गोंडा में सरकारी मक्का क्रय केंद्रों पर पसरा सन्नाटा:14 दिन बाद भी नहीं पहुंचे किसान, 2410 रुपए क्विंटल है सरकारी रेट; मंडी में 2500 का भाव
गोंडा2 घंटे पहले
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गोंडा में मक्का उत्पादक किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाने के उद्देश्य से शुरू की गई सरकारी खरीद व्यवस्था शुरुआती दौर में ही बेपटरी नजर आ रही है। जिले में मक्का क्रय केंद्र खुले हुए एक पखवाड़ा बीत चुका है, लेकिन गुरुवार सुबह 10 बजे तक किसी भी केंद्र पर खरीद की बोहनी नहीं हो सकी थी।
केंद्र प्रभारी किसानों के आने का इंतजार कर रहे हैं, जबकि सभी क्रय केंद्र सूने पड़े हैं। स्थिति यह है कि खुले बाजार यानी गल्ला मंडी में सरकारी समर्थन मूल्य से अधिक भाव मिलने और पिछली बार की प्रशासनिक औपचारिकताओं व झंझटों के चलते इस बार किसानों ने पंजीकरण तक नहीं कराया है।

गुरुवार सुबह 10 बजे तक किसी भी केंद्र पर खरीद की बोहनी नहीं हो सकी थी।
जिले में गन्ने के बाद मक्का एक प्रमुख नकदी फसल के रूप में तेजी से उभर रही है। कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस सत्र में जिले में करीब 29,739 हेक्टेयर क्षेत्रफल में मक्के की बुआई की गई है। इससे 70 हजार मीट्रिक टन से अधिक पैदावार होने का अनुमान है। इतने बड़े उत्पादन को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने गोंडा, नवाबगंज, कर्नलगंज मंडी और कटरा बाजार में एक-एक सरकारी मक्का क्रय केंद्र स्थापित किया है। योजना के तहत एक अक्टूबर से इन केंद्रों पर 2,410 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर खरीद शुरू की जानी थी।
बहराइच रोड स्थित नवीन गल्ला मंडी में मक्का क्रय केंद्र का बैनर तो लगा है, लेकिन मौके पर एक भी किसान अपनी उपज लेकर नहीं पहुंचा। क्रय केंद्र प्रभारी अरविंद कुमार के अनुसार, सरकार ने मक्के का समर्थन मूल्य 2,410 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है, जबकि स्थानीय गल्ला मंडी में व्यापारी 2,500 रुपये प्रति क्विंटल तक की दर से नकद खरीद कर रहे हैं।
डिप्टी आरएमओ एनके पाठक ने बताया कि मंडी में मक्के का भाव सरकारी समर्थन मूल्य से अधिक होने के कारण किसान सरकारी केंद्रों के बजाय सीधे व्यापारियों को उपज बेचना पसंद कर रहे हैं। इसी वजह से क्रय केंद्रों पर आवक शून्य बनी हुई है। उन्होंने बताया कि किसानों को सरकारी खरीद व्यवस्था के प्रति जागरूक करने के लिए गांव-गांव संपर्क किया जा रहा है।
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