Uttarakhand Mining: उत्तराखंड सरकार को खनन से लगातार अच्छी कमाई हो रही है. वित्तीय वर्ष 2025-26 में खनन विभाग ने 1,217 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया, जो अब तक का सबसे ज्यादा है. अब सरकार ने अगले चरण में खनन से 1,500 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल करने का लक्ष्य रखा है.
वित्तीय वर्ष 2025-26 में सरकार ने खनन विभाग के लिए 950 करोड़ रुपये का लक्ष्य तय किया था. इसके मुकाबले विभाग ने 1,217 करोड़ रुपये की कमाई की. यानी तय लक्ष्य से करीब 267 करोड़ रुपये ज्यादा राजस्व प्राप्त हुआ. इससे पहले वित्तीय वर्ष 2024-25 में भी खनन विभाग ने लक्ष्य से अधिक कमाई की थी. उस साल सरकार ने 875 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा था, जबकि विभाग को 1,041 करोड़ रुपये का राजस्व मिला था. मानसून के बाद 1 अक्टूबर से खनन गतिविधियां दोबारा शुरू होने वाली हैं. ऐसे में विभाग के सामने राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ अवैध खनन पर रोक लगाने की भी चुनौती होगी.
अब विभाग को मिला नया लक्ष्य
अब विभाग के सामने 1,500 करोड़ रुपये का नया लक्ष्य है. इसके लिए मानसून के बाद नदियों और दूसरे क्षेत्रों में खनिज निकासी शुरू होने के बाद गतिविधियों को व्यवस्थित तरीके से चलाना महत्वपूर्ण होगा.
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खनन से होने वाली कमाई में लगातार बढ़ोतरी
सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले कई वर्षों में उत्तराखंड में खनन से मिलने वाले राजस्व में काफी वृद्धि हुई है. वित्तीय वर्ष 2012-13 में खनन से करीब 110 करोड़ रुपये की कमाई हुई थी. इसके बाद यह आंकड़ा धीरे-धीरे बढ़ता गया और 2025-26 में 1,217 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. 2025-26 में मिले कुल राजस्व में अलग-अलग मदों में भी राशि जमा की गई. इसमें 1,130 करोड़ रुपये राज्य के कोषागार, 80 करोड़ रुपये जिला खनिज फाउंडेशन न्यास और 7 करोड़ रुपये राज्य खनिज अन्वेषण ट्रस्ट के तहत शामिल हैं. इस बढ़ती कमाई की वजह से खनन विभाग राज्य के अधिक राजस्व देने वाले विभागों में शामिल हो गया है. अब 1,500 करोड़ रुपये का लक्ष्य हासिल करना विभाग के लिए अगली बड़ी चुनौती है.
1 अक्टूबर से फिर शुरू होंगी खनन गतिविधियां
उत्तराखंड में मानसून के दौरान कई जगहों पर खनन गतिविधियों पर रोक रहती है. मानसून खत्म होने के बाद 1 अक्टूबर से खनन का काम फिर से शुरू होने की तैयारी है. नदियों में खनिजों की निकासी शुरू होने के साथ सरकार को उम्मीद है कि राजस्व संग्रह भी तेजी से आगे बढ़ेगा.
हालांकि, खनन गतिविधियां बढ़ने के साथ अवैध खनन और बिना अनुमति खनिजों की ढुलाई जैसी समस्याओं पर निगरानी रखना भी जरूरी होगा. इसी वजह से सरकार ने खनन व्यवस्था में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया है.
तकनीक से होगी खनन और वाहनों की निगरानी
सरकार ने अवैध खनन रोकने और व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए डिजिटल निगरानी प्रणाली को मजबूत किया है. माइनिंग डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन एंड सर्विलांस सिस्टम के तहत देहरादून, हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर और नैनीताल में 45 ई-चेक गेट लगाए गए हैं.
इन ई-चेक गेट पर वाहनों की निगरानी के लिए ऑटोमेटिक नंबर प्लेट पहचान कैमरों का इस्तेमाल किया जा रहा है. इसके साथ ही रेडियो फ्रीक्वेंसी पहचान तकनीक के जरिए भी वाहनों की जानकारी पर नजर रखी जा रही है.
अन्य डिजिटल व्यवस्थाओं का हो रहा इस्तेमाल
इसके अलावा खनिज प्रबंधन प्रणाली, ई-रवन्ना, माइनिंग ई-सर्विस, निगरानी एवं प्रवर्तन प्रणाली और निर्णय सहायता प्रणाली जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है. इनके जरिए खनन और खनिजों की ढुलाई से जुड़ा रिकॉर्ड डिजिटल तरीके से रखा जा रहा है. ई-रवन्ना प्रणाली में सुरक्षा से जुड़ी सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं, ताकि खनिजों की ढुलाई और उससे जुड़े दस्तावेजों की निगरानी बेहतर तरीके से की जा सके.
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