डिंडौरी निवासी बस संचालक संजय केशवानी और साधना केशवानी के खिलाफ कुछ दिन पहले EOW ने जांच की थी। अब संजय केशवानी से जुड़े आकाश ट्रैवल्स के खिलाफ चेक बाउंस मामले में जबलपुर जिला न्यायालय ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। कोर्ट ने वारंट की तामील के लिए ड
.
जबलपुर निवासी डॉ. श्रीकृष्ण बिलैया जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से प्रोफेसर पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। मूल रूप से डिंडौरी निवासी बिलैया के पड़ोस में आकाश ट्रैवल्स के संचालक संजय केशवानी और उनकी पत्नी साधना केशवानी रहते थे। दोनों ने अक्टूबर 2023 में व्यापार के लिए उनसे साढ़े 12 लाख रुपए उधार लिए थे। उन्होंने रकम लौटाने के लिए दो महीने का समय मांगा था। भरोसा कर बिलैया ने उन्हें रुपए दे दिए।
दो महीने बाद रकम वापस मांगने पर दंपती ने टालमटोल की और जल्द रुपए लौटाने का आश्वासन दिया। सितंबर 2024 में संजय केशवानी ने बिलैया को साढ़े 12 लाख रुपए के चेक दिए, लेकिन सभी चेक बाउंस हो गए।
शिकायत के मुताबिक, संजय ने IDBI बैंक का 6.50 लाख रुपए का एक चेक, स्टेट बैंक डिंडौरी के दो चेक और HDFC बैंक के पांच चेक दिए थे। सभी चेक अनादरित हो गए। इसके बाद 26 सितंबर 2024 को कानूनी नोटिस भेजा गया, लेकिन संजय केशवानी ने उसका भी जवाब नहीं दिया।

डॉ. श्रीकृष्ण बिलैया और डॉ. शोभना बिलैया ने बाउंस हुए चेक कोर्ट में पेश किए और मामले दर्ज कराए। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दिव्यकृष्ण के अनुसार, संजय केशवानी ने जिस खाते के चेक दिए थे, वह काफी समय पहले ही बंद हो चुका था। उनका आरोप है कि इसके बावजूद जानबूझकर उन्हीं खातों के चेक जारी किए गए।
सुनवाई के दौरान आरोपियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए जबलपुर जिला न्यायालय ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। वारंट की तामील और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए डिंडौरी पुलिस को कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
न्यायालयीन रिकॉर्ड में एक मामले में डॉ. शोभना बिलैया बनाम साधना केशवानी और दूसरे में डॉ. श्रीकृष्ण बिलैया बनाम मेसर्स आकाश ऑटोमोबाइल्स/आकाश रोडवेज डिंडौरी प्राइवेट लिमिटेड एवं संजय केशवानी का उल्लेख है। दोनों मामलों में अगली सुनवाई 8 सितंबर 2026 को निर्धारित है।
गौरतलब है कि संजय केशवानी और साधना केशवानी के खिलाफ पहले भी आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) से जुड़ा मामला सामने आ चुका है। डिंडौरी में बस संचालन और टैक्स से संबंधित शिकायत पर EOW जबलपुर ने कार्रवाई की थी।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2006 से 2025 के बीच संचालित बसों के टैक्स भुगतान में कथित अनियमितताओं की शिकायत पर जांच की गई थी और संबंधित लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया था।