
सांकेतिक तस्वीर.Image Credit source: GettyImages
अंटार्कटिका में मौजूद थ्वाइट्स ग्लेशियर उम्मीद से ज्यादा तेजी से पिघल रहा है. इसे डूम्सडे ग्लेशियर भी कहा जाता है. वैज्ञानिकों के नए अध्ययन के मुताबिक, साल 2100 तक इस ग्लेशियर के पिघलने से दुनिया के समुद्रों का जलस्तर करीब 1.2 इंच बढ़ सकता है. यह पहले लगाए गए अनुमानों से दोगुना है. यह खतरा तब भी बना रह सकता है, जब दुनिया का तापमान आगे नहीं बढ़ता है. यह स्टडी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, इरविन और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी के वैज्ञानिकों ने किया है. इसके नतीजे नेचर कम्युनिकेशंस पत्रिका में छपे हैं.
थ्वाइट्स ग्लेशियर की पूरी बर्फ पिघलने से समुद्र का जलस्तर 2 फीट से ज्यादा बढ़ सकता है. यह अंटार्कटिका की विशाल बर्फ की चादर को रोकने में भी मदद करता है. इसके ढहने से समुद्र का जलस्तर करीब 10 फीट तक बढ़ने का खतरा है. इससे मियामी से मनीला तक तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों पर गंभीर असर पड़ सकता है.
ग्लेशियर तेजी से क्यों पिघल रहा है?
थ्वाइट्स ग्लेशियर पश्चिमी अंटार्कटिका में है. इसका आकार लगभग अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य जितना है. यह पृथ्वी के सबसे दुर्गम इलाकों में से एक में मौजूद है और कई दशकों से पीछे खिसक रहा है. इसकी बर्फ पिघलने से समुद्र का जलस्तर बढ़ने में अभी करीब 4% योगदान होता है. वैज्ञानिकों ने ग्लेशियर के नीचे की स्थिति समझने के लिए एक नया मॉडल बनाया. उन्हें पता चला कि समुद्र तल से जुड़ी बर्फ और पानी पर तैरने वाली बर्फ के बीच का हिस्सा पहले की सोच से ज्यादा चौड़ा हो सकता है. इसे ग्राउंडिंग जोन कहते हैं. इस क्षेत्र में ज्वार आने पर समुद्र का पानी ग्लेशियर के नीचे आता-जाता है. इस प्रक्रिया को टाइडल पंपिंग कहा जाता है. इससे अपेक्षाकृत गर्म समुद्री पानी बर्फ के नीचे गहराई तक पहुंचता है और उसे तेजी से पिघलाता है.
पानी के नीचे की पहाड़ी से अलग हो रही बर्फ
ग्लेशियर के नीचे की जमीन ढलान वाली है. यहां पानी के नीचे मौजूद दो पहाड़ियां बर्फ को तेजी से समुद्र में बहने से रोकती हैं. लेकिन स्टडी के मुताबिक, ग्लेशियर मौजिनोट रिज नाम की एक पहाड़ी से धीरे-धीरे अलग हो रहा है. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि साल 2100 तक बर्फ के इस पहाड़ी से अलग होने की 60% संभावना है. ऐसा हुआ तो ग्लेशियर ढलान पर तेजी से पीछे खिसक सकता है.
तटीय शहरों पर क्या असर पड़ेगा?
स्टडी के कोराइटर और कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, इरविन के प्रोफेसर एरिक रिग्नॉट ने कहा कि इससे आने वाले दशकों में तटीय इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है. वैज्ञानिक 2028 में ग्लेशियर के नीचे उपकरण लगाएंगे, ताकि समुद्र के पानी की गतिविधियों को रिकॉर्ड किया जा सके. रिग्नॉट ने कहा कि जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए प्रदूषण घटाना जरूरी है. हालांकि, पहले हो चुके नुकसान के कारण भविष्य में समुद्र का जलस्तर बढ़ सकता है.
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