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- 17 Days After The Murder Of A Former IAS Officer, The Police Only Reached The Photo.
भोपाल58 मिनट पहले
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पूर्व आईएएस राकेश अग्रवाल की हत्या का आरोपी वरुण कुमार 17 दिन से भोपाल पुलिस की पकड़ से बाहर है।
पुलिस लगातार उसकी तलाश में जुटी है, लेकिन अब तक कोई कामयाबी नहीं मिली है। पुलिस उसके परिवार, दोस्तों और नाबालिग गर्लफ्रेंड से पूछताछ कर चुकी है।
भोपाल से मथुरा तक करीब 400 सीसीटीवी कैमरे और 40 से ज्यादा धर्मशालाएं खंगालने के बाद भी उसका पता नहीं चला। अब पुलिस पुरानी पासपोर्ट फोटो और गर्दन पर बने टैटू से उसकी पहचान करने की कोशिश कर रही है।
जांच में सामने आया कि वरुण के बैंक खाते से तीन महीने से कोई लेनदेन नहीं हुआ है। खाते में महज दो रुपए हैं। उसके नाम की सिम अगस्त से बंद है। वह परिचितों या जिनके यहां काम करता था, उनके फोन से कॉल करता था। इस कारण पुलिस को मोबाइल से लोकेशन और बैंक खाते से उसकी गतिविधियों का सुराग नहीं मिल रहा है। पुलिस की जांच में अब यही सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
पुलिस को वरुण के ग्वालियर से बस में बैठकर मथुरा-वृंदावन जाने की सूचना मिली थी। इसके बाद पुलिस की टीमें ग्वालियर और मथुरा-वृंदावन में डेरा डाले हुए हैं। परिवार ने पुलिस को बताया कि विवाद होने पर वरुण धर्मशालाओं और रैन बसेरों में ठहरता था।
परिवार के मुताबिक मथुरा-वृंदावन जैसे धार्मिक शहरों में भी वह इसी तरह छिपता था। इस जानकारी के आधार पर पुलिस धर्मशालाओं और रैन बसेरों में उसकी तलाश कर रही है। वरुण का परिवार मूल रूप से आगरा का है। वहां उसका पुश्तैनी मकान है। पिता ग्वालियर में मजदूरी करते हैं, जबकि बहन की ससुराल पटियाला में है।
कैमरे और धर्मशालाओं में उलझी ‘स्मार्ट पुलिस’
जहां-जहां भी केयरटेकर बना, वहीं से मोबाइल चुराकर भागा
पुलिस की जांच के अनुसार, वरुण पटियाला, जयपुर और कर्नाटक के कई शहरों में केयरटेकर का काम कर चुका है। वह किसी भी जगह 15 दिन से ज्यादा नहीं टिकता था। मकान मालिकों से विवाद होने पर वहां से चला जाता था।
जांच में यह पैटर्न भी सामने आया कि वह जिन जगहों पर केयरटेकर बना, वहां से मोबाइल चुराकर भागा। वरुण के पिता ने पुलिस को बताया कि ग्वालियर में उनकी तीसरी पत्नी के घर से वह एक बार मोटरसाइकिल चुराकर ले गया था। बाद में उसने मोटरसाइकिल लौटा दी थी। पिता ने उससे जुड़ी चोरी और विवाद की अन्य घटनाओं की जानकारी भी दी।
जयपुर में नाबालिग गर्लफ्रेंड का पता चला
कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) की जांच में पुलिस को एक नंबर मिला। इसकी पड़ताल करने पर जयपुर में वरुण की गर्लफ्रेंड का पता चला। जांच में सामने आया कि वह नाबालिग है। पुलिस उससे पूछताछ कर चुकी है, लेकिन वरुण का ठिकाना नहीं मिल सका।
अब तक की जांच में कमियां
- तकनीक पर ज्यादा भरोसा: शुरुआती जांच में पुलिस तकनीकी निगरानी पर निर्भर रही। आरोपी ने लूटा हुआ मोबाइल बंद किया तो पुलिस की जांच धीमी पड़ गई। मानव सूचना तंत्र का प्रभावी इस्तेमाल नहीं हो सका।
- नाकाबंदी में देरी: पुलिस को सुबह करीब पांच बजे सूचना मिलने के बावजूद शहर के बाहरी टोल प्लाजा, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों पर तत्काल प्रभावी नाकाबंदी नहीं हो सकी।
- सीसीटीवी जांच में देरी: रातीबड़ पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने में भी शुरुआती स्तर पर देरी की।
पुलिस के लिए ये चुनौतियां
- फोन से सुराग नहीं: आरोपी अपना फोन इस्तेमाल नहीं कर रहा है। उसके नाम की सिम भी बंद है। इसलिए कॉल डिटेल और मोबाइल टावर से उसकी लोकेशन पता नहीं चल रही।
- पहचान का संकट: पुलिस के पास आरोपी की पुरानी पासपोर्ट फोटो और गर्दन पर बने टैटू का सहारा है। धर्मशालाओं और रैन बसेरों में इनके आधार पर पहचान करना चुनौती है।
- सफर का रिकॉर्ड नहीं: बसों और मेमू व सामान्य श्रेणी की ट्रेनों में यात्रियों के नाम का चार्ट नहीं होता। इससे आरोपी के सफर का रिकॉर्ड जुटाना मुश्किल हो रहा है।
आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी के लिए पोस्टर चिपकाए जा रहे हैं। कई टीम उसकी तलाश में अलग-अलग जगह दबिश दे रही हैं। -संजय कुमार, पुलिस कमिश्नर, भोपाल
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