क्या सच में प्रदर्शनकारियों की मांगें मनवा देता है जंतर-मंतर? 15 सालों के रिकॉर्ड से समझें

दिल्ली के जंतर-मंतर में प्रदर्शनों का लम्बा इतिहास है.

पेपरलीक मामले में कड़े कानून का रास्ता जंतर मंतर के रास्ते निकला तो सवाल उठता है कि जंतर मंतर में क्या वाकई कोई जजतरंम ममंतरम है. विरोध प्रदर्शन के लिए वहां ही क्यों जाते हैं और कब से परंपरा चली? मजेदार बात ये है कि महाराज सवाई जयसिंह ने 1724 में इस एस्ट्रोनॉमिकल ऑब्जर्वेटरी यानि खगोलीय वेधशाला को बनवाया और 270 सालों तक इसको विरोध प्रदर्शनों से कोई लेना देना नहीं रहा. 1993 के बाद धीरे-धीरे ये भारत का सबसे प्रतीकात्मक लोकतांत्रिक विरोधस्थल बन गया, क्योंकि 1993 से ही जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन होने लगे. उससे पहले तक दिल्ली में बड़े राजनीतिक धरने और रैलियां बोट क्लब जो इंडिया गेट और राजपथ के पास हैं वहां हुआ करती थीं.

साल 1988 में किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में पांच लाख किसानों ने बोट क्लब पर एक हफ्ते तक बड़ा धरना दिया. जिससे इस पूरे वीवीआईपी इलाक़े में कामकाज पर असर पड़ा. इसीलिए सरकार ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का हवाला देकर बोट क्लब पर बड़े प्रदर्शनों पर रोक लगा दी.

इसके बाद इंडिया गेट के ही पास जंतर-मंतर रोड विरोध प्रदर्शनों के लिए तय जगह के तौर पर इस्तेमाल होने लगी. हालांकि इसके लिए कोई अलग नियम कानून, कोई ऑफीशियल नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ लेकिन फिर भी जंतर मंतर बन गया दिल्ली का मेन प्रोटेस्ट ज़ोन.

जंतर-मंतर पर कौन-कौन से आंदोलन हुए, कितनी पूरी हुईं मांगें?

अब जानते हैं यहां कौन-कौन से मुद्दों पर बड़े आंदोलन हुए और कितनों की मांग पूरी हुई.

  • 2011-अन्ना हज़ारे का लोकपाल आंदोलन: ये सबसे व्यापक और सबसे असरदार आंदोलनों में से एक रहा जिसकी वजह से साल 2013 में लोकपाल कानून बना. हालांकि जन लोकपाल की सभी मांगें पूरी नहीं हुईं. लेकिन ये आंदोलन भारतीय राजनीति में बड़ा बदलाव लेकर आया. आम आदमी पार्टी इसी आंदोलन से उपजा राजनैतिक दल है.

    Anti Corruption Movement

    एंटी करप्शन मूवमेंट.

  • 2012–निर्भया रेप केस के बाद न्याय की मांग: तेज़ न्यायिक प्रक्रिया, आपराधिक कानून में संशोधन , महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े कई कानूनी बदलाव हुए. हालांकि, महिलाओं की सुरक्षा की समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हुई.
  • 2014-नीडो तानिया की मौत के खिलाफ प्रदर्शन: अरुणाचल प्रदेश के 20 वर्षीय छात्र नीड़ो तानियाम की लाजपत नगर में हुई हत्या के बाद विरोध प्रदर्शन हुए. नीडो अरुणाचल कांग्रेस विधायक नीडो पवित्रा के बेटे थे. विरोध करने पर दुकानदारों ने उनकी पिटाई की थी.
  • 2015- वन रैंक वन पेंशन (OROP): जून 2015 से रिले भूख हड़ताल के साथ पूर्व सैनिकों का ये लंबा आंदोलन शुरू हुआ जो नवंबर में सरकार के OROP लागू करने पर खत्म हो गया. हालांकि इसके ड्राफ्ट पर कई संगठनों ने असहमति जारी रखी.

    One Rank One Pension

    वन रैंक वन पेंशन की मांग के लिए प्रदर्शन (फाइल फोटो).

