India Nepals Power Supply Agreement: बाढ़ की मार झेल रहे नेपाल की मदद के लिए भारत आगे आया है. केंद्रीय बिजली मंत्रालय ने नेपाल को रोजाना 18 घंटे बिजली देने की मंजूरी दे दी है.

India Nepals Power Supply Agreement: बाढ़ की मार झेल रहे नेपाल की मदद के लिए भारत आगे आया है. केंद्रीय बिजली मंत्रालय ने नेपाल को रोजाना 18 घंटे बिजली देने की मंजूरी दे दी है.

author-image

New Update

India Nepals Power Supply Agreement

India Nepals Power Supply Agreement Photograph: (AI)

India Nepals Power Supply Agreement: नेपाल में हाल ही में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने वहां के जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है. इस कुदरती तबाही का सबसे बड़ा असर नेपाल के बिजली उत्पादन तंत्र पर पड़ा है. देश के कई बड़े पनबिजली संयंत्र पानी और मलबे की चपेट में आकर बंद हो गए हैं, जिससे पूरे नेपाल में ऊर्जा का बड़ा संकट खड़ा हो गया है. इस मुश्किल घड़ी में पड़ोसी धर्म निभाते हुए भारत ने एक बार फिर नेपाल का हाथ मजबूती से थाम लिया है. भारत सरकार के केंद्रीय बिजली मंत्रालय ने नेपाल विद्युत प्राधिकरण को रोजाना 18 घंटे बिजली निर्यात करने की औपचारिक मंजूरी दे दी है. यह फैसला 13 सितंबर 2026 से लागू हो चुका है और इस साल के अंत यानी 31 दिसंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा. भारत का यह कदम दिखाता है कि दोनों देशों के बीच सिर्फ कूटनीतिक रिश्ते नहीं हैं, बल्कि संकट के पलों में एक-दूसरे के साथ खड़े रहने की पुरानी परंपरा भी कायम है.

दो प्रमुख ट्रांसमिशन लाइनों से पहुंचेगी बिजली

नेपाल को बिजली पहुंचाने के लिए दोनों देशों के बीच मौजूद आधुनिक ग्रिड प्रणाली का पूरा इस्तेमाल किया जा रहा है. मंत्रालय के निर्देश के मुताबिक बिजली की यह आपूर्ति दो अलग-अलग मुख्य रास्तों से की जाएगी. इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी मुजफ्फरपुर-ढल्केबर 400 केवी डबल सर्किट ट्रांसमिशन लाइन की होगी. इस लाइन के जरिए नेपाल को अधिकतम 600 मेगावाट बिजली भेजी जाएगी. इसके अलावा सीमावर्ती क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के लिए तनकपुर-महेन्द्रनगर 132 केवी सिंगल सर्किट लाइन का भी उपयोग किया जाएगा. इस मार्ग से अधिकतम 54 मेगावाट बिजली दी जा सकेगी. दोनों लाइनों को मिलाकर नेपाल को प्रतिदिन जरूरत के समय एक बड़ी ऊर्जा शक्ति मिलेगी, जिससे वहां के अस्पतालों, उद्योगों और आम घरों में बिजली की कमी नहीं होगी.

दिसंबर में होगी आगे की समीक्षा

बिजली मंत्रालय ने यह भी साफ किया है कि यह व्यवस्था मौजूदा आपात स्थिति को ध्यान में रखकर तुरंत राहत देने के लिए की गई है. दिसंबर 2026 के महीने में दोनों देशों के तकनीकी अधिकारी और ऊर्जा विशेषज्ञ बैठकर हालात की समीक्षा करेंगे. उस समय इस बात का जायजा लिया जाएगा कि नेपाल के क्षतिग्रस्त बिजली घरों की मरम्मत का काम कितना पूरा हुआ है और देश को जनवरी 2027 से कितनी बाहरी बिजली की दरकार होगी. उसी समीक्षा बैठक के आधार पर आगे के बिजली निर्यात की मात्रा और समय सीमा तय की जाएगी. भारत सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह नेपाल की ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखने और दोनों देशों के साझा विकास को गति देने के लिए पूरी तरह वचनबद्ध है.

बाढ़ के कारण पनबिजली घरों को भारी झटका

नेपाल अपनी बिजली की अधिकांश जरूरतों के लिए नदियों पर बने पनबिजली संयंत्रों पर निर्भर रहता है. हाल के हफ्तों में हुई भारी बारिश और पहाड़ों से उतरे मलबे ने इन परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया है. टरबाइनों में गाद भरने, दीवारों के टूटने और जलभराव के चलते बड़े प्रोजेक्ट बंद पड़े हैं. इससे नेपाल का अपना बिजली उत्पादन एकदम निचले स्तर पर आ गया है. घरों में ब्लैकआउट की नौबत आ गई थी और फैक्ट्रियों का पहिया थमने लगा था. अतिरिक्त बिजली की कोई स्थानीय व्यवस्था न होने के चलते नेपाल सरकार ने भारत से गुहार लगाई थी. भारत ने बिना देर किए इस मांग को स्वीकार करते हुए बिजली के पहिए को घुमा दिया.

राहत और बचाव के लिए पहले से डटे हैं भारतीय जवान

बिजली देने का यह फैसला उस व्यापक मानवीय सहायता का अगला चरण है जो भारत बाढ़ के पहले दिन से नेपाल को दे रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपदा के तुरंत बाद नेपाल के प्रधानमंत्री से टेलीफोन पर बात की थी और भरोसा दिया था कि भारत हर मोर्चे पर सहायता करेगा. इसके बाद 26 अगस्त 2026 से राहत का एक बड़ा सिलसिला शुरू हुआ. भारतीय वायुसेना के आठ विशेष मालवाहक विमानों ने नेपाल में 130 टन से ज्यादा राहत सामग्री पहुंचाई. इस सामग्री में बेघर हुए लोगों के लिए टेंट, ओढ़ने के कंबल, जरूरी स्वच्छता किट, अंधेरे से निपटने के लिए सोलर लैंप, जीवनरक्षक दवाएं, बिजली के बड़े जनरेटर, बस्तियों से पानी निकालने वाले शक्तिशाली पंप और हाईमास्ट रोशनी के टावर शामिल थे.

जमीन पर काम कर रहे हैं भारतीय विशेषज्ञ

राहत सामग्री भेजने के साथ ही भारत ने जमीन पर राहत कार्यों को रफ्तार देने के लिए 54 उच्चस्तरीय विशेषज्ञों की टीमें नेपाल भेजी हैं. चिलिमे और लंगतांग जैसे बेहद कठिन और पहाड़ी इलाकों में जहां सुरंगे मलबे से पट गई थीं, वहां भारतीय टनल और कीचड़ बचाव दल नेपाली सेना के जवानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर राहत कार्य चला रहे हैं. मलबे में दबे लोगों की तलाश और शवों की पहचान के लिए भारतीय फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है, जो अपने साथ आधुनिक डीएनए किट और तकनीकी उपकरण लेकर गए हैं. इसके अलावा भारतीय डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के दल अस्थायी शिविर लगाकर घायलों और बीमारों का दिन-रात इलाज कर रहे हैं. बाढ़ में टूटी सड़कों और पुलों के कारण कटे संपर्क को फिर से जोड़ने के लिए भारत ने बेली ब्रिज के ढांचे और कुशल इंजीनियरों की टुकड़ियां भी भेजी हैं, ताकि दुर्गम इलाकों तक गाड़ियां और मदद आसानी से पहुंच सके. बिजली की नई खेप से नेपाल के इन सभी पुनर्निर्माण कार्यों को नई ताकत मिलेगी.

यह भी पढ़ें: नेपाल बाढ़ का दर्द अमेरिका तक पहुंचा, लापता अपनों की तलाश में परिवारों ने जताई एकजुटता