लखीसराय के अशोक धाम मंदिर से करीब एक किलोमीटर पहले हुई भगदड़ की पड़ताल में चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। मंदिर जाने वाली सड़क के एक ओर हरेराम सिंह और मुन्ना सिंह नाम के किसान की जमीन है। दोनों का दावा है कि सड़क उनके खेत की जमीन पर है। दो साल में

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भगदड़ के बाद घटनास्थल पर पहुंचे भास्कर रिपोर्टर को प्रत्यक्षदर्शियों और मंदिर के पास रहने वाले स्थानीय लोगों ने ये जानकारी दी। प्रत्यक्षदर्शी और स्थानीय हेमंत ने दैनिक भास्कर रिपोर्टर को एक वीडियो उपलब्ध कराया, जो करीब 20 दिन पहले का है। वीडियो में चौकी गांव के रहने वाले जमीन मालिक हरेराम सिंह और मुन्ना सिंह मंदिर जाने वाली सड़क की जमीन की मिट्टी को कटवाते दिख रहे हैं।

हेमंत का दावा है कि दोनों किसानों ने जान बूझकर बिजली के खंभों के पास की मिट्टी को काटा है ताकि उनके खेत में गड़ा बिजली का खंभा गिर जाए। सोमवार को अशोक धाम मंदिर मार्ग पर बनी बैरिकेडिंग टूटने और बिजली का पोल गिरते ही मची भगदड़ में 7 श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 15 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों ने और क्या दावा किया? मंदिर जाने वाली 20 फीट चौड़ी सड़क कैसे 10 फीट की रह गई है? भास्कर रिपोर्टर को भगदड़ की पड़ताल में और क्या मिला? पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

बिजली के खंभे के पास मिट्टी काटने की दो तस्वीरें देखिए

वीडियो 20 दिन पुराना है, जब हरेराम सिंह और मुन्ना सिंह ने खेत में गड़े बिजली के खंभे के किनारे से मिट्टी कटवाई थी।

वीडियो 20 दिन पुराना है, जब हरेराम सिंह और मुन्ना सिंह ने खेत में गड़े बिजली के खंभे के किनारे से मिट्टी कटवाई थी।

खेत के पास ही हेमंत का मकान है, जिन्होंने इस वीडियो को शूट किया था और भास्कर को ये वीडियो उपलब्ध कराया।

खेत के पास ही हेमंत का मकान है, जिन्होंने इस वीडियो को शूट किया था और भास्कर को ये वीडियो उपलब्ध कराया।

सबसे पहले पढ़िए स्थानीय और प्रत्यक्षदर्शियों ने क्या दावा किया?

घटनास्थल से करीब 10 मीटर दूर रहने वाले हेमंत कुमार ने बताया कि सावन की तीसरी सोमवारी और नागपंचमी के मौके पर मंदिर में अचानक श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ी। इनमें अधिकतर महिलाएं थीं। श्रद्धालुओं के लिए मंदिर जाने वाली सड़क पर खेतों के किनारे बांस और कपड़े की मदद से बैरिकेडिंग की गई थी। जब भीड़ बढ़ रही थी, तब रास्ते में एक बिजली का खंभा अचानक खेत में गिर गया। इसके बाद अफवाह फैली कि बिजली का खंभा गिरने से करंट फैल गया है।

अफवाह फैलने के बाद भगदड़ शुरू हो गई। इसके बाद कुछ महिलाएं खेत में गिर गई। इसी दौरान जो महिला पहले खेत में गिरी, उसकी मौत हो गई।

प्रत्यक्षदर्शी हेमंत कुमार ने बताया कि हरेराम सिंह और मुन्ना सिंह नाम के किसान का दावा है कि रास्ता उसके खेत में आता है। इसी वजह से उसने खेत से सटे रास्ते को काटकर संकरा कर दिया था।

‘सोमवार को डीएम आए थे, दोनों किसानों ने सड़क का काम रुकवा दिया’

स्थानीय दिवाकर सिंह ने बताया कि उम्मीद से ज्यादा भीड़ की वजह से भगदड़ हुई। जितनी भी महिलाएं थीं, वे एक साथ मंदिर में घुसना चाह रही थी। उन्होंने बताया कि मंदिर जाने वाले रास्ते में जिन किसानों की जमीन है, वे रास्ता को काट-काटकर 20 फीट से 10 फीट संकरा कर दिया है।

किसानों का दावा है कि सड़क की जमीन मेरे खेत में है। अगर ऐसा था तो किसान को आवेदन देना चाहिए था। सरकार आती, नापी कराती। इसके बाद किसान हर दिन कुछ-कुछ रास्ता का हिस्सा काटता था। दो साल पहले भी उसने सड़क का काम रुकवाया था। सोमवार को डीएम भी आए थे, उस दिन भी किसान ने काम रोक दिया था।

अब जानिए, भास्कर रिपोर्टर की पड़ताल में क्या सामने आया?

सावन की तीसरी सोमवारी पर लखीसराय के प्रसिद्ध अशोक धाम मंदिर में सुबह 3 बजे से जलाभिषेक के लिए महिलाओं समेत श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। मंदिर में जलाभिषेक के लिए लखीसराय के अलावा, मुंगेर, जमुई, बेगूसराय और पटना से श्रद्धालु यहां आए थे।

सुबह तीन बजे मंदिर का पट खुलने के बाद जलाभिषेक का दौर शुरू हो गया था। करीब साढ़े तीन घंटे में 30 हजार श्रद्धालु जलाभिषेक कर चुके थे। सुबह करीब 6 बजकर 30 मिनट पर लखीसराय के चौकी स्थित अशोक धाम रेलवे स्टेशन पर पैसेंजर ट्रेन आकर रुकी थी। ट्रेन से उतरते ही एक हजार से अधिक कांवड़िया और श्रद्धालु हर-हर महादेव के जयघोष के साथ मंदिर की ओर बढ़ने लगे।

भास्कर रिपोर्टर को बिजली के खंभे के पास मिट्टी कटाई का वीडियो उपलब्ध कराने वाले हेमंत ने घटनास्थल पर पहुंचकर सारी बातें समझायी।

भास्कर रिपोर्टर को बिजली के खंभे के पास मिट्टी कटाई का वीडियो उपलब्ध कराने वाले हेमंत ने घटनास्थल पर पहुंचकर सारी बातें समझायी।

अशोक धाम रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी करीब 1.2 किलोमीटर है। इसमें से 1 किलोमीटर तक तो पक्की सड़क बनी हुई है, लेकिन करीब 200 मीटर का रास्ता स्थानीय जमीन विवाद के कारण कच्चा और बेहद संकरा रह गया है। श्रद्धालुओं की भीड़ जैसे ही मंदिर की ओर बढ़ी। करीब 200 मीटर दूर पहुंचा, वहां लगी बैरिकेडिंग पर भीड़ का भारी दबाव बढ़ा।

जमीन की मिट्टी कटी होने के कारण बैरिकेडिंग भीड़ का भार नहीं संभाल सकी और भरभराकर ढह गई। बैरिकेडिंग गिरते ही उसके ठीक बगल में दो दिनों से झुका हुआ बिजली का पोल भी जमीन पर गिर पड़ा।

बिजली के खंभे के गिरने के बाद चिंगारी निकली, लेकिन तार ऊपर ही रह गए

पोल गिरते ही उसमें हल्की चिंगारी निकली। हालांकि बिजली के तार ऊपर ही अटक गए थे और नीचे करंट नहीं आया था, लेकिन भीड़ में अचानक करंट आ गया भागो का शोर मच गया। इस अफवाह ने शांतिपूर्वक आगे बढ़ रहे श्रद्धालुओं के बीच तबाही मचा दी। जान बचाने के लिए लोग बदहवास होकर भागने लगे।

संकरा रास्ता होने के कारण कुछ महिलाएं संतुलन खोकर सड़क किनारे निचले खेतों में जा गिरी। देखते ही देखते 1000 से अधिक लोगों की अनियंत्रित भीड़ पीछे से दौड़ पड़ी और नीचे गिरी महिलाओं और श्रद्धालुओं को रौंदती हुई निकल गई। लगभग 150 मीटर आगे मंदिर प्रवेश द्वार के पास लगी बैरिकेडिंग पर पुलिस बल तैनात था, लेकिन बेकाबू भीड़ के सामने सभी इंतजाम फेल साबित हुए।

हरेराम और मुन्ना सिंह की खेत में गड़ा हुआ पिलर। स्थानीय लोगों का कहना है कि दोनों की जमीन इस पिलर तक ही है।

हरेराम और मुन्ना सिंह की खेत में गड़ा हुआ पिलर। स्थानीय लोगों का कहना है कि दोनों की जमीन इस पिलर तक ही है।

अब किसान हरेराम सिंह और मुन्ना सिंह की जमीन में गड़े बिजली के खंभे की कहानी जानिए

चौकी गांव के रहने वाले हरेराम सिंह और मुन्ना सिंह की वहां करीब दो बीघा निजी जमीन है। करीब 1 साल पहले बिजली विभाग ने नक्शे के अनुसार सरकारी जमीन पर बिजली का पोल गाड़ा था। जिसके 5 फीट बाद हरेराम सिंह और मुन्ना सिंह की निजी जमीन शुरू होती है।

आरोप है कि हरेराम और मुन्ना सिंह सड़क की सरकारी जमीन पर कब्जा करना चाहते थे। रास्ते को संकरा करने और बिजली के पोल को हटाने की नीयत से उन्होंने पोल की जड़ों के पास से करीब 2 से 3 फीट आगे तक मिट्टी कटवा ली, जिसका वीडियो भी अब सामने आ चुका है।

आसपास के लोगों से जानकारी मिली कि पिछले महीने भी मंदिर के रास्ते की मिट्टी काटने की जानकारी जिलाधिकारी को मिली थी। तब डीएम ने अमीन से जमीन की मापी करवाकर सीमांकन के लिए सीमेंटेड पिलर (पाया) भी गड़वा दिए थे। लेकिन इसके बावजूद हरेराम सिंह और मुन्ना सिंह ने सड़क और बिजली पोल के बेस से मिