मानसून सत्र के बाद मोदी सरकार 16 से 18 अगस्त तक संसद का विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर रही है। सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण बिल पर आम सहमति बनाने की कोशिश में जुटी है।

Parliament special session Delimitation and Women Reservation Bill

मानसून सत्र के बाद मोदी सरकार 16 से 18 अगस्त तक संसद का विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर रही है।

  • Published: 05 Aug 2026, 03:43 PM IST
  • Last Updated: 05 Aug 2026, 03:43 PM IST

Delimitation Bill: नरेंद्र मोदी सरकार संसद के मौजूदा मानसून सत्र के समापन के ठीक बाद एक विशेष सत्र बुलाने की योजना पर काम कर रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, चल रहा मानसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त होगा, जिसके बाद 16 से 18 अगस्त तक संसद का दो-दिवसीय विशेष सत्र आयोजित किया जा सकता है।

इस विशेष सत्र के दौरान सरकार का मुख्य एजेंडा अपने बेहद महत्वाकांक्षी परिसीमन बिल (Delimitation Bill) और महिला आरक्षण बिल पर चर्चा करना और उन्हें आगे बढ़ाना है।

दो-तिहाई बहुमत जुटाने में जुटी सरकार
कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार इस संवैधानिक संशोधन विधेयक को पास कराने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े को पुख्ता करने में जुटी हुई है। सरकार की यह कोशिश है कि संसद में संख्या बल पूरी तरह मजबूत होने के बाद ही इस अहम विधायी कार्य को आगे बढ़ाया जाए।

जैसे ही सरकार के पास विधेयक को पारित कराने के लिए पर्याप्त संख्या सुनिश्चित हो जाएगी, वैसे ही संसद का विशेष सत्र बुलाकर इस संविधान संशोधन विधेयक को विचार और पास कराने के लिए सदन के पटल पर रखा जा सकता है।

गतिरोध खत्म करने के लिए विपक्ष से संपर्क
इन दो महत्वपूर्ण विधेयकों को चर्चा और बाद में पारित कराने के लिए लाने से पहले, केंद्र सरकार संसद में जारी गतिरोध को खत्म करने और विपक्ष के साथ आम सहमति बनाने के लिए पूरी तरह सक्रिय हो गई है।

इसी कड़ी में, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ करीब 50 मिनट तक लंबी बैठक की। यह मुलाकात संसद में चल रहे गतिरोध को तोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

किरेन रिजिजू और राहुल गांधी की बैठक के मायने
इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रस्तावित परिसीमन बिल और विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) में संशोधनों जैसे प्रमुख विधेयकों पर राहुल गांधी के विचार जानने की कोशिश की। सरकार यह समझना चाहती थी कि इन लंबित विधायी प्रस्तावों पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस का रुख क्या रहने वाला है, ताकि सदन के कामकाज को सुचारू रूप से चलाया जा सके।

विपक्ष की क्या है प्रमुख मांग?
सूत्रों के हवाले से यह बात सामने आई है कि बैठक के दौरान राहुल गांधी ने किरेन रिजिजू से स्पष्ट कहा कि विपक्ष की तरफ से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की कोई मांग नहीं की जा रही है।

हालांकि, विपक्ष इस बात पर अड़ा हुआ है कि हाल ही में पेपर लीक आंदोलन के दौरान छात्र प्रदर्शनकारियों पर कथित तौर पर अत्यधिक बल प्रयोग किए जाने के मामले पर गृह मंत्री संसद के सदन में अपना बयान दें और स्थिति स्पष्ट करें। राहुल गांधी ने यह रुख अपनाया कि इस गतिरोध को पैदा करने वाले मुद्दे पर गृह मंत्री को सदन को संबोधित करना ही होगा।

अन्य विपक्षी दलों को साधने की रणनीति
कांग्रेस के बाद अब सरकार समाजवादी पार्टी और अन्य क्षेत्रीय दलों से बातचीत करने की तैयारी में है। इसके लिए केंद्र सरकार ने अपने कई वरिष्ठ मंत्रियों को मैदान में उतारा है।

केंद्रीय मंत्रियों प्रह्लाद जोशी, पीयूष गोयल, अर्जुन राम मेघवाल और एल. मुरुगन को अन्य विपक्षी दलों के नेताओं तक पहुंच बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ये सभी मंत्री विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकें करेंगे, ताकि उनका रुख भांप सकें और संसद के सामान्य कामकाज को बहाल करने के लिए एक आम सहमति बनाने की संभावना तलाश सकें।