उत्तर प्रदेश की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए बड़ी खबर है। राज्य सरकार ने उनके मानदेय में बढ़ोतरी कर दी है। लेकिन, अब पूरा पैसा पाने के लिए उन्हें जमीन पर काम और डिजिटल रिपोर्टिंग 100% सही रखनी होगी।
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नए नियमों के मुताबिक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को 12 हजार और सहायिकाओं को 6 हजार रुपए का पूरा मानदेय तभी मिलेगा, जब वे अपने सभी काम और एप पर डेटा फीडिंग समय पर पूरा करेंगी।
अगर काम या रिपोर्टिंग में थोड़ी भी ढिलाई हुई, तो परफॉर्मेंस इंसेंटिव (PLI) के रूप में कार्यकर्ताओं के 4 हजार और सहायिकाओं के 2 हजार रुपए कट जाएंगे। यानी अब सिर्फ सेंटर पर आने-जाने भर से पूरी सैलरी नहीं मिलेगी। बच्चों और गर्भवती महिलाओं की सेवा का पूरा हिसाब देना होगा।

8 सितंबर, 2026 को अयोध्या में सीएम योगी ने आंगनवाड़ी वर्कर्स के मानदेय में बढ़ोतरी का ऐलान किया था।
पहले मानदेय और PLI का गणित समझिए
यूपी में 1 लाख 75 हजार 335 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और 1 लाख 68 हजार 158 सहायिकाएं हैं। इनके मानदेय में हुई बढ़ोतरी को समझने के लिए 'फिक्स्ड सैलरी' और 'इंसेंटिव' पर ध्यान देना होगा।
- पहले कार्यकर्ताओं का मानदेय : 8 हजार में से 6,500 रुपए फिक्स्ड था। 1,500 पीएलआई था।
- मानदेय कैसे और कितना बढ़ा : सरकार ने 2,500 रुपए फिक्स्ड मानदेय बढ़ाया। 2,500 रुपए पीएलआई बढ़ाया है।
यानी कार्यकर्ता का फिक्स्ड मानदेय 8 हजार हो गया है और पीएलआई 4 हजार रुपए हो गया है। इसी तरह सहायिकाओं का फिक्स्ड मानदेय 4 हजार रुपए है और PLI (इंसेंटिव) 2 हजार रुपए मिलेगा।
अगर कोई कार्यकर्ता महीने में 21 दिन केंद्र खोलकर बच्चों को पढ़ाने और खिलाने का बेसिक काम करती है, तो उसे सिर्फ 8 हजार रुपए मिलेंगे। बाकी के 4,000 रुपए तभी मिलेंगे, जब वे विभाग के तय किए गए अन्य सभी डिजिटल और मैदानी काम पूरे करेंगी। इस 4 हजार रुपए के इंसेंटिव में 2,500 रुपए राज्य सरकार देती है। 1,500 रुपए केंद्र सरकार की ओर से दिए जाएंगे।

