इलॉन मस्क की कंपनी टेस्ला ने 15 अक्टूबर को अपनी ‘फ्लाइंग कार’ रोडस्टर के दो डेमो पेश किए…

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पहले डेमो में कार एक बड़े से रैंप पर चढ़ी और हवा में उल्टा लटककर चलती रही, बिना नीचे गिरे। फिर हवा में उड़ते हुए पलटी और सुरक्षित नीचे उतर गई।

पहले डेमो में कार एक बड़े से रैंप पर चढ़ी और हवा में उल्टा लटककर चलती रही, बिना नीचे गिरे। फिर हवा में उड़ते हुए पलटी और सुरक्षित नीचे उतर गई।

दूसरे डेमो में कार ने गाड़ियों के ऊपर से छलांग लगाई और उस पार उतर गई। टेस्ला का दावा है कि ये महज 1 सेकेंड में जीरो से 97 किमी/घंटा तक की स्पीड पकड़ लेगी।

दूसरे डेमो में कार ने गाड़ियों के ऊपर से छलांग लगाई और उस पार उतर गई। टेस्ला का दावा है कि ये महज 1 सेकेंड में जीरो से 97 किमी/घंटा तक की स्पीड पकड़ लेगी।

किसी फिल्मी सीन की तरह उड़ने रही फ्लाइंग कार मस्क की कंपनी ने कैसे बनाई और दावे के मुताबिक क्या 2028 तक आम लोग भी इसे खरीद पाएंगे, जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में…

टेस्ला की रोडस्टर ने 3 बड़े कारनामे किए हैं…

  1. कार एक लूप रैंप पर चढ़कर लटकती हुई चिपकी रही, फिर हवा में उड़ती हुई सीधी हो उतर गई।
  2. कार ने दूसरी गाड़ियों के ऊपर किक-फ्लिप किया और हवा में पलटी खाकर नीचे उतर आई।
  3. लाइव रन में कार 0.81 सेकंड में 60 मील प्रति घंटे, यानी 97 किमी प्रति घंटा की स्पीड तक पहुंची।

इन तीनों के पीछे 3 तरह की टेक्नोलॉजी है...

1. सक्शन फैन सिस्टम

  • टेस्ला ने इसे 'मल्टी मोड सक्शन सिस्टम' नाम दिया है। इसमें खास तरह के पंखे कार के नीचे लो एयर-प्रेशर एरिया बनाते हैं। जबकि बाहर की हवा का दबाव अपनी ताकत से कार को उसके नीचे वाली सतह से चिपका देता है। इसे डाउनफोर्स कहते हैं।
  • जैसे बोतल के ढक्कन की हवा मुंह से खींचकर उसे होठों से चिपका लेते हैं। उसी तरह बाहर की हवा न घुसे, इसलिए कार के नीचे एक खास लेयर से सील किया गया है।
  • दरअसल, कोई भी चीज गुरुत्वाकर्षण बल के चलते आसमान से नीचे गिरती है। कार के मामले में इसे G कहते हैं। वहीं रोडस्टर का सक्शन फैन सिस्टम 2G तक का फोर्स बैलेंस कर सकता है।
  • इसका मतलब है कि अगर कार किसी पुल के नीचे चिपकी है और G की ताकत से नीचे गिर रही है, तो ये फैन सिस्टम दोगुनी ताकत से उसे ऊपर की तरफ चिपकाए रहेगा।

2. कोल्ड गैस थ्रस्टर्स

  • थ्रस्ट का मतलब है- धक्का। स्पेसशिप और रॉकेट में थ्रस्टर इंजन लगे होते हैं। जब इनका फ्यूल जलता है, तो तेजी से नीचे की तरफ आग निकलती है और रॉकेट ऊपर की तरफ बढ़ता है। टेक्नोलॉजी न्यूटन के तीसरे नियम पर बेस्ड है, यानी क्रिया के बराबर और विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया।
  • टेस्ला की रोडस्टर में भी इसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है, लेकिन एक फर्क है- इसके थ्रस्टर आग नहीं, बल्कि हाई प्रेशर वाली गैस छोड़ते हैं, जिससे कार उल्टी दिशा में उठती है।
  • रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये कोई खास गैस नहीं, बल्कि नाइट्रोजन मिली हुई हवा है। मस्क की स्पेसशिप बनाने वाली कंपनी स्पेसएक्स ने अपने रॉकेट में भी कोल्ड गैस थ्रस्टर्स टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया है।
  • रोडस्टर के सबसे एडवांस्ड ‘रॉकेट’ वर्जन में 10 कोल्ड गैस थ्रस्टर लगे हैं। कार के नीचे 4 और बाकी आगे-पीछे और कार के दोनों तरफ। कार में दो गैस टैंक हैं, जिनमें करीब 250 किलो हवा भरी है। जरूरत पड़ने पर थ्रस्टर के जरिए तेजी से ये हवा निकलती है।
  • इनसे कार को कंट्रोल्ड थ्रस्ट मिलता है, यानी थ्रस्टर कार को रॉकेट की तरह बहुत तेजी से आगे धक्का नहीं देते, बल्कि जरूरत भर के फोर्स से ही हवा में ऊपर-नीचे या दाएं-बाएं लेकर जाते हैं।
  • रिपोर्ट्स के मुताबिक, रोडस्टर के थ्रस्टर्स 80 किलोन्यूटन तक का फोर्स लगा सकते हैं। ये फोर्स करीब 8 हजार किलो वजनी चीज को पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के खिलाफ हवा में ही रोककर रख सकते हैं, जबकि रोडस्टर का वजन करीब 2300 किलो बताया जा रहा है। मस्क ने कहा था कि वो रोडस्टर को हल्का रखना चाहते हैं।
कार में लगे थ्रस्टर्स की वजह से ही कार हवा में मूवमेंट करती है।

