हर 10 में से 9 बच्चे फोन एडिक्टेड: 2 घंटा रोज करते हैं चैट, देखते हैं वीडियो

बच्चों में बढ़ती मोबाइल की आदत (Getty Image)

आज के समय में स्मार्टफोन बच्चों की जिंदगी का एक जरूरी हिस्सा बन चुका है. पढ़ाई करनी हो, ऑनलाइन क्लास लेनी हो, किसी दोस्त से बात करनी हो या फिर मनोरंजन करना हो, मोबाइल हर काम में इस्तेमाल हो रहा है. कोरोना महामारी के दौरान तो बच्चों की पढ़ाई लगभग पूरी तरह मोबाइल, लैपटॉप और इंटरनेट पर निर्भर हो गई थी. लेकिन सवाल यह है कि जिस मोबाइल ने बच्चों की पढ़ाई को जारी रखने में मदद की, क्या वही अब उनके लिए परेशानी भी बन रहा है?

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग यानी NCPCR की एक स्टडी इस सवाल को गंभीर बना देती है. जुलाई 2021 में जारी इस अध्ययन में बच्चों के मोबाइल और इंटरनेट इस्तेमाल से होने वाले शारीरिक, व्यवहारिक और मानसिक-सामाजिक असर को समझने की कोशिश की गई. यह अध्ययन 60 स्कूलों के 5,811 लोगों से मिले जवाबों पर आधारित था, जिसमें 3,491 बच्चे, 1,534 माता-पिता और 786 शिक्षक शामिल थे. अध्ययन में 8 से 18 साल की उम्र के बच्चों को शामिल किया गया. स्टडी के हिसाब से 10 में से 9 बच्चे सीधे तौर पर ‘फोन एडिक्टेड’ पाए गए हैं.

30.2% बच्चों के पास अपना स्मार्टफोन

रिपोर्ट में सामने आया कि बच्चों के लिए मोबाइल सिर्फ पढ़ाई का साधन नहीं रह गया है. बड़ी संख्या में बच्चे इसका इस्तेमाल चैटिंग, गेमिंग, म्यूजिक सुनने और सोशल मीडिया के लिए भी करते हैं. 62.6 फीसदी बच्चों ने बताया कि वो इंटरनेट इस्तेमाल करने के लिए अपने माता-पिता का फोन लेते हैं, जबकि 30.2 फीसदी बच्चों के पास अपना स्मार्टफोन है.

13 साल के बच्चों का भी सोशल मीडिया अकाउंट

ऑनलाइन क्लास और पढ़ाई के लिए मोबाइल का इस्तेमाल बहुत ज्यादा है, लेकिन बच्चों को स्मार्टफोन पर सबसे ज्यादा पसंद चैटिंग करना है. वहीं 52.9 फीसदी बच्चों ने चैटिंग को अपनी पसंदीदा गतिविधि बताया. चिंता की बात यह भी है कि 42.9 फीसदी बच्चों के पास सोशल मीडिया अकाउंट था. कुछ छोटे बच्चों के भी सोशल मीडिया अकाउंट पाए गए, जबकि कई प्लेटफॉर्म पर अकाउंट बनाने की न्यूनतम उम्र 13 साल है. ऐसे में सवाल सिर्फ मोबाइल कितनी देर चलाने का नहीं, बल्कि बच्चे मोबाइल पर क्या देख रहे हैं और किससे संपर्क कर रहे हैं, इसका भी है.

स्टडी के सबसे अहम आंकड़े-

  • 62.6% बच्चे माता-पिता के फोन से इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं.
  • 30.2% बच्चों के पास अपना स्मार्टफोन है.
  • 94.8% बच्चों के लिए ऑनलाइन क्लास इंटरनेट इस्तेमाल करने का प्रमुख कारण है.
  • 42.9% बच्चों के पास सोशल मीडिया अकाउंट है.
  • 23.8% बच्चे सोने से पहले बिस्तर में स्मार्टफोन इस्तेमाल करते हैं.
  • 37.15% बच्चे मोबाइल की वजह से ध्यान कम होने की बात कहते हैं.
  • 76.2% माता-पिता बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल के लिए समय सीमा तय करते हैं.

