जैसे कई अन्य युवक भी विदेश में एजेंटों के चक्कर में फंसे हुए हैं। अब वह चाहते हैं कि पूरे नेटवर्क की जांच हो, ताकि दूसरे युवाओं के साथ ऐसी स्थिति न बने।