आजमगढ़ में फर्जी पते पर हथियारों के लाइसेंस बनवाने का मामला सामने आया है। बांदा के रहने वाले मोहम्मद इबराक ने आजमगढ़ के एक गांव का फर्जी पता देकर 2010 में पिस्टल का लाइसेंस बनवाया। इसके बाद 16 साल तक उसका नवीनीकरण कराता रहा। उसने लाइसेंस को ऑल इंडिया

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पुलिस के मुताबिक, इबराक ने निजामाबाद थाना क्षेत्र के मिर्जापुर गांव के पते से दस्तावेज तैयार कराए थे। इनमें जूनियर हाईस्कूल मिर्जापुर का कक्षा 8 का ट्रांसफर सर्टिफिकेट भी शामिल है। जांच में दस्तावेज फर्जी पाए गए। अलग-अलग दस्तावेजों में उसकी जन्मतिथि भी अलग दर्ज मिली।

पुलिस लाइन में घटना की जानकारी देते एसपी सिटी मधुबन कुमार सिंह और क्षेत्राधिकारी ईश्वर लाल गुर्जर।

पुलिस लाइन में घटना की जानकारी देते एसपी सिटी मधुबन कुमार सिंह और क्षेत्राधिकारी ईश्वर लाल गुर्जर।

परिवार और रिश्तेदारों के नाम पर भी लाइसेंस

जांच में निजामाबाद के मिर्जापुर गांव निवासी मिर्जा अयाज बेग की भूमिका भी सामने आई है। आरोप है कि उसने अपने परिवार और रिश्तेदारों के नाम पर पिस्टल, राइफल और बंदूक के एक दर्जन से ज्यादा लाइसेंस बनवाए। हालांकि, पुलिस ने अभी अयाज बेग की गिरफ्तारी से इनकार किया है। एसपी सिटी मधुबन कुमार सिंह के मुताबिक, उसकी भूमिका की जांच की जा रही है।

पुलिस के अनुसार, इबराक ने मिर्जापुर गांव से अपनी पहचान जुड़ी होने के दस्तावेज तैयार कराए और इन्हीं के आधार पर हथियार का लाइसेंस हासिल किया। उसने एसआईआर की सूची में भी अपना नाम दर्ज करा लिया था। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि फर्जी दस्तावेज तैयार कराने से लेकर लाइसेंस बनवाने और उसका लगातार नवीनीकरण कराने तक किन लोगों ने मदद की।

मुंबई तक पहुंची पुलिस, रिवॉल्वर और 33 कारतूस मिले

मामले की जानकारी मिलने के बाद एसएसपी डॉ. अनिल कुमार के निर्देश पर निजामाबाद थाने में मिर्जा अयाज बेग, मोहम्मद इबराक और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम बनाई गई। टीम ने उत्तर प्रदेश से लेकर मुंबई तक दबिश दी और इबराक को गिरफ्तार कर लिया। उसे ट्रांजिट रिमांड पर आजमगढ़ लाया गया है।

पुलिस ने आरोपी के पास से एक रिवॉल्वर, 33 जिंदा कारतूस, दो खोखा कारतूस, आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और पैन कार्ड बरामद किए हैं। सोमवार को पुलिस लाइन में एसपी सिटी मधुबन कुमार सिंह ने मामले का खुलासा किया।

पुलिस अब फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हथियारों के लाइसेंस बनवाने और इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।