रायपुर34 मिनट पहलेलेखक: आनंद शर्मा

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सरकारी कंपनी टेंडर में थी, बिलासपुर सिम्स के 800 बेड अस्पताल के टेंडर की 2 शर्तों की CGMSC ने की अनदेखी

छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन ने बिलासपुर के कोनी में सिम्स मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के 800 बिस्तर वाले भवन निर्माण के लिए 1,321.27 करोड़ रुपए का टेंडर किया। भास्कर की पड़ताल में इसके मूल्यांकन पर सवाल उठ रहे हैं।

जनवरी में स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी अस्पतालों की पैथोलॉजी सेवा का काम सरकारी कंपनी एचएलएल को नॉमिनेशन के आधार पर दिया था। वहीं सिम्स के इस टेंडर में सरकारी कंपनी ब्रिजेज एंड रूफ ने बाकायदा बोली लगाई, लेकिन निजी कंपनी डीवी प्रोजेक्ट्स को काम मिला।

कंपनी के दस्तावेजों में 300 बेड के अस्पताल निर्माण का अनुभव और भविष्य में 500 बेड तक विस्तार की बात है, जबकि टेंडर में 500 बेड के अस्पताल निर्माण का अनुभव अनिवार्य था। प्री-इंटीग्रिटी पैक्ट भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं होने का सवाल है। डीवी प्रोजेक्ट्स कोरबा के पूर्व सांसद बंशी महतो के बेटे विकास से जुड़ी कंपनी है। डीवी प्रोजेक्ट्स के डायरेक्टर दीपक पटेल ने दूसरे डायरेक्टर्स को जानकारी होने की बात कही। ब्रिजेज एंड रूफ के रायपुर में पदस्थ रवि मेहता ने बताया कि टेंडर से जुड़े मामले कोलकाता हेड ऑफिस की टीम देखती है। वहां फोन किया गया, लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया।

28% तक अधिक दर पर पहले भी ठेके : अक्टूबर 2025 में सीजीएमएससी ने गीदम, जांजगीर-चांपा और कबीरधाम मेडिकल कॉलेज निर्माण/मेंटेनेंस के टेंडर निकाले थे। तीनों की अनुमानित दर 255.15 करोड़ रुपए थी। डीवी प्रोजेक्ट्स को गीदम का काम 28% अधिक यानी 326.53 करोड़ रुपए में मिला। जांजगीर-चांपा और कबीरधाम के काम भी करीब 25% अधिक दरों पर इसी कंपनी को दिए गए।

डीवी प्रोजेक्ट्स का जवाब: हम आपसे मिलकर बात करते हैं: कम्पनी का पक्ष जानने भास्कर ने डीवी प्रोजेक्ट्स के दीपक पटेल ने बात की, विकास महतो को नंबर नहीं मिला। प्रोजेक्ट देख रहे दीप पटेल से बात की तो उन्होंने बताया कि टेंडर के लिए कम्पनी क्वालिफाई हुई है। आपको जो भी शिकायत है मैं आकर मिलता हूं। मैं आज दिल्ली में हूं, आज या कल आकर मिलूंगा।

ऐसे शिथिल की शर्तें... अनुभव 300 बेड का, 500 तक विस्तार की बात

टेंडर की तकनीकी पात्रता शर्त 1.4.1 b(II) के मुताबिक कम से कम एक 500 बिस्तर वाले अस्पताल के निर्माण का अनुभव अनिवार्य था। डीवी प्रोजेक्ट्स ने इंदौर के ESIC अस्पताल का अनुभव प्रमाण पत्र लगाया। इसमें 300 बेड वाले अस्पताल के निर्माण और भविष्य में 500 बेड तक विस्तार की बात है। यानी प्रमाण पत्र में 500 बेड का निर्मित अस्पताल स्पष्ट नहीं है। इसके बावजूद बोली स्वीकार होने से मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं।

मनमानी... लेटरहेड पर प्री-इंटीग्रिटी पैक्ट, फिर भी स्वीकार की गई बोली शर्त: नॉन ज्यूडिशियल स्टाम्प पर नोटरी कराकर देना था कागज टेंडर शर्त के अनुसार प्री-कॉन्ट्रैक्ट इंटीग्रिटी पैक्ट 100 रुपए के नॉन-ज्यूडिशियल स्टाम्प पर नोटरी कराकर जमा करना था। दस्तावेजों के अनुसार डीवी प्रोजेक्ट्स ने लेटरहेड पर पैक्ट अपलोड किया और नोटरी की शर्त पूरी नहीं की। इसके बावजूद बोली प्रोसेस हुई। सवाल है कि पात्रता की इन शर्तों पर आपत्ति क्यों नहीं की गई।

जानिए... सरकारी कंपनी को काम देने का है प्रावधान सामान्य वित्तीय नियमावली, 2017 के रूल्स 133 (वर्क्स) में मंत्रालय/विभाग को पीएसयू या सरकारी संगठन को मूल कार्य सौंपने की व्यवस्था है। केंद्र के मैनुअल में पात्र पीएसयू के बीच प्रतिस्पर्धा, अपवाद में नॉमिनेशन के आधार पर काम देने की प्रक्रिया बताई गई है। स्वास्थ्य विभाग के दो फैसलों में प्रक्रिया का अंतर सवाल खड़ा करता है। जनवरी 2026 में पैथोलॉजी सेवा का काम बिना टेंडर सरकारी कंपनी एचएलएल को नॉमिनेशन से दिया गया। सिम्स भवन के लिए पीएसयू ब्रिजेज एंड रूफ ने प्रतिस्पर्धी टेंडर में हिस्सा लिया, फिर भी निजी कंपनी को काम मिला।

सीजीएमएससी के एमडी रितेश अग्रवाल से सीधी बात

हमने किसी को फायदा नहीं पहुंचाया अनुभव 500 बेड का मांगा, 300 बेड वाले को काम क्यों? इंटीग्रिटी पैक्ट भी शर्तों के अनुरूप नहीं था? -काम नियमानुसार, किसी बिडर को लाभ नहीं पहुंचाया। दस्तावेज में 300 बेड का निर्माण, 500 तक विस्तार की बात है। विस्तार संभावना है, निर्माण नहीं। फिर पात्र कैसे? - आपसे किसने कहा? उनके पास 500 से ज्यादा बेड के निर्माण का अनुभव है। दस्तावेज जांच पर काम दिया। जनवरी में सरकारी कंपनी को बिना टेंडर पैथोलॉजी का काम दिया। इस बार उसने बोली लगाई, काम क्यों नहीं मिला? - एचएलएल कंपनी को काम देने का फैसला कैबिनेट का था।

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