Published: Wednesday, October 7, 2026, 15:30 [IST]
Shardiya Navratri 2026 Ghatasthapana: शारदीय नवरात्रि की शुरुआत इस साल 11 अक्टूबर 2026, रविवार से हो रही है। नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा की पूजा से पहले घरों में कलश स्थापना यानी घटस्थापना की जाती है। जो भक्त नौ दिनों तक व्रत और मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं, उनके लिए घटस्थापना का विशेष महत्व माना गया है। इस बार कलश स्थापना के लिए दो शुभ समय बताए गए हैं, जिनमें एक सुबह और दूसरा दोपहर के अभिजीत मुहूर्त में रहेगा।
अगर आप भी घर में कलश स्थापित करने जा रहे हैं तो पूजा शुरू करने से पहले सभी जरूरी चीजें जुटा लें। कलश किस चीज का होना चाहिए, उसमें क्या-क्या डालना है, नारियल कैसे रखना है और स्थापना की पूरी विधि क्या है, यहां आसान तरीके से समझिए।
कलश स्थापना के लिए क्या-क्या चाहिए?
घटस्थापना शुरू करने से पहले पूजा की सभी सामग्री एक जगह रख लें। इसके लिए मिट्टी या धातु का कलश, साफ या पवित्र जल, जौ, मिट्टी, आम या अशोक के पत्ते, दूर्वा, अक्षत, सिक्का, नारियल और रक्षासूत्र या कच्चा सूत चाहिए। इसके अलावा पूजा के लिए रोली, चंदन, फूल, दीपक और पूजा की चौकी भी रखी जा सकती है।
कलश मिट्टी का हो तो अच्छा माना जाता है। इसके अलावा तांबे, पीतल, चांदी या सोने के कलश का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार लोहा, स्टील और प्लास्टिक का कलश इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।
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ऐसे तैयार करें पूजा की जगह
कलश स्थापना से पहले सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें। इसके बाद घर के पूजा स्थल या जहां घटस्थापना करनी है, उस स्थान को अच्छी तरह साफ करें। एक साफ चौकी या जमीन पर पूजा का स्थान तैयार करें। इसके बाद मिट्टी रखकर उसमें जौ बोएं। मान्यता के अनुसार नवरात्रि के दौरान इन जौ का बढ़ना शुभ माना जाता है।
ऐसे तैयार करें कलश
अब कलश पर रक्षासूत्र या कच्चा सूत बांधें। कलश के अंदर साफ या पवित्र जल भरें। इसमें अक्षत, दूर्वा और एक सिक्का डालें। इसके बाद कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते लगाएं। पत्तों को इस तरह रखें कि उनका कुछ हिस्सा बाहर दिखाई देता रहे।
अब नारियल को पूजा के लिए तैयार करें। परंपरा के अनुसार नारियल को लाल वस्त्र या चुनरी में लपेटकर उस पर रक्षासूत्र बांधा जा सकता है। इसके बाद नारियल को कलश के ऊपर रखें।
इस तरह करें कलश स्थापना
तैयार कलश को जौ बोए गए स्थान पर स्थापित करें। इसके बाद भगवान गणेश का ध्यान कर पूजा शुरू करें। मां दुर्गा का स्मरण करते हुए उनसे नौ दिनों तक घर में विराजमान रहने की प्रार्थना करें। कलश को साक्षी मानकर नौ दिनों तक व्रत और पूजा करने का संकल्प लें। इसके बाद मां दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा करें। फूल, अक्षत और प्रसाद अर्पित करें और दीपक जलाकर आरती करें।
अखंड ज्योति जला रहे हैं तो रखें ध्यान
कई भक्त घटस्थापना के साथ अखंड ज्योति भी जलाते हैं। अगर आप अखंड ज्योति जला रहे हैं तो उसे सुरक्षित स्थान पर रखें और नौ दिनों तक उसकी देखभाल करें। दीपक ऐसी जगह नहीं होना चाहिए, जहां पर्दे, कपड़े या दूसरी ज्वलनशील चीजें पास हों। मान्यता के अनुसार अखंड ज्योति को लगातार जलाए रखने की परंपरा है। इसलिए घर का कोई सदस्य उसकी नियमित देखभाल करता रहे।
कलश स्थापना कौन कर सकता है?
नवरात्रि का व्रत रखने वाली महिला या पुरुष दोनों कलश स्थापना कर सकते हैं। परिवार का मुखिया भी घटस्थापना कर सकता है। पति-पत्नी साथ बैठकर भी कलश स्थापित कर सकते हैं। कलश स्थापना के बाद नौ दिनों तक पूजा स्थल की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। तामसिक भोजन से बचने और पूजा-व्रत के नियमों का पालन करने की परंपरा है। घर में जन्म या मृत्यु के कारण सूतक या पातक होने पर कलश स्थापना नहीं करने की धार्मिक मान्यता है।
कलश को क्यों माना जाता है खास?
श्रीमद्देवीभागवत पुराण में शुभ धार्मिक कार्यों के दौरान कलश स्थापना का महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार कलश के मुख में भगवान विष्णु, कंठ में भगवान शिव और मूल में ब्रह्मा का वास माना जाता है। इसके बीच के हिस्से में देवी के स्वरूपों का स्थान माना गया है। इसी वजह से नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापित कर उसे नौ दिनों की पूजा, व्रत और संकल्प का साक्षी माना जाता है।
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