Kids Smartphone Addiction

बच्चों में मोबाइल की लत (Getty Image)

पढ़ाई और नींद दोनों पर मोबाइल का असर

मोबाइल बच्चों की पढ़ाई में मददगार होने के साथ-साथ उनका ध्यान भी भटका रहा है. अध्ययन के अनुसार 94.8 फीसदी बच्चों के लिए स्मार्टफोन और इंटरनेट का मुख्य इस्तेमाल ऑनलाइन क्लास के लिए था, लेकिन केवल 32.7 फीसदी बच्चे ऐसे थे, जो पढ़ाई के दौरान कभी फोन चेक नहीं करते. वहीं करीब 37.15 फीसदी बच्चों ने हमेशा या अक्सर ध्यान कम होने की बात कही. मोबाइल का असर उनकी नींद पर भी दिख रहा है. 23.8 फीसदी बच्चे सोने से पहले बिस्तर में स्मार्टफोन इस्तेमाल करते हैं. उम्र बढ़ने के साथ यह आदत बढ़ती है, जो नींद की परेशानी, बेचैनी और थकान से जुड़ी हो सकती है.

सोशल मीडिया की उम्र से पहले एंट्री

स्टडी का एक और अहम हिस्सा बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल से जुड़ा है. 42.9 फीसदी बच्चों ने बताया कि उनका सोशल मीडिया अकाउंट है. इनमें Instagram और Facebook सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले प्लेटफॉर्म में शामिल थे. रिपोर्ट के अनुसार कुछ 10 साल के बच्चों के पास भी Facebook और Instagram अकाउंट पाए गए. यह चिंता इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि सोशल मीडिया पर बच्चों को ऐसा कंटेंट भी मिल सकता है, जो उनकी उम्र के हिसाब से सही नहीं है.

हर मोबाइल इस्तेमाल को गलत नहीं कहा जा सकता

रिपोर्ट का एक सकारात्मक पहलू भी है, 78.9 फीसदी बच्चों ने बताया कि वो मनोरंजन, गेम, म्यूजिक और चैटिंग जैसे कामों के लिए दिन में 0 से 2 घंटे स्मार्टफोन इस्तेमाल करते हैं. वहीं 31.5 फीसदी बच्चों को लगा कि इंटरनेट ने उनकी क्रिएटिविटी को काफी बढ़ाया है और 40.5 फीसदी ने माना कि इसमें कुछ बढ़ोतरी हुई है. इसलिए समस्या मोबाइल होने में नहीं, बल्कि उसके इस्तेमाल के तरीके में है. सही निगरानी और सही उद्देश्य के साथ इंटरनेट बच्चों की पढ़ाई और रचनात्मकता के लिए उपयोगी साबित हो सकता है.

माता-पिता की भूमिका सबसे अहम

रिपोर्ट के अनुसार 76.2 फीसदी माता-पिता ने बताया कि उन्होंने बच्चों के मोबाइल और इंटरनेट इस्तेमाल के लिए समय सीमा तय कर रखी है. माता-पिता में 37.2 फीसदी ने माना कि बच्चों के लिए स्मार्टफोन का सबसे अच्छा इस्तेमाल होमवर्क में मदद के लिए है. स्टडी में यह भी सुझाव दिया गया कि माता-पिता खुद भी बच्चों के सामने मोबाइल का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल न करें. बच्चों के साथ बातचीत बढ़ाना, उन्हें आउटडोर गेम के लिए प्रेरित करना और मोबाइल में मौजूद कंट्रोल जैसे फीचर्स का इस्तेमाल करना मददगार हो सकता है.

राज्य के हिसाब से बच्चों का सोशल मीडिया इस्तेमाल

NCPCR की स्टडी में बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को अलग-अलग रीजन के हिसाब से भी देखा गया. इसके लिए दिल्ली-NCR, तेलंगाना, झारखंड-ओडिशा, महाराष्ट्र और असम को शामिल किया गया. आंकड़ों से पता चलता है कि हर रीजन में सोशल मीडिया इस्तेमाल का स्तर अलग है और कुछ जगहों पर Instagram तो कुछ जगहों पर Facebook बच्चों के बीच ज्यादा लोकप्रिय है.

