नर्मदापुरम जिले में ग्रीष्मकालीन मूंग की समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीदी व्यवस्था अब किसानों के लिए चिंता का विषय बन गई है। खरीदी शुरू हुए करीब 20 दिन बीत चुके हैं, लेकिन बड़ी संख्या में किसान अभी तक सरकारी केंद्रों पर अपनी उपज बेचने नहीं पहुंचे हैं। जि
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किसानों का कहना है कि सरकार ने प्रति हेक्टेयर खरीदी की मात्रा बहुत कम तय कर दी है, जिसके कारण अधिक उत्पादन करने वाले किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों को उम्मीद है कि सरकार उनकी मांग मानते हुए खरीदी का कोटा बढ़ाकर 100 फीसदी फसल खरीदने के आदेश जारी करेगी।
78 हजार किसानों में से सिर्फ 4384 ने बेची मूंग
समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी के लिए जिले में बड़ी संख्या में किसानों ने पंजीयन कराया है। लेकिन अब तक कुल पंजीकृत किसानों में से 10 फीसदी किसान भी सरकारी खरीदी केंद्रों तक नहीं पहुंचे हैं। जिले में अब तक 4 हजार 384 किसानों से 38 हजार 469 क्विंटल से अधिक मूंग की खरीदी की जा चुकी है।
किसानों का कहना है कि खेतों में उत्पादन ज्यादा होने के बावजूद सरकारी खरीदी की सीमा बहुत कम तय की गई है। इसी वजह से कई किसान खरीदी केंद्रों पर जाने से बच रहे हैं और सरकार के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
किसानों को 100 फीसदी खरीदी की उम्मीद
किसानों और किसान संगठनों का कहना है कि सरकार ने प्रति एकड़ करीब 1.20 क्विंटल के आसपास मूंग खरीदी का कोटा तय किया है, जबकि इस बार कई किसानों के खेतों में 5 से 6 क्विंटल प्रति एकड़ तक उत्पादन हुआ है। ऐसे में बाकी उपज किसानों को मजबूरी में कम दाम पर बाजार में बेचनी पड़ सकती है। किसानों का कहना है कि यदि सरकार खरीदी की मात्रा बढ़ाकर 100 फीसदी नहीं करती है तो बड़ी संख्या में किसान आर्थिक नुकसान उठाएंगे।
स्लॉट बुकिंग में भी किसानों की रुचि कम
किसानों के विरोध और आंदोलन के कारण कई किसानों ने अभी तक ई-उपार्जन पोर्टल पर स्लॉट बुक नहीं किए हैं। किसानों को उम्मीद है कि सरकार जल्द ही खरीदी के नियमों में बदलाव करेगी और कोटा बढ़ाएगी। नियमों के अनुसार बिना स्लॉट बुकिंग के किसान सरकारी केंद्रों पर मूंग नहीं बेच सकते हैं। स्लॉट बुकिंग की अंतिम तारीख 27 जुलाई निर्धारित की गई है।

रामभरोस राजपूत, किसान, जासलपुर।
खरीदी केंद्र पर जांच से किसान नाराज
नर्मदापुरम शहर के मप्र वेयरहाउस कॉर्पोरेशन वेयरहाउस में बनाए गए खरीदी केंद्र पर स्थिति देखने पहुंचने पर यहां गिनती के कुछ किसान ही मूंग बेचने पहुंचे थे। किसान दो, तीन और पांच क्विंटल तक मूंग लेकर आए थे। केंद्र पर सर्वेयर प्रकाश कीर किसानों की मूंग की गुणवत्ता की जांच कर रहे थे।
जासलपुर निवासी किसान रामभरोस राजपूत ने बताया कि सरकार पहले ही किसानों की मेहनत से पैदा हुई मूंग का बहुत कम हिस्सा खरीद रही है। इसके बाद भी खरीदी केंद्रों पर इतनी जांच की जा रही है, जैसे सोने की खरीदारी हो रही हो।
कचरे की जांच को लेकर किसान ने उठाए सवाल
किसान रामभरोस राजपूत ने बताया कि जांच के दौरान सर्वेयर ने उनकी मूंग में 5 फीसदी कचरा बताया और छन्ना लगाने को कहा। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो दोबारा जांच की गई, जिसमें कचरे की मात्रा 7 फीसदी बताई गई।
किसान का कहना है कि खरीदी केंद्रों पर इतनी सख्ती छोटे किसानों के लिए परेशानी बन रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार बाद में वेयरहाउस में मिट्टी मिली मूंग मिलने के मामले सामने आते हैं। किसानों का कहना है कि केवल दिखावे के लिए किसानों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए।
किसानों के विरोध की ये हैं मुख्य वजहें
किसानों की नाराजगी के पीछे सबसे बड़ा कारण खरीदी का कम कोटा बताया जा रहा है। किसानों का कहना है कि उत्पादन के मुकाबले सरकार बहुत कम मात्रा में मूंग खरीद रही है। इसके अलावा ई-टोकन व्यवस्था को लेकर भी किसानों में नाराजगी है। किसानों का कहना है कि इस प्रणाली के कारण खाद लेने सहित कई कामों में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

सर्वेयर मूंग की जांच कर रहे है।
मूंग खरीदी की स्थिति एक नजर में
मूंग समर्थन मूल्य: 8 हजार 768 रुपए प्रति क्विंटल
पंजीकृत किसान: 78 हजार 434
स्लॉट बुक करने वाले किसान: 23 हजार 125
उपज बेचने वाले किसान: 4 हजार 384
खरीदी गई मूंग: 38 हजार 469 क्विंटल से अधिक
किसान संगठनों ने दी आंदोलन की चेतावनी
मूंग खरीदी में अव्यवस्था और कम खरीदी सीमा को लेकर किसानों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। भारतीय किसान संघ, राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ, किसान यूनियन और किसान कांग्रेस सहित कई संगठनों ने सरकार के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी है।
किसान संगठनों का कहना है कि यदि 27 जुलाई की अंतिम तारीख से पहले सरकार ने खरीदी नियमों में सुधार कर 100 फीसदी मूंग खरीदी शुरू नहीं की तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। संगठनों ने साफ कहा है कि किसानों की मांगें पूरी नहीं होने पर सड़क पर उतरकर विरोध किया जाएगा।