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राष्ट्रीय राजमार्ग-146 और राज्य राजमार्ग-18 के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर खींचतान चल रही है। इसका खामियाजा सलामतपुर के त्रिमूर्ति चौराहे से नेशनल हाईवे के जोड़ तक करीब 300 मीटर हिस्से से गुजरने वाले लोग भुगत रहे हैं। रायसेन, सांची, भोपाल को जोड़ने वाले व्यस्त मार्ग पर सड़क की हालत खराब है। गड्ढों के बीच से वाहन निकालना चुनौती बना है।

रास्ता संकरा होने से दो बड़े वाहन आमने-सामने आते हैं। एक-दूसरे को जगह नहीं दे पाते। वाहन चालकों को सड़क से नीचे उतरना पड़ता है।

वहां कच्ची मिट्टी और गहरे गड्ढे हैं जिससे वाहन फंसने का खतरा बना रहता है। इससे वाहन अनियंत्रित हो सकते हैं। व्यस्त समय में यहां जाम लगता है। एंबुलेंस फंसती, स्कूली बस व जरूरी सेवाओं के वाहन भी अटकते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि विभागीय सीमांकन के विवाद के कारण वर्षों से न पेंचवर्क हुआ, न सड़क का डामरीकरण।

धूल और गड्ढों से दुकानदार भी परेशान : सड़क पर पेंचवर्क और डामरीकरण नहीं होने से गड्ढों के साथ धूल-मिट्टी की समस्या भी बनी हुई है। आसपास के दुकानदार और राहगीर इससे परेशान हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क की मरम्मत की बात आने पर संबंधित विभाग एक-दूसरे के क्षेत्र का मामला बताकर जिम्मेदारी से बचते हैं। इससे सड़क का चौड़ीकरण और सुधार कार्य अटका हुआ है।

पुलिया की टूटी रेलिंग बढ़ा रही खतरा: मार्ग की पुलिया की सुरक्षा रेलिंग कई जगह से टूट चुकी है। रात और कोहरे के दौरान यहां खतरा और बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार इस स्थान पर पहले भी छोटी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन अब तक सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए।

बोले रहवासी- जल्द चौड़ीकरण नहीं हुआ तो आंदोलन : स्थानीय रहवासी आशीष सिंह राजपूत ने कहा कि त्रिमूर्ति चौराहे से हाईवे तक रास्ता बेहद संकरा है और आए दिन जाम लगता है। एनएच और स्टेट हाईवे के विवाद में जनता परेशान है। वहीं दीपक अहिरवार ने कहा कि गड्ढे और टूटी रेलिंग बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। यदि जल्द मरम्मत और चौड़ीकरण नहीं हुआ तो क्षेत्रवासी आंदोलन करेंगे।

संकरे रास्ते में आमने-सामने फंसते हैं भारी वाहन करीब 300 मीटर का यह हिस्सा अतिक्रमण और संकरे मार्ग के कारण यातायात के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। दो बड़े वाहन सामने आने पर एक वाहन को नीचे उतारना पड़ता है। पीक आवर्स में त्रिमूर्ति चौराहे से हाईवे जोड़ तक वाहनों की कतार लग जाती है। इससे लोगों का समय और ईंधन दोनों बर्बाद होते हैं।