Updated: Tuesday, July 14, 2026, 16:32 [IST]
Sonam Wangchuk Hunger Strike: NEET-UG परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर शुरू हुआ CJP का आंदोलन अब एक राजनीतिक बहस का रूप लेता जा रहा है। जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षा सुधार के समर्थक सोनम वांगचुक पिछले 16 दिनों से जंतर-मंतर पर अनिश्चित कालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं।
उनकी लगातार गिरती सेहत को लेकर पूरा देश चिंतित है। अभिजीत दीपके की ओर से जारी ताजा हेल्थ अपडेट के मुताबिक, अब तक वांगचुक का 8.5kg वजन कम हो चुका है और ब्लड प्रेशर भी कापी ऊपर नीचे हो रहा है।
भूख हड़ताल के 16 दिन...लेकिन सरकार अब भी खामोश
सोशल मीडिया पर लगातार सवाल उठ रहे हैं कि संसद भवन से महज कुछ ही दूर जंतर मंतर पर देश का एक बड़ा प्रदर्शन चल रहा है लेकिन सरकार की ओऱ से अब तक कोई पहल सामने नहीं आई है। सवाल पूछे जा रहे हैं कि केंद्र सरकार लगातार अपनी बेरुखी दिखाते हुए चुप्पी साधे क्यों बैठी है।
अगर देश भर में नीट समेत कई पेपर लीक और इसके कराण कई बच्चों की जिंदगी खत्म करने की जवाबदेही शिक्षा मंत्री की नहीं है तो इसका जवाब किससे मांगा जाए? वांगचुक की मांग केवल एक मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका मानना है कि देश की परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही और ट्रांसपेरेंसी सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सुधार जरूरी हैं।
"धर्मेद्र प्रधान का इस्तीफा अंत नहीं, जवाबदेही की शुरुआत है"
इंडियन एक्सप्रेस हिंदी को दिए इंटरव्यू में वांगचुक कहते हैं कि उनकी लड़ाई केवल केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक सीमित नहीं है। अगर आज परीक्षा प्रणाली में हो रही गड़बड़ियों को नजरअंदाज किया गया, तो इसका असर आने वाली कई पीढ़ियों पर पड़ेगा। वो कहते हैं कि, "देश में सब कुछ बिकाऊ होता जा रहा है और ईमानदारी की कीमत लगातार कम होती जा रही है।"
जब उनसे पूछा गया कि क्या इस्तीफे से सब कुछ ठीक हो जाएगा...इसके जवाब में वांगचुक कहते हैं, सोनम वांगचुक का मानना है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ अभियान नहीं है, बल्कि जवाबदेही तय करने की दिशा में पहला कदम है। यदि सरकार जिम्मेदारी तय नहीं करेगी तो मनमाने फैसले और लापरवाही का सिलसिला जारी रहेगा। यह केवल शिक्षा की समस्या नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए चिंता का विषय है।
वांगचुक ने सरकार से पूछा सवाल- बच्चों का भविष्य कहां जा रहा
सोनम वांगचुक ने एक जिम्मेदारी के तौर पर सवाल उठाया कि यदि मेडिकल इंट्रेंस एग्जाम का पेपर लीक होगा और नकल के जरिए डॉक्टर बनेंगे, तो भविष्य में मरीजों का इलाज कौन करेगा? अगर इंजीनियर भी इसी तरह परीक्षा पास करेंगे, तो उनके बनाए पुल और इमारतें कितनी सुरक्षित होंगी? उन्होंने सरकार को कटघरे में रखते हुए कहा कि भ्रष्टाचार की कीमत केवल छात्रों तक नहीं रहेगा, बल्कि पूरे समाज को इसकी कीमत चुकानी पड़ती है।
सरकार को जिद्दी नहीं संवेदनशील होना चाहिए
अनशन का ये 16वां दिन है बावजूद सरकार की इस बेरुखी पर सोनम वांगचुक हैं कि केंद्र सरकार की ओर से अब तक उनसे किसी प्रकार का संपर्क नहीं किया गया है। हालांकि, अब उनकी कोशिश है कि आंदोलन की आवाज और अधिक लोगों तक पहुंचे, ताकि सरकार इस मुद्दे की गंभीरता को समझ सके। हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार संवेदनशीलता दिखाएगी और जल्द समाधान की दिशा में कदम उठाएगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम अपने संदेश में सोनम वांगचुक ने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जनता की आवाज होती है। पीएम को लोगों की भावनाएं समझनी चाहिए और जिद के बजाय संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।
यह आंदोलन जनता का...किसी राजनीतिक दल का नहीं: सोनम वांगचुक
हाल के दिनों मे सोशल मीडिया पर कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन को लेकर राजनीतिक रंग दिए जाने की भी खुब चर्चा हुई। इस पर सोनम वांगचुक ने साफ कहा कि यह मंच किसी राजनीतिक दल का नहीं है। यहां आंदोलन में सभी दलों के नेताओं को आने का खुला निमंत्रण दिया गया है। यदि कोई नेता इसमें शामिल नहीं होता, तो इसका फैसला जनता करेगी। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन का उद्देश्य केवल शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के भविष्य की सुरक्षा है, न कि किसी राजनीतिक दल का समर्थन या विरोध।
सोसोनम वांगचुक की बिगड़ती हालत को लेकर देश चिंतित
बता दें कि 16 दिन से भूख हड़ातल पर बैठे वांगचुक की सेहत को लेकर लोगो चिंतित है। 3 Idiots में 'चतुर' का किरदार निभाने वाले ओम वैद्य ने सोनम वांगचुक का समर्थन करते हुए चिंता जाहिर की है। सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो में उन्होंने भावुक अपील करते हुए कहा कि वह नहीं चाहते कि सोनम वांगचुक को कुछ हो।
आने वाले दिनों में सरकार का रुख यह तय करेगा कि इस आंदोलन का अंत बातचीत से होगा या यह और बड़ा जनआंदोलन बनकर उभरेगा।