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सार
Umar Abdullah Divorce:जम्मू-कश्मीर के CM उमर अब्दुल्ला और उनकी पत्नी पायल ने आपसी सहमति से तलाक लेने का फैसला किया है। SC ने दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते के आधार पर मामले का निस्तारण कर दिया।

उमर अब्दुल्ला और पायल के बीच तलाक सुप्रीम कोर्ट ने दी मंजूरी, ( सोर्स- एआई नीर्मित)
विस्तार
Supreme Court Umar Abdullah And Payal Abdullah Divorce: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी अलग रह रहीं पत्नी पायल अब्दुल्ला ने आपसी सहमति से अपने वैवाहिक रिश्ते को समाप्त करने का फैसला किया है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उमर अब्दुल्ला की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि दोनों पक्षों के बीच सभी विवाद सुलझ चुके हैं और आपसी सहमति से तलाक के लिए आवश्यक आवेदन दाखिल कर दिया गया है। इसके बाद जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने समझौते की शर्तों के आधार पर मामले का निस्तारण करने की बात कही।
उमर और पायल की शादी सितंबर 1994 में हुई थी, लेकिन दोनों लंबे समय से अलग रह रहे थे। इससे पहले फैमिली कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट ने उमर अब्दुल्ला की तलाक की याचिका खारिज कर दी थी। बाद में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। वर्ष 2024 में शीर्ष अदालत ने दोनों पक्षों को मध्यस्थता के लिए भेजा था, जिसके बाद समझौते की प्रक्रिया सफल रही। अब आपसी सहमति से तलाक को मंजूरी मिलने के साथ करीब तीन दशक पुराना वैवाहिक संबंध कानूनी रूप से समाप्त हो गया।
सुप्रीम कोर्ट में समझौते की जानकारी
बता दें कि जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने उमर अब्दुल्ला के वकील कपिल सिब्बल ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच सभी विवाद आपसी सहमति से सुलझा लिए गए हैं। उन्होंने कहा, “सब कुछ तय हो चुका है और हमने कोर्ट के सामने इसके लिए अर्जी दाखिल कर दी है। कोर्ट इसको मंजूरी दे सकता है।”
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कानूनी रूप से समाप्त हुआ वैवाहिक रिश्ता
कपिल सिब्बल ने बताया कि उमर अब्दुल्ला ने तलाक की याचिका में कहा है कि पायल के साथ उनकी शादी पूरी तरह से टूट चुकी है और अब उसे बचाया नहीं जा सकता। इस बात पर बेंच ने कहा कि हम तय शर्तों के आधार पर इस मामले को निस्तारित कर देंगे।
फैमिली कोर्ट ने याचिका की थी खारिज
दरअसल उमर अब्दुल्ला और पायल की शादी सितंबर 1994 में हुई थी, लेकिन वे लंबे समय से अलग रह रहे हैं। उमर की तलाक की याचिका को सबसे पहले 30 अगस्त 2016 को फैमिली कोर्ट ने खारिज कर दिया था। इसके बाद उमर दिल्ली हाईकोर्ट गए। हालांकि, हाईकोर्ट ने भी तलाक की अर्जी खारिज कर दी।
हाईकोर्ट से भी नहीं मिली थी राहत
हाईकोर्ट फैमिली कोर्ट के आदेश से सहमत था कि उमर अब्दुल्ला की ओर से पायल के खिलाफ क्रूरता के आरोप अस्पष्ट हैं। हाईकोर्ट ने कहा उमर अब्दुल्ला, पायल अब्दुल्ला की ओर से क्रूरता के किसी भी कृत्य को साबित करने में विफल रहे, चाहे वह शारीरिक हो या मानसिक। हमें अपील में कोई योग्यता नहीं मिली। इसे खारिज किया जाता है।
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आपसी सहमति से खत्म हुआ विवाद
इसके बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता ने राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अगस्त 2024 में दोनों पक्षों के आपसी समझौते की संभावना तलाशने पर सहमत होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले को मध्यस्थता के लिए भेज दिया था। तब कोर्ट ने मध्यस्थ की रिपोर्ट का इंतजार करते हुए सुनवाई टाल दी थी। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी पत्नी पायल ने आपसी सहमति से तलाक लेने का फैसला किया है। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते के आधार पर मामले का निस्तारण कर दिया।
