
डोनाल्ड ट्रंप. फोटो क्रेडिट- PTI
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नंवबर में होने वाले मिडटर्म इलेक्शन में वोटर्स को लुभाने के लिए बड़ा ऐलान किया है. ट्रंप के मुताबिक, अगर रिपब्लिकन पार्टी अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में जीत हासिल करती है, तो अमेरिका के हर वयस्क नागरिक को 5,000 डॉलर यानी करीब 4.76 लाख रुपये कैश देगा. इस योजना की कुल रकम करीब 1.22 ट्रिलियन डॉलर यानी 1,220 अरब डॉलर होगी.
अमेरिका पर कुल राष्ट्रीय कर्ज लगभग 40.10 ट्रिलियन डॉलर है. अमेरिका की आबादी लगभग 34.29 करोड़ है. इस हिसाब से अमेरिका के हर शख्स पर करीब 117,300 डॉलर (1.11 करोड़ रुपये) का सरकारी कर्ज है. अमेरिका में लगभग 24.4 करोड़ वयस्क नागरिक हैं. अगर हर वयस्क को 5,000 डॉलर दिए जाते हैं, तो सरकार पर कुल 1.22 ट्रिलियन डॉलर यानी 116.17 लाख करोड़ रुपये का खर्च आएगा. यह रकम इतनी बड़ी है कि दुनिया के करीब 170 देशों की सालाना GDP भी इससे कम है.
कितने देशों की इकोनॉमी 1.22 ट्रिलियन डॉलर से बड़ी
इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) के लेटेस्ट आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया के 193 देशों में सिर्फ 16 से 17 देश ऐसे हैं, जिनकी सालाना अर्थव्यवस्था 1.22 ट्रिलियन डॉलर से बड़ी है. इनमें अमेरिका, चीन, भारत और जर्मनी जैसे देश शामिल हैं. वहीं नीदरलैंड की अर्थव्यवस्था करीब 1.1 ट्रिलियन डॉलर, तुर्की की करीब 1.1 ट्रिलियन डॉलर और सऊदी अरब की करीब 1.06 ट्रिलियन डॉलर है. यानी इन देशों की अर्थव्यवस्था भी ट्रंप की प्रस्तावित रकम से छोटी है.
पोलैंड की GDP करीब 840 अरब डॉलर और अर्जेंटीना की करीब 600 अरब डॉलर है. दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, यह रकम अफ्रीका के सभी 54 देशों, पूरे लैटिन अमेरिका और एशिया-यूरोप के 170 से ज्यादा छोटे-बड़े देशों की सालाना GDP से भी ज्यादा होगी.
पैसा आएगा कहां से?
ट्रंप ने यह नहीं बताया कि इसके लिए पैसा कहां से आएगा, भुगतान का दायरा क्या होगा और रकम किस तरह बांटी जाएगी. हालांकि ट्रंप प्रशासन का दावा है कि इस रकम का इंतजाम डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी यानी DOGE के जरिए सरकारी खर्च में कटौती और फिजूलखर्ची रोककर किया जाएगा. ट्रंप का तर्क है कि नौकरशाही और सरकारी व्यवस्था को बेहतर बनाकर जो पैसा बचेगा, उसे आम करदाताओं को डिविडेंड के रूप में वापस किया जाना चाहिए. हालांकि, प्रस्ताव के लागू होने से पहले संसद से इसकी मंजूरी लेनी होगी.
हालांकि, अर्थशास्त्रियों ने ट्रंप के वादे पर सवाल उठाए हैं. अमेरिका पहले से ही बड़े राजकोषीय घाटे और 40 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा के कर्ज से जूझ रहा है. एक्सपर्ट्स का कहना है अगर ट्रंप ऐलान लागू हुआ तो महंगाई फिर बढ़ सकती है. साथ ही, इससे अमेरिका का कर्ज भी खतरनाक स्तर तक पहुंच सकता है.
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शुभेंदु प्रताप भूमंडल
पत्रकारिता में बीते 5 साल से सक्रिय हैं. नेशनल और इंटरनेशनल न्यूज राइटिंग का अनुभव. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से साइंस में ग्रेजुएशन, फिर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता और वीडियो प्रोडक्शन की पढ़ाई. दैनिक भास्कर डिजिटल से करियर की शुरुआत. बतौर न्यूज ब्रीफ एडिटर भास्कर डिजिटल में 800 से ज्यादा बाइलाइन स्टोरी. वीडियो स्क्रिप्टिंग का भी अनुभव. अगस्त 2025 से टीवी9 डिजिटल के साथ नई पारी का आगाज.
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