जीएसटी काउंंसिल की अहम बैठक गुरुवार को हुई. इसमें टैक्‍स जुर्माना से लेकर गिरफ्तारी के अधिकार तक अहम निर्णय लिए गए. टैक्‍स रिफंड का वक्त 15 दिन से कम करके 10 दिन तक किया गया है.

जीएसटी काउंंसिल की अहम बैठक गुरुवार को हुई. इसमें टैक्‍स जुर्माना से लेकर गिरफ्तारी के अधिकार तक अहम निर्णय लिए गए. टैक्‍स रिफंड का वक्त 15 दिन से कम करके 10 दिन तक किया गया है.

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GST Council की 57वीं बैठक में कई बड़े निर्णय लिए गए हैं. इस बैठक के तहत GST टैक्‍स अधिकारियों के पास से गिरफ्तारी करने के अधिकार को खत्म करने को मंजूरी दी गई है. इसके साथ ही अभियोजन सीमा को 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये तय किया गया है. 

अभियोजन की सीमा, वह लिमिट होती है, इसके तहत किसी अपराध या मामले में कोर्ट की ओर से संज्ञान लिया जाना जरूरी होता है. इसके साथ MDR को लेकर कोई ऐलान नहीं किया गया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अनुसार, जीएसटी काउंसिल की बैठक में MDR को लेकर किसी तरह की चर्चा नहीं हुई. UPI पर एमडीआर को होल्‍ड करने की चर्चा हो रही थी. GST काउंस‍िल की इस बैठक में किसी भी प्रोडक्‍ट या सर्विस पर टैक्‍स में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है. इन उत्‍पादों पर पहले जितना टैक्स लागू रहता था, उतना ही अब भी GST  लागू रहेगा.

#WATCH | Delhi | 57th GST Council meeting | Union Finance Minister Nirmala Sitharaman says, "The Council recommended removing arrest powers under GST. Council recommended raising the prosecution threshold from Rs 1 crore to Rs 5 crore. Anything below Rs 5 crore no prosecution and… pic.twitter.com/4n6OihFVBz

— ANI (@ANI) October 8, 2026

जुर्माना और रिफंड पर फैसला 

इसके साथ जीएसटी काउंस‍िल ने सामान्य जुर्माने को 25 हजार रुपये से घटाकर 10 हजार करने, जीएसटी रिफंड  में तेजी लाने, छोटे ई-कॉमर्स विक्रेताओं के लिए रजिस्‍ट्रेशन को सरल बनाने और व्यवसायों के साथ अनुपालन आवश्यकताओं को आसान बनाने को मंजूरी दी है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि गुरुवार को घोषित   सुधार अगले वित्तीय वर्ष की शुरुआत यानी 1 अप्रैल, 2027 से होने वाली है. 

गिरफ्तारी की शक्तियों को हटाने का प्रयास 

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अनुसार, "काउंसिल ने GST के तहत गिरफ्तारी की शक्तियों को हटाने का प्रयास किया है. काउंसिल ने मुकदमा चलाने की सीमा (थ्रेशोल्ड) को 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करने का प्रयास किया है. 5 करोड़ रुपये से कम की राशि पर किसी तरह का केस नहीं चलाया जाएगा और  सामान्य जुर्माना 25 हजार रुपये से घटाकर 10 हजार रुपये कर दिया जाएगा."