मानदेय बढ़ोतरी के साथ आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को ₹5 लाख तक कैशलेस इलाज मिलेगा, स्मार्टफोन भी दिए जाएंगे।
जानिए कैसे मिलेगा पूरा PLI?
1. आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का सैलरी ब्रेकअप
कुल मानदेय- 12 हजार रुपए
फिक्स्ड- 8 हजार रुपए
PLI (इंसेंटिव)- 4 हजार रुपए ऐसे मिलेंगे-
- ₹1000 हर महीने पूरक पोषाहार का 100% सही वितरण करने पर।
- ₹2 हजार हर महीने 'पोषण ट्रैकर' एप पर सभी कॉलम और डेटा की 100% फीडिंग पूरी करने पर।
- ₹1000 पोषण ट्रैकर पर 80% मेजरिंग एफिशिएंसी (बच्चों की नाप-तौल) और 60% गृह भ्रमण (घर-घर जाकर दौरा) पूरा करने पर।
2. आंगनवाड़ी सहायिकाओं का सैलरी ब्रेकअप
कुल मानदेय- 6 हजार रुपए
फिक्स्ड- 4 हजार रुपए
PLI (इंसेंटिव)- 2 हजार रुपए ऐसे मिलेंगे
- ₹800 हर महीने अनुपूरक पोषाहार का 100% वितरण कराने में मदद करने पर।
- ₹700 पोषण ट्रैकर के सभी जरूरी क्षेत्रों में 100% फीडिंग कराने पर।
- ₹500 हर महीने कम से कम 21 दिन आंगनवाड़ी केंद्र खोलने पर।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को ये 4 जिम्मेदारियां निभानी होंगी
सरकार ने कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियां तय कर दी हैं। अधिकारियों का दावा है कि अगर मन लगाकर काम किया जाए, तो ये टास्क महीने में 5 से 7 दिनों में निपटाए जा सकते हैं।
1. पढ़ाई और केंद्र संचालन- बच्चों को खेल-खेल में स्कूल जाने से पहले बच्चों को दी जाने वाली प्रारंभिक शिक्षा (ECCE) देना, अक्षर ज्ञान सिखाना और अच्छी आदतें डालना। बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए रचनात्मक और सांस्कृतिक कार्यक्रम कराना।
2. पोषण और स्वास्थ्य की देखभाल- 6 साल से छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को पौष्टिक आहार और राशन देना। बच्चों की लंबाई और वजन नापकर गंभीर रूप से कुपोषित (SAM/MAM) बच्चों की पहचान करना। एएनएम (ANM) और आशा (ASHA) के साथ मिलकर बच्चों और महिलाओं का समय पर टीकाकरण करवाना। बीमार बच्चों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) रेफर करना। पल्स पोलियो और अन्य सरकारी स्वास्थ्य अभियानों में सक्रिय रहना।
3. डिजिटल रिपोर्टिंग- मोबाइल पर रियल टाइम डेटा दर्ज करना। राशन और पोषाहार वितरण के दौरान फेशियल रिकग्निशन सिस्टम का इस्तेमाल करना। नए डिवाइस के जरिए बच्चों की वृद्धि नापकर मोबाइल पर तुरंत एंट्री करना।
4. सर्वे और होम विजिट- माताओं के घर जाकर उन्हें साफ-सफाई, स्तनपान और संतुलित आहार के प्रति जागरूक करना। क्षेत्र में नए जन्म, मृत्यु, गर्भवती महिलाओं और परिवारों का रजिस्टर मेंटेन रखना।

50% कार्यकर्ताओं को नहीं मिल पाता है पूरा पीएलआई
बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के अफसरों का कहना है कि मौजूदा समय में करीब 50% कार्यकर्ताओं को पूरा PLI नहीं मिल पाता है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह यह है कि कई कार्यकर्ता 'पोषण ट्रैकर एप' पर अपना डेटा और रिपोर्ट समय पर अपलोड नहीं कर पातीं। नियम यह है कि आप जितनी रिपोर्ट पोर्टल पर चढ़ाएंगे, उसी अनुपात में पीएलआई का पैसा आपके खाते में बनेगा।
अधिकारियों को उम्मीद है कि इंसेंटिव की राशि 4 हजार रुपए बढ़ने से रिपोर्ट अपलोड करने वाली कार्यकर्ताओं की संख्या बढ़ेगी। करीब 90% तक महिलाएं पूरा PLI हासिल कर सकेंगी।
पोषण ट्रैकर एप से बिचौलियों का खेल खत्म
बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के अधिकारियों का मानना है कि पीएलआई (PLI) सिस्टम को पोषण ट्रैकर एप और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने के बाद बिचौलियों और भ्रष्टाचार का खेल खत्म हो गया है।
अधिकारियों के मुताबिक, जैसे ही कार्यकर्ता अपने मोबाइल से काम की रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड करेंगी, उनका इंसेंटिव सिस्टम अपने आप तैयार कर देगा। इसे रोकने की ताकत किसी अधिकारी के पास नहीं होगी। इससे योजनाओं का असली लाभ जरूरतमंद बच्चों और महिलाओं तक पहुंचेगा।

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