कार में लगे थ्रस्टर्स की वजह से ही कार हवा में मूवमेंट करती है।

3. इलेक्ट्रिक मोटर और थ्रस्टर की स्पीड

  • रोडस्टर में हाई पावर इलेक्ट्रिक मोटर लगे हैं। ये तेजी से टॉर्क पैदा करते हैं। हालांकि सिर्फ इलेक्ट्रिक मोटर के सहारे 0.59 सेकेंड में 97 किमी की स्पीड पकड़ना आसान नहीं है। ऐसा इसलिए, क्योंकि अगर मोटर पहियों को बहुत तेजी से घुमा दे, तो वो रोड पर फिसलने लगेंगे। इसे पहियों की 'ट्रैक्शन लिमिट' कहते हैं।
  • जब कोई कार तेजी से किसी मोड़ पर घूमती है, तो बाहर की तरफ कुछ अतिरिक्त फोर्स भी लगता है।
  • टेस्ला के मुताबिक, रोडस्टर के टायर बाहर की तरफ लगने वाले 1.2G तक के फोर्स को बैलेंस कर सकते हैं।
  • गाड़ी की स्पीड इस लिमिट के पार ले जाने के लिए काम आते हैं- रोडस्टर के थ्रस्टर और उसका सक्शन सिस्टम। सक्शन सिस्टम से टायर को सड़क पर अच्छी ग्रिप मिल जाती है, इसलिए वो फिसलते नहीं। जबकि थ्रस्टर टायर के बजाय सीधे कार को आगे की तरफ धक्का देते हैं।
  • टेस्ला ने इसके पीछे की गणित भी समझाई है। दरअसल, 0.59 सेकेंड में 97 किमी/घंटा की रफ्तार पाने के लिए 4.65G के बराबर बल, यानी एक्सीलेरेशन चाहिए। टेस्ला का कहना है कि रोडस्टर के थ्रस्टर टायरों के 1.2G के फोर्स को 4.65G तक बढ़ा सकते हैं।
  • अगर इस दावे पर यकीन किया जाए, तो रोडस्टर सबसे तेज कार बन जाएगी। इससे पहले रिमाक नेवेरा आर. नाम की कार ने 1.66 सेकेंड में 97 किमी की स्पीड तक पहुंचने का रिकॉर्ड बनाया है।

टेस्ला रोडस्टर के 3 मॉडल ला रही है...

  • परफॉरमेंस: इस टू-सीटर कार में थ्रस्टर नहीं हैं, लेकिन सक्शन फैन हैं। ये 1.6 सेकेंड में 97 किमी की रफ़्तार पकड़ सकती है। इसके लिए एडवांस में 50 हजार डॉलर जमा करने होंगे।
  • थ्रस्ट: इसमें सक्शन फैन और केवल पीछे की तरफ थ्रस्टर लगे हैं। ये हवा में नहीं उड़ेगी, लेकिन ये 0.9 सेकंड से कम समय में 97 किमी की रफ्तार पकड़ सकती है। इसके लिए 2.5 लाख डॉलर का एडवांस जमा करना होगा।
  • रॉकेट: इसमें सक्शन सिस्टम और 10 थ्रस्टर हैं। ये 0.59 सेकेंड में 97 किमी की रफ्तार पकड़ सकती है। ये इनवाइट ओनली है, यानी टेस्ला तय करेगी कि इसे किसे बेचना है और किसे नहीं।
टेस्ला रोडस्टर कार लॉन्चिंग के दौरान इलॉन मस्क।

टेस्ला रोडस्टर कार लॉन्चिंग के दौरान इलॉन मस्क।

टेस्ला का कहना है कि 2028 तक इन तीनों कारों का प्रोडक्शन और बिक्री शुरू हो जाएगी। हालांकि इसमें 3 बड़ी दिक्कतें हैं...

