Published: Sunday, October 18, 2026, 9:58 [IST]
Kolkata Durga Puja Stampede: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में महासप्तमी की रात खुशियों का पर्व अचानक मातम में बदल गया। उत्तरी कोलकाता के गिरीश पार्क थाना क्षेत्र स्थित प्रसिद्ध चोरबागान सार्वजनीन दुर्गा पूजा पंडाल में मची भयानक भगदड़ ने 19 लोगों की जिंदगी निगल ली, जबकि 25 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
इस दर्दनाक हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। आखिर शनिवार शाम करीब 7:40 बजे इस लोकप्रिय पंडाल में ऐसा क्या हुआ कि चंद मिनटों में सब कुछ उजड़ गया? आइए इस पूरे घटनाक्रम और इसके कारणों का विश्लेषणात्मक विवरण समझते हैं।
बारिश, उमड़ी भीड़ और संकरे रास्ते बने काल
हादसे वाली शाम कोलकाता में अचानक मूसलाधार बारिश शुरू हो गई थी। बारिश से बचने और दर्शन करने के लिए पंडाल के बाहर पहले से ही भारी भीड़ जमा थी। प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस के मुताबिक, पंडाल के एंट्री और एग्जिट गेट बेहद संकरे थे, जिससे अंदर और बाहर आने-जाने वालों का दबाव बढ़ गया।
इसी दौरान आयोजकों की ओर से की गई किसी घोषणा या माइक अनाउंसमेंट के कारण लोगों में और अधिक हचपचाहट मच गई। अंधेरा होने, लाइट गुल होने और कीचड़-फिसलन के चलते लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे, जिससे भगदड़ का यह खौफनाक मंजर सामने आया।

अपनों को खोने वालों का दर्द और प्रशासन पर सवाल
इस त्रासदी में अपनों को खोने वाले परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। अपनी आंखों के सामने मां को दम तोड़ते देखने वाले सोनू पाल ने बताया कि लोग बारिश से बचने के लिए अंदर भाग रहे थे, जिससे भारी दबाव बन गया और सब एक-दूसरे पर गिर पड़े।
स्थानीय लोगों और चश्मदीदों ने पुलिस की तैनाती और भीड़ प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप था कि वीआईपी गेट के बाहर पुलिस बल तैनात था, जबकि आम जनता वाले रास्तों पर सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं थे।
सरकार का एक्शन: मुआवजा, नौकरी और SIT जांच
घटना के बाद राज्य और केंद्र सरकार हरकत में आ गई है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना और मृतकों के परिजनों के लिए बड़े ऐलान किए:
- आर्थिक सहायता: प्रत्येक मृतक के परिवार को 25 लाख रुपये और घायलों को 5 लाख रुपये मुआवजा दिया जाएगा।
- सरकारी नौकरी: मृतकों के आश्रितों को राज्य सरकार की ओर से सरकारी नौकरी दी जाएगी।
- इलाज का खर्च: घायलों के इलाज का सारा खर्च सरकार उठाएगी।
- जांच कमेटी: घटना की जांच के लिए एक विशेष SIT और कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी के गठन का अनुरोध किया गया है। इस मामले में आयोजकों और वालंटियर्स समेत 12 लोगों को हिरासत में लिया गया है।

कोलकाता के पंडालों का पुराना और डरावना इतिहास
कोलकाता में दुर्गा पूजा के दौरान भीड़ प्रबंधन को लेकर पहले भी बड़े हादसे टले हैं या प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है।
- 19 अक्टूबर 2015: देशप्रिय पार्क में 88 फीट ऊंची मूर्ति देखने उमड़ी भारी भीड़ के कारण भगदड़ जैसे हालात बने थे, जिसमें 11 लोग घायल हुए थे और पंडाल बंद करना पड़ा था।
- 30 सितंबर 2017: संतोष मित्रा स्क्वायर पंडाल में झूमर से चिंगारी निकलने के बाद एहतियातन 14 घंटे दर्शन बंद रखने पड़े थे।
- 28 अक्टूबर 2020: साल्ट लेक के एफडी ब्लॉक पंडाल में भीषण आग लगने से पूरी संरचना और प्रतिमा जलकर राख हो गई थी।
चोरबागान की इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भव्य थीम और सजावट से ज्यादा जरूरी आम नागरिकों की सुरक्षा और पुख्ता क्राउड मैनेजमेंट है।