मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के प्रतिष्ठित नगर सेठ परिवार ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान तत्कालीन ब्रिटिश सरकार को दिए गए 35 हजार रुपए के वार लोन की राशि पर दावा किया था। परिवार का कहना है कि इस संबंध में ब्रिटेन सरकार के लोन मैनेजमेंट ऑफिस से तीन अगस्त क

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नगर सेठ विनय रुठिया और उनके छोटे भाई विवेक रुठिया के अनुसार, पुराने कागजों की छानबीन के दौरान वर्ष 1917 के दस्तावेज मिले। उस समय भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था और प्रथम विश्व युद्ध चल रहा था। युद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार ने सैनिकों के राशन, संसाधनों और अन्य खर्चों के लिए भारत से आर्थिक सहयोग जुटाया था।

परिवार का दावा है कि उसी समय उनके पूर्वजों ने ब्रिटिश सरकार को 35 हजार रुपए वार लोन के रूप में दिए थे। यह राशि युद्ध संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उपलब्ध कराई गई थी।

परिवार का दावा है, पूर्वजों ने ब्रिटिश सरकार को 35 हजार लोन के रूप में दिए थे।

परिवार का दावा है, पूर्वजों ने ब्रिटिश सरकार को 35 हजार लोन के रूप में दिए थे।

ब्रिटेन सरकार को भेजा गया कानूनी नोटिस विनय रुठिया ने बताया कि दस्तावेज मिलने के बाद उनके अधिवक्ता श्रेयांस रानीवाला के माध्यम से यूके लोन मैनेजमेंट ऑफिस को कानूनी नोटिस भेजा गया। यह नोटिस ईमेल और हार्ड कॉपी, दोनों माध्यमों से प्रेषित किया गया था।

यूके डेट मैनेजमेंट ऑफिस ने मांगी और जानकारी हाल ही में यूके डेट मैनेजमेंट ऑफिस की ओर से अधिवक्ता को भेजे गए जवाब में कहा गया है कि यदि दावेदार को किसी अप्राप्त भुगतान (Unclaimed Payment) का अधिकार होने की संभावना है, तो संबंधित होल्डिंग से जुड़े उपलब्ध दस्तावेजों के साथ Gilt Registrar - Computershare Investor Services PLC से संपर्क किया जाए।

कार्यालय ने यह भी बताया कि अब तक उपलब्ध कराए गए दस्तावेज आगे भेज दिए गए हैं। साथ ही परिवार से कहा गया है कि यदि उनके पास प्रमाण-पत्र, पत्राचार या अन्य दस्तावेजी साक्ष्य उपलब्ध हैं तो उनकी प्रतियां भी उपलब्ध कराई जाएं, ताकि दावे की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके।

पुराने दस्तावेज देखते समय सेठ परिवार को लोन संबंधी कागज मिले थे।

पुराने दस्तावेज देखते समय सेठ परिवार को लोन संबंधी कागज मिले थे।

दस्तावेज भेजने की तैयारी में परिवार रुठिया परिवार का कहना है कि वे जल्द ही सभी आवश्यक दस्तावेज ब्रिटिश अधिकारियों को उपलब्ध कराएंगे। उनका मानना है कि इसके बाद दावे की वैधानिक प्रक्रिया और आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। परिवार को उम्मीद है कि ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर उनके दावे पर सकारात्मक निर्णय मिल सकता है।

ब्रिटेन सरकार के लोन विभाग से यह ई-मेल सेठ परिवार के वकील को मिला है।

ब्रिटेन सरकार के लोन विभाग से यह ई-मेल सेठ परिवार के वकील को मिला है।

फरवरी माह में भेजा था नोटिस ब्रिटिश हुकूत के साथ कर्ज के लेन-देन को लेकर हुई लिखा-पढ़ी के आधार पर पोते विवेक रूठिया ने ब्रिटिश शासन को लीगल नोटिस फरवरी में भेजा था। रूठिया के मुताबिक, उस समय की 35 हजार रुपए की राशि इस समय का करोड़ों में है। सेठ विवेक रूठिया ने बताया कि ब्रिटिश हुकूमत को कर्ज देने के 20 साल बाद 1937 में उनके दादा सेठ जुम्मा लाल की मौत हो गई। उन्हें वसीयत में ब्रिटिश हुकूमत के साथ हुई लिखा-पढ़ी के दस्तावेज मिले।

फोटो- जुम्मालाल रुठिया का है, इन्होंने ब्रिटेन हुकूमत को वार लोन दिया था।

फोटो- जुम्मालाल रुठिया का है, इन्होंने ब्रिटेन हुकूमत को वार लोन दिया था।

बोले- शहर की 40 फीसदी बसाहट उन्हीं की जमीन पर विवेक रूठिया का दावा है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत एक संप्रभु देश सिद्धांतत: अपने पुराने कर्ज को चुकाने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है। रूठिया के बारे में कहा जाता है कि शहर की 40 से 45 फीसदी बसाहट उनकी जमीन पर है।

इंदौर, सीहोर और भोपाल में कई प्रोपर्टी तो ऐसी बताई जाती हैं, जो रूठिया परिवार के नाम पर दर्ज हैं, लेकिन उन्हें पता ही नहीं है, यदि पता भी है तो उन पर दूसरे लोगों का कब्जा है। शहर की कई प्रॉपर्टी को लेकर रूठिया परिवार का कब्जेधारियों से विवाद भी चल रहा है। कुछ ऐसे भी लोग हैं जो इनके मकान, दुकानों में रहते हैं और पुराने हिसाब से 50 से 500 रुपए तक ही किराया देते हैं।

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109 साल बाद पोतों ने भारत सरकार से मांगा हिसाब

रुठिया परिवार ने दावा किया है कि उनके दादा सेठ जुम्मा लाल रुठिया ने 1917 में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार को 35 हजार रुपए का कर्ज दिया था, जिसका आज तक भुगतान नहीं हुआ है।

अब उनके पोते विवेक और विनय रुठिया ने इस पुराने युद्ध ऋण की अदायगी को लेकर भारत सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है और अपने हक के लिए सीधे ब्रिटेन सरकार को भी नोटिस भेजने की बात कही है। पूरी खबर पढ़िए…

109 साल बाद करोड़ों के कर्ज की कानूनी मांग विवेक रूठिया ने दावा किया है कि उनके दादा सेठ जुम्मा लाल रूठिया द्वारा ब्रिटिश हुकूमत को दिया गया कर्ज आज तक वापस नहीं किया गया है। अब वे 109 साल पुराने इस मामले में ब्रिटिश सरकार को कानूनी नोटिस भेजने की तैयारी कर रहे हैं। पूरी खबर पढ़िए…