  • 2017-तमिलनाडु के किसानों का 40 दिन का आंदोलन: राष्ट्रीय दक्षिण भारतीय नदियां जोड़ो किसान संघ के राज्य अध्यक्ष पी. अय्याकन्नू के नेतृत्व में तमिलनाडु के किसानों का 40 दिन का आंदोलन साल 2017 अनोखा और अनूठा और चर्चित विरोध प्रदर्शन था. मांग भीषण सूखे से उबरने के लिए 40,000 करोड़ रुपये के विशेष सूखा राहत पैकेज के साथ सभी कृषि ऋणों को पूरी माफी और कावेरी प्रबंधन बोर्ड का जल्द गठन के साथ दक्षिण भारतीय और देश की सभी प्रमुख नदियों को आपस में जोड़ने की थी. इस आंदोलन में किसानों ने सिर मुंडवाए आधी मूंछें रखी. मुंह में सांप और चूहे दबाकर प्रदर्शन किया. आत्महत्या करने वाले किसानों की खोपड़ियां लेकर ये जंतर मंतर पहुंचे खुद को कोड़े भी मारे. उस वक्त के तमिलनाडु सीएम एडप्पादी पलानीस्वामी से मुलाकात और आश्वासन के बाद आंदोलन खत्म हो गया. हालांकि, बाद में मांगें पूरी न होने पर समय-समय पर इसे दोबारा भी किया गया.
  • 2019-नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA): इसके खिलाफ प्रदर्शन-कानून वापस नहीं लिया गया, लेकिन आंदोलन ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी बहस छेड़ी और राजनीतिक विमर्श को प्रभावित किया.

    Caa Protest At Jantar Mantar

    नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ प्रदर्शन की तस्वीर.

  • 2023-पहलवानों का आंदोलन: साल 2023 में भारतीय पहलवानों विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया की अगुवाई में भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के तत्कालीन अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों के साथ जनवरी 2023 को पहलवानों ने पहली बार धरना दिया. खेल मंत्रालय के आश्वासन और जांच समिति के गठन के बाद इसे स्थगित कर दिया गया.

    Phogat Sister Movement

    पहलवानों का आंदोलन.

    जांच रिपोर्ट सार्वजनिक न होने पर 23 अप्रैल 2023 को पहलवान दोबारा पर बैठ गए. खेल मंत्री अनुराग ठाकुर से मुलाकात के बाद जून में प्रदर्शन स्थगित हुआ. नतीजा- मामले की जांच हुई, आरोपों पर कानूनी कार्रवाई शुरू हुई, लेकिन आंदोलन की सभी मांगें पूरी नहीं मानी गईं.

  • 2026-जुलाई में नीट परीक्षा पेपर लीक: इस मामले से शुरू आंदोलन शिक्षा और परीक्षा सुधार से और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़ा रहा. 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के साथ प्रदर्शन भी खत्म हो गया. इसे जेन-जी अपनी बड़ी जीत को तौर पर देख रहा है.

इसके अलावा भी जंतर मंतर पर लोग अपनी मांग को लेकर विरोध में बैठते हैं. एक दिन के धरने प्रदर्शन भी वहां होते हैं. सक्सेस रेट के आधार पर जंतर-मंतर से शुरू आंदोलन को आंकना उचित नहीं लेकिन फिर भी ऐसा नहीं हैं कि वहां से शुरू हर आंदोलन में पूरी मांगे मानी गई हों ऐसे भी कई छोटे-बड़े धरने रहे जिनका असर बस जागरूकता तक सीमित रहा.

इसलिए जंतर मंतर वो मंच है जहां मुद्दे राष्ट्रीय स्तर पर उभरते हैं लेकिन अंतिम परिणाम आंदोलन की विषय, नीयत, जनसमर्थन, राजनीतिक परिस्थितियों और सरकार की प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है.

यह भी पढ़ें:दिल्ली, जयपुर देश में 5 जंतर-मंतर क्यों बनवाए गए, कैसे ये खगोलीय विज्ञान का केंद्र बने?

प्रमिला दीक्षित

प्रमिला दीक्षित

दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय... कश्मीर से केदारनाथ और काशी तक, अपराध से आतंकवाद तक, दंगों की क्रूरता से दरियादिली की कहानी तक, राजनीति से साहित्य की रवानी तक, तथ्य, तर्क और संवेदना के साथ हर विषय पर रिपोर्टिंग करती रही हैं. वीडियो, रेडियो, ब्लॉग- लेख, कविता और मॉडरेशन उनकी अभिव्यक्ति के माध्यम है.

Read More

google button