  • दिल्ली-NCR: यहां 41.4% बच्चों का अपना सोशल मीडिया अकाउंट था. इस रीजन में Instagram सबसे लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रहा.
  • तेलंगाना (हैदराबाद): यहां 41.3% बच्चों के पास अपना सोशल मीडिया अकाउंट था. दिल्ली-NCR की तरह यहां भी Instagram सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया गया.
  • झारखंड-ओडिशा: इस रीजन में आंकड़ा बढ़कर 47.6% रहा. यानी यहां सोशल मीडिया अकाउंट रखने वाले बच्चों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा थी. इस क्षेत्र में Facebook सबसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म रहा.
  • महाराष्ट्र: यहां करीब 40% बच्चों का अपना सोशल मीडिया अकाउंट था. इन बच्चों के बीच Facebook सबसे लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रहा.
  • असम: यहां 47.1% बच्चों के पास अपना सोशल मीडिया अकाउंट था. इस रीजन में Instagram सबसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म रहा.

कौन-सा ऐप सबसे ज्यादा लोकप्रिय?

पूरे अध्ययन में बच्चों के बीच Instagram सबसे आगे रहा. सोशल मीडिया अकाउंट रखने वाले बच्चों में 45.5% Instagram इस्तेमाल करते थे, जबकि 36.8% बच्चे Facebook पर थे. इस तरह देखा जाए तो झारखंड-ओडिशा में सोशल मीडिया अकाउंट रखने वाले बच्चों का प्रतिशत सबसे ज्यादा 47.6% था, जबकि महाराष्ट्र में यह करीब 40% रहा. वहीं ऐप की बात करें तो Instagram दिल्ली-NCR, तेलंगाना और असम में सबसे लोकप्रिय रहा, जबकि झारखंड-ओडिशा और महाराष्ट्र में Facebook बच्चों की पहली पसंद रहा.

Smartphone Effects On Children

बच्चों के स्मार्टफोन इस्तेमाल का असर (Getty Image)

शिक्षकों के सामने भी बड़ी चुनौती

मोबाइल का इस्तेमाल सिर्फ घर तक सीमित नहीं है. ऑनलाइन पढ़ाई ने शिक्षकों के सामने भी नई चुनौती खड़ी की. स्टडी में 54.1 फीसदी शिक्षकों ने माना कि कक्षा में स्मार्टफोन का इस्तेमाल बहुत ज्यादा या कुछ हद तक ध्यान भटकाने वाला है. वहीं 72.7 फीसदी शिक्षकों के पास स्मार्टफोन या इंटरनेट डिवाइस से पढ़ाने का पहले का अनुभव नहीं था. रिपोर्ट के मुताबिक शिक्षकों को डिजिटल ट्रेनिंग, बेहतर शैक्षणिक सामग्री और बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखने वाले टूल उपलब्ध कराने की जरूरत है.

डिजिटल इस्तेमाल के लिए सुझाव

NCPCR की स्टडी में बच्चों के सुरक्षित डिजिटल इस्तेमाल के लिए कई सुझाव दिए गए हैं. इसमें बच्चों का स्क्रीन टाइम सीमित रखने और माता-पिता की निगरानी पर जोर दिया गया है. बच्चों को मोबाइल गेमिंग के बजाय खेल और दूसरी गतिविधियों से जोड़ने की सलाह दी गई. फोन में पैरेंटल कंट्रोल और कंटेंट फिल्टर का इस्तेमाल करने को कहा गया. बच्चों को साइबर क्राइम, साइबर बुलिंग और इंटरनेट सुरक्षा के बारे में जागरूक करने की जरूरत बताई गई. स्कूलों में सुरक्षित डिजिटल इस्तेमाल, क्रिएटिव पढ़ाई और साइबर सेफ्टी की जानकारी देने की सिफारिश की गई है.

अंकिता

अंकिता

शिव की नगरी काशी से अपने करियर की शुरुआत करने वाली अंकिता पाण्डेय ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से पत्रकारिता में अपनी मास्टर्स की डिग्री पूरी की है.  पत्रकारिता में आने के लिए उन्होंने बनारस के लोकल न्यूज पेपर "काशीवार्ता" से अपनी शुरुआत की, बाद में दिल्ली जैसे महानगरी का रुख करते हुए उन्होंने TV9 भारतवर्ष में अक्टूबर साल 2023 से जुड़ी. आज वह इस ऑर्गनाइजेशन में बतौर सब-एडिटर काम कर रही हैं. क्राइम, एंटरटेनमेंट और अन्य सभी को न्यूज के साथ विजुअल तरीके से पेश करने में रुचि है. पत्रकारिता के अलावा कविताएं लिखना, फोटोग्राफी करना और म्यूजिक का भी शौक रखती हैं.

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