Wed, 02 Sep 2026 05:00 AM IST

Alka Tyagi

सुनील सिलवाल, संवाद न्यूज एजेंसी, मसूरी

सुनील सिलवाल, संवाद न्यूज एजेंसी, मसूरी Published by: Alka Tyagi Updated Wed, 02 Sep 2026 05:00 AM IST

सार

एक सितंबर 1994 को खटीमा में हुई गोलीबारी की खबर मसूरी पहुंचने पर आंदोलनकारियों में आक्रोश फैल गया। इस दौरान आंदोलन हुआ और पुलिस फायरिंग में राय सिंह बंगारी, मदन मोहन ममगाईं, हंसा धनाई, बेलमती चौहान, बलबीर नेगी और धनपत सिंह बलिदान हो गए।

दो सितंबर 1994 का दिन उत्तराखंड के इतिहास में एक दर्दनाक और निर्णायक अध्याय है। अलग राज्य की मांग को लेकर हुए आंदोलन के दौरान मसूरी में पुलिस फायरिंग हुई थी। इस घटना में छह आंदोलनकारी और डीएसपी उमाकांत त्रिपाठी शहीद हुए थे, जिनकी याद में हर वर्ष श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया जाता है।

एक सितंबर 1994 को खटीमा में हुई गोलीबारी की खबर मसूरी पहुंचने पर आंदोलनकारियों में आक्रोश फैल गया। उत्तराखंड संयुक्त संघर्ष समिति ने मसूरी बंद का आह्वान किया और शांतिपूर्ण प्रदर्शन शुरू किया।

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Mussoorie Firing case 2  September 1994 six agitators made the ultimate sacrificeAll Facts

मसूरी गोलीकांड - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

माहौल तनावपूर्ण होने पर 46 आंदोलनकारियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, जिनमें समिति अध्यक्ष हुक्म सिंह पंवार भी शामिल थे। दो सितंबर को झूलाघर क्षेत्र में पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच तनाव बढ़ा, जो हिंसक हो गया।

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मसूरी गोलीकांड - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

पुलिस फायरिंग में राय सिंह बंगारी, मदन मोहन ममगाईं, हंसा धनाई, बेलमती चौहान, बलबीर नेगी और धनपत सिंह बलिदान हो गए। इस गोलीकांड ने उत्तराखंड आंदोलन पर गहरी छाप छोड़ी और पूरे पहाड़ में आक्रोश फैल गया। मसूरी, देहरादून और अन्य पर्वतीय क्षेत्रों में आंदोलन तेज हुआ। लंबे संघर्ष के बाद नौ नवंबर 2000 को उत्तराखंड अलग राज्य बना। हालांकि, आंदोलनकारियों के कई सपने आज भी अधूरे हैं।

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Mussoorie Firing case 2  September 1994 six agitators made the ultimate sacrificeAll Facts

मसूरी गोलीकांड में शहीद हुए आंदोलनकारी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

शहीदों के सपनों का अधूरा उत्तराखंड
मसूरी शहीद स्मारक समिति अध्यक्ष भगवान सिंह धनाई ने शहीदों के नाम पर सड़कों और म्यूजियम बनाने की घोषणाओं पर अमल न होने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि शहीद स्थल पर शेड निर्माण की मांग भी लंबित है। उत्तराखंड संयुक्त संघर्ष समिति के तत्कालीन महामंत्री जयप्रकाश उत्तराखंडी ने कहा कि भ्रष्टाचार, भूमाफिया और बाहरी उद्योगपतियों के प्रभाव ने राज्य आंदोलन के मूल सपनों को पीछे धकेल दिया है। उन्होंने गैरसैंण राजधानी, पलायन, मूल निवास और भू-कानून जैसे मुद्दों को अब भी गंभीर बताया।

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मसूरी गोलीकांड में शहीद हुए डीएसपी त्रिपाठी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

डीएसपी त्रिपाठी की पत्नी की मार्मिक अपील
बलिदानी डीएसपी उमाकांत त्रिपाठी की पत्नी जसोदा त्रिपाठी आज भी अपने पति को उत्तराखंड सरकार से शहीद का दर्जा मिलने की आस लगाए हैं। 68 वर्षीय जसोदा त्रिपाठी ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने उनके पति को शहीद का दर्जा दिया लेकिन उत्तराखंड सरकार ने नहीं। उनकी इच्छा है कि उनके पति को उत्तराखंड में शहीद का दर्जा मिले और मसूरी या देहरादून में उनकी प्रतिमा स्थापित हो। उन्होंने कहा कि उन्हें कोई आर्थिक मदद नहीं चाहिए, बस यह सम्मान ही उनकी आखिरी इच्छा है।