1. प्रोडक्शन और डिलीवरी में देरी

  • टेस्ला रोडस्टर का शुरुआती वर्जन 2008 में आया था। ये टेस्ला की पहली इलेक्ट्रिक कार थी, जो 2012 तक बिकी थी।
  • फिर नवंबर 2017 में मस्क ने रोडस्टर की सेकेंड जनरेशन का मॉडल पेश किया। कहा गया कि ये गाड़ियां 2020 तक बिकने लगेंगी, जो 1.9 सेकंड में 97 किमी प्रति घंटे की स्पीड पकड़ सकती हैं।
  • जून 2018 में मस्क ने पहली बार ये भी कहा कि रोडस्टर की सेकेंड जनरेशन की कारें थ्रस्टर के जरिए हवा में भी उड़ सकेंगी।
  • हालांकि सेकेंड जनरेशन की रोडस्टर की लॉन्च और डिलीवरी की तारीख आगे बढ़ती गई। मस्क ने कभी ग्लोबल सप्लाई चेन में रुकावट की बात कही, तो कभी चिप की कमी बताई। अब मस्क ने 2028 में प्रोडक्शन शुरू करने की बात कही है।
  • रिपोर्ट्स के मुताबिक, गाड़ी की डिजाइन 2017 के मुकाबले काफी बदल चुकी है। बैटरी, ड्राइविंग यूनिट, सक्शन सिस्टम नए हैं। इसलिए डिलीवरी में समय लग सकता है।

2. कार के सिक्योरिटी फीचर से जुड़े कई सवाल

रोडस्टर को लेकर अभी कई बातें टेस्ला ने साफ नहीं की हैं। मसलन…

  • इसने रिमोट कंट्रोल के जरिए कई करतब दिखाए, लेकिन क्या इसे सड़क पर भी सुरक्षित तरीके से उड़ाया जा सकता है?
  • थ्रस्टर से निकला गैस का गुबार पीछे दर्जनों मीटर तक फैला। दर्शकों को काफी दूर रखा गया। जब गाड़ी सड़क पर चलेगी, तो बाकी ट्रैफिक पर इसका क्या असर होगा?
  • टेस्ला ने कहा कि डेमो वाली कारों में कोई ड्राइवर नहीं था, क्योंकि कुछ करतब नुकसान पहुंचा सकते थे। तो क्या इसे ऑटोमैटिक तरीके से ही चलाया जाएगा?
  • टैंक में गैस भरने का तरीका क्या है? थ्रस्टर कितनी देर तक काम करेंगे और कितने सुरक्षित हैं? रिपोर्ट्स के मुतबिक, इन्हीं कोल्ड गैस थ्रस्टर के चलते स्पेसएक्स के रॉकेट में पहले विस्फोट हो चुके हैं।

3. हर देश में चलना मुश्किल, कानूनी मंजूरी जरूरी

  • आम तौर पर हवा में उड़ने वाली किसी भी चीज को एयरक्राफ्ट माना जाता है। चीनी कंपनी Xpeng और अमेरिका की एलेफ एयरोनॉटिक्स पहले ही उड़ने वाली कारें बना चुकी हैं।
  • एलेफ एयरोनॉटिक्स को अमेरिका का फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) का सर्टिफिकेट भी मिल चुका है। हालांकि ऐसी कारों को विंग्स के सहारे देर तक उड़ने के लिए डिजाइन किया गया है। इसलिए इनको कानूनी मंजूरी सड़क पर चलने के अलावा उड़ने वाले एक एयरक्राफ्ट के तौर पर मिली है।
2025 में एफेल एयरोनॉटिक्स ने हवा में उड़ने वाली कार लॉन्च की थी।

2025 में एफेल एयरोनॉटिक्स ने हवा में उड़ने वाली कार लॉन्च की थी।

  • वहीं रोडस्टर को एक एडवांस्ड स्पोर्ट्स कार की तरह डेवेलप किया गया है, जो रोलिंग जैसे स्टंट और कम ऊंचाई वाली छलांग लगा सके। यानी इसे एयरक्राफ्ट नहीं, बल्कि एक फ्लाइंग स्पोर्ट्स कार की तरह सड़क पर चलने की मंजूरी चाहिए होगी।
  • हर देश में इनके लायक सड़कें और ट्रैफिक कंडीशन नहीं हैं। मस्क खुद कह चुके हैं कि जरूरी नहीं कि उनकी कार हर जगह कानूनी तौर पर चलाई जा सके।

कार की असली कीमत क्या है, इसका खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, एडवांस बुकिंग शुरू हो गई है।

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