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पूर्वी चंपारण में मानसून की बेरुखी किसानों की चिंता बढ़ा रही है। जिले में मानसून सक्रिय होने के बावजूद पर्याप्त बारिश नहीं होने से धान की रोपनी की रफ्तार थम गई है। स्थिति यह है कि 10 जुलाई तक पूरा होने वाली रोपनी का सबसे उपयुक्त समय निकल चुका है, लेकिन अब तक जिले में लक्ष्य का मात्र 22.41 प्रतिशत ही धान का आच्छादन हो सका है। कृषि विभाग के अनुसार इस वर्ष जिले में 1,88,099 हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य रखा गया है, जबकि 11 जुलाई तक केवल 42,147.29 हेक्टेयर क्षेत्र में ही रोपनी हो सकी है।
बारिश नहीं होने से कई प्रखंडों में खेतों में रोपनी लायक पानी नहीं है। जिन खेतों में कुछ दिन पहले तक पानी भरा था, वहां अब मिट्टी सूखने लगी है और कई जगह धूल उड़ रही है। किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बारिश का इंतजार कर रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि रोपनी में लगातार हो रही देरी का असर सीधे फसल उत्पादन और उत्पादकता पर पड़ सकता है। जून महीने में सामान्य से कम वर्षा होने के कारण धान के बिचड़ा तैयार करने में भी किसानों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी थी। जून में सामान्य औसत 181.10 मिमी वर्षा के मुकाबले केवल 92.64 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसके बाद किसानों को उम्मीद थी कि जुलाई में अच्छी बारिश होगी। लेकिन, जुलाई माह के 11 दिन बीत जाने के बाद भी औसत से काफी कम हुई बारिश ने किसानों को मुश्किल में डाल दिया है। किसान पंप सेट सहित अन्य संसाधनों से रोपनी कर रहे हैं। गौरतलब है कि जिले के अधिकतर किसान धान की खेती के लिए मानसून की बारिश पर ही निर्भर रहते हैं। डॉ. अरविंद कुमार सिंह, कृषि वैज्ञानिक व प्रमुख
जुलाई माह में अबतक नही हुई है अपेक्षित बारिश कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार जुलाई महीने में अब तक अपेक्षित वर्षा नहीं हो सकी है। सामान्य औसत 366 मिमी के मुकाबले 11 जुलाई तक केवल 50.93 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों में कहीं-कहीं मध्यम से भारी बारिश की संभावना जताई है, लेकिन इसके बाद अगले लगभग एक पखवाड़े तक सामान्य से कम वर्षा होने का अनुमान है। ऐसे में किसानों की चिंता और बढ़ गई है क्योंकि धान की रोपनी का समय लगातार निकलता जा रहा है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार आगामी दिनों में जिले का अधिकतम तापमान 32 से 35 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 26 से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। सुबह में सापेक्ष आर्द्रता 90 से 95 प्रतिशत तथा दोपहर में 60 से 65 प्रतिशत रहने का अनुमान है। 20 जुलाई के बाद हल्की से मध्यम तथा कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है।
धान की रोपनी में विलंब होने से उत्पादन पर असर पड़ सकता है। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि रोपनी के बाद सिंचाई और फसल प्रबंधन पर विशेष ध्यान दें। ऊंची भूमि वाले किसान अरहर, मक्का, उड़द और तिल की खेती कर सकते हैं। वहीं बिचड़ा तैयार करने में देरी हुई है, वे अल्प अवधि वाली धान की किस्में तुरंता, प्रभात और पूसा-677 का चयन करें।