कानपुर में नकली सीमेंट, 100 की बोरी 400 में बेची:M.Com पास निशांत बोला- कोयले की राख मिलाते थे, हर माह 15000 बोरियां की सप्लाई
कानपुर6 मिनट पहले
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इस्पात नगर स्थित नकली सीमेंट फैक्ट्री
कानपुर में नकली सीमेंट बनाने के मामले में मेरठ के आरोपी निशांत मित्तल से पूछताछ में कई खुलासे हुए हैं। पुलिस के मुताबिक, वह कंपनियों की डैमेज सीमेंट की बोरियां खरीदकर कानपुर भेजता था। यहां उनमें भट्ठे की राख और केमिकल मिलाकर दोबारा पैकिंग की जाती थी।
आरोप है कि एसीसी और अंबुजा के नाम से तैयार नकली सीमेंट की बोरियां बाजार में 300 से 400 रुपए में बेची जाती थीं। इस कारोबार में कानपुर के नीरज और धीरज गुप्ता के साथ मेरठ के सुनील मित्तल और निशांत मित्तल की साझेदारी बताई गई है।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने तीन साल में 10 लाख से ज्यादा बोरियां खपाने की बात कही है। इनमें सीएम ग्रिड, लखनऊ एयरपोर्ट और दूसरे निर्माण कार्यों में इस्तेमाल की गई सीमेंट भी शामिल होने का दावा है। हालांकि, इस पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है।

मेरठ का रहने वाला आरोपी निशांत मित्तल
पहले पूरा मामला जानिए…
इस्पात नगर स्थित फैक्ट्री में छापा मारा गया था
अडानी ग्रुप के कानपुर शाखा के सीनियर सेल्स मैनेजर मुमताजुल हक की शिकायत पर पुलिस ने 14 अक्टूबर को पनकी के इस्पात नगर स्थित फैक्ट्री में छापा मारा था। जहां अडानी ग्रुप की एसीसी व अंबुजा कंपनी के नाम की नकली सीमेंट बनाई जा रही थी। फैक्ट्री से 1000 से अधिक सीमेंट की भरी व 3000 हजार से अधिक खाली बोरियां व काफी मात्रा में खुली नकली सीमेंट बरामद हुई थी।
पुलिस ने एक मुंशी राहुल को भी गिरफ्तार किया था। उसके मुताबिक, फैक्ट्री के संचालक नीरज गुप्ता और उसके भाई धीरज गुप्ता हैं। यह दोनों पिछले तीन साल से अंबुजा और एसीसी सीमेंट के डिस्ट्रीब्यूटर भी हैं। फैक्ट्री में मेरठ के सुनील मित्तल व निशांत मित्तल साझेदार हैं। डिस्ट्रीब्यूटर की आड़ में फैक्ट्री में नकली सीमेंट बनाकर कई शहरों में सप्लाई होती है। इसमें सीएम ग्रिड, लखनऊ एयरपोर्ट भी शामिल हैं।
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि मुकदमा दर्ज होने के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीम लगाई गई। एक टीम मेरठ पहुंची। वहां निशांत ने अपने पिता सुनील मित्तल को भगाने में सहयोग किया। पुलिस ने 19 अक्टूबा को जब निशांत को मेरठ से दबोचा तो उसने पूछताछ में दिल्ली के प्रीतमपुरा निवासी पवन गोयल का नाम बताया। उसने बताया कि पवन गोयल भी उसी की तरह नकली सीमेंट की ट्रेडिंग का काम करता था।

मंगलवार को पुलिस कमिश्नर ने सीमेंट फैक्ट्री का निरीक्षण किया था।
तीन साल में 10 लाख से ज्यादा बोरियां खपाई
पुलिस कमिश्नर के मुताबिक पूछताछ में आरोपी निशांत मित्तल ने बताया कि इस फैक्ट्री से तीन साल में 10 लाख से ज्यादा बोरियां सीएम ग्रिड, लखनऊ एयरपोर्ट और अन्य कई निर्माण कार्यों में खपाई जा चुकी हैं। निशांत ने पुलिस कमिश्नर को बताया कि पानी से भीगी और कटी-फटी बोरियां कंपनियां डैमेज घोषित कर देती हैं, जिसके बाद इन डैमेज सीमेंट की बोरियों की नीलामी कंपनियां करती थीं।
निशांत ने बताया कि इन्हें वह 100 रुपए प्रति बोरी की दर से खरीद लेता था, इसके बाद बल्क में डैमेज सीमेंट को कानपुर भिजवाया जाता था। प्रतिमाह करीब 15 हजार सीमेंट की बोरियां सप्लाई करता था। नीरज गुप्ता और धीरज गुप्ता से उसे प्रत्येक बोरी में 15 से 20 रुपए मुनाफा देते थे। जिन्हें गुप्ता बंधु कानपुर समेत आसपास के कई जिलों में सप्लाई करते थे।
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि फैक्ट्री संचालक नीरज और धीरज की लालबंगला में फर्म है, जबकि उन्होंने पिछले करीब 10 सालों से पनकी के इस्पात नगर में वेयरहाउस बना रखा था।

छापेमारी के बाद नकली सीमेंट फैक्ट्री सील की गई।
गमले और इंटरलॉकिंग बनाने के लिए खरीदता था सीमेंट
पूछताछ के दौरान निशांत ने बताया कि वह गमला बनाने, इंटरलॉकिंग ईंट, ग्रामीण इलाकों में बिछाए जाने वाले खड़ंजों की भरान, मकानों में चुनाई कराने के लिए सीमेंट खरीदता था। इसी काम के लिए वह गुप्ता भाइयों को सीमेंट भी सप्लाई करता था, लेकिन वह सीएम ग्रिड के तहत बनायी जा रही सड़कों, पुलों, पुलियों के निर्माण समेत अन्य सरकारी प्रोजेक्टों ने इन सीमेंट की बोरियों को खपाते थे।
डैमेज सीमेंट में मिलाते थे भट्ठे की राख
आरोपी निशांत ने बताया कि उसके साथी नीरज और धीरज डैमेज सीमेंट को पीस कर उसका बुरादा तैयार करते थे, फिर उसमें केमिकल के साथ ईंट भट्ठे से निकला कोयले की राख मिक्स की जाती थी।
इसके बाद ब्रांडेड कंपनियों के ट्रेडमार्क वाली बोरियों में नकली सीमेंट की पैकिंग की जाती, फिर वही डैमेज सीमेंट 300 से 400 रुपए में बाजारों में बेची जाती थी। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि पैकिंग के लिए बोरियों की प्रिंटिंग आरोपी नीरज और धीरज ही कराते थे।

सीमेंट फैक्ट्री से ब्रांडेड कंपनियों की बोरियां बरामद की गईं।
कानपुर के गुप्ता बंधु फरार, निशांत को कोर्ट से बेल मिली
नकली सीमेंट फैक्ट्री में छापेमारी के बाद फैक्ट्री संचालक सगे भाई नीरज और धीरज गुप्ता फरार हैं। जिनकी तलाश में आठ टीमें लगी हुई है। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि आरोपी गुप्ता बंधुओं की आखिरी लोकेशन नेपाल बॉर्डर के आसपास के इलाकों में मिली है, आरोपियों के नेपाल भागने की संभावना है। इसके साथ ही नीरज और धीरज हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत लेने की फिराक में हैं।
पुलिस ने 19 अक्टूबर सोमवार देर रात आरोपी निशांत को मेरठ से गिरफ्तार कर लिया। वहां स्थानीय थाने में पूछताछ के दौरान उसने दिल्ली के पवन गोयल का नाम लिया। उसी रात पनकी पुलिस बिना ट्रांजिट रिमांड कराए आरोपी पवन गोयल की गिरफ्तारी के लिए निशांत को लेकर दिल्ली रवाना हो गई। हालांकि उसे पवन पुलिस के हाथ नहीं लग सका।
इसके बाद निशांत को पुलिस कानपुर लेकर पहुंची और कई घंटों बाद 20 अक्टूबर को उसे कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने पुलिस से पूछा कि आखिर इतने समय तक आरोपी कहां था ? जिसका पुलिस कोई ठोस जवाब नहीं दे सकी। इस पर कोर्ट ने एक लाख के निजी मुचलके पर उसे जमानत दे दी। वह जेल नहीं गया।

एडिशनल पुलिस कमिश्नर संकल्प शर्मा ने घटना और उसके बाद हुई कार्रवाई की जानकारी दी।
नकली सीमेंट की जांच कराएगी पुलिस
आरोपियों के खिलाफ मुकदमे में पुख्ता सबूत तैयार करने के लिए अब पुलिस नकली सीमेंट के सैंपल जांच के लिए आईआईटी कानपुर या एचबीटीयू भेजेगी। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि नकली सीमेंट मामले में एसीसी कंपनी की विजिलेंस टीम को बुलाया गया है। टीम के जरिए ही नकली सीमेंट के नमूने भरवाए जाएंगे, फैक्ट्री से मिली फर्जी ट्रेडमार्क की बोरियों को सैंपल के रूप में भेजा जाएगा।
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