जयपुर54 मिनट पहलेलेखक: विनोद मित्तल
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राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल (आरएसओएस) की जांच में 1132 आवेदनों में अवैध संशोधन का मामला सामने आया है। इसको लेकर स्टेट ओपन ने सख्ती प्रारंभ कर दी है। पिछले साल यहां फर्जी तरीके से अंकतालिकाएं तैयार करने को लेकर मामला खुलासा हुआ था और बजाज नगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
अंकतालिकाओं के संशोधन को लेकर अब स्टेट ओपन स्कूल ने जांच कराई तो सामने आया है कि कुछ कर्मचारियों की आईडी से अंवाछित तरीके से आवेदन और अंकतालिकाओं में संशोधन किया गया था। इसमें सबसे अधिक संशोधन प्राप्तांकों को लेकर है। विद्यार्थी ने पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन ही नहीं किया और कई विद्यार्थियों के नंबर बढ़ गए तो कई विद्यार्थियों के नंबर घट गए। इसके अलावा कई विद्यार्थियों के अवैध तरीके से नाम और जन्मतिथि में भी संशोधन किया गया है। स्टेट ओपन ने अपनी जांच में ऐसे 1132 विद्यार्थी चिह्नित किए हैं। अवांछित संशोधनों के कारण इन विद्यार्थियों का रिजल्ट रोक लिया गया था। स्टेट ओपन ने अवांछित संशोधन वाले विद्यार्थियों की सूची जारी की है। इन विद्यार्थियों से कहा गया है कि वे 20 नवंबर तक अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते है या जरूरी दस्तावेज स्टेट ओपन में जमा करा सकते हैं। विद्यार्थियों को अंतिम तिथि तक 2 से 3 बार एसएमएस के जरिए इस संबंध में सूचना दी जाएगी। ताकि वे समय रहते अपनी आपत्ति दर्ज करा सके।
20 नवंबर तक देना होगा जवाब, नहीं तो आवेदन निरस्त
स्टेट ओपन स्कूल की ओर से जारी सूची में शामिल विद्यार्थियों को निर्धारित समय सीमा 20 नवंबर तक अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। यदि किसी विद्यार्थी ने स्वयं आवेदन या अंकतालिका में संशोधन कराया है तो वह इस संबंध में आपत्ति दर्ज करा सकता है और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर सकता है। इसके बाद दस्तावेजों की जांच की जाएगी। निर्धारित समय तक आपत्ति दर्ज नहीं कराने वाले विद्यार्थियों के आवेदन निरस्त कर दिए जाएंगे और उनका परिणाम भी जारी नहीं होगा। वहीं, आपत्ति दर्ज कराने वाले विद्यार्थियों के दस्तावेज सही नहीं पाए गए तो भी उनके आवेदन निरस्त कर दिए जाएंगे। अवांछित तरीके से हुए संशोधनों में 500 से अधिक संशोधन तो अकेले राकेश कुमार शर्मा की आईडी से हुए हैं। स्टेट ओपन में प्लेसमेंट एजेंसी के जरिए संविदा पर लगे राकेश कुमार शर्मा को डीओआईटी ने सुपर एडमिन के अधिकार दे दिए थे। इस कारण वह इतने अधिक संशोधन करने में सफल रहा था। शर्मा के खिलाफ स्टेट ओपन ने एफआईआर भी दर्ज कराई थी, लेकिन अब तक इस मामले में कुछ नहीं हुआ। पुलिस की जांच धीमी गति से चल रही है। इस कारण इस जांच पर सवाल उठ रहे हैं। कुछ संशोधन अन्य तीन कर्मचारियों की आईडी से भी हुए थे।
इस प्रकार हुए नाम के संशोधन
वास्तविक नाम धर्मदास वैरागी था, इसको पुनर्मूल्यांकन हरिश कुमार लोहार कर दिया गया। इसी तरह से परिधि को कन्हैयालाल और लीला को लाली कर दिया गया। यह सभी संशोधन राकेश कुमार शर्मा की आईडी से हुए थे। इसके अलावा कुछ अन्य कर्मचारियों की आईडी से भी संशोधन किए गए थे।
अवांछित संशोधन के लिए एक मौका दिया है
स्टेट ओपन ने विद्यार्थियों के आवेदनों की जांच की तो 1132 विद्यार्थियों के आवेदन में अवांछित संशोधन पाया है। इनको एक मौका दिया गया है कि अगर उन्होंने खुद संशोधन कराया है तो वे अपनी आपत्ति स्टेट ओपन में दर्ज करा दे। इन सभी विद्यार्थियों का परिणाम रोक दिया गया था। अगर किसी ने आपत्ति नहीं दी तो उसका आवेदन निरस्त कर दिया जाएगा। विद्यार्थियों को इसकी सूचना एसएमएस के जरिए दी जा रही है। - डॉ. अरुणा शर्मा, सचिव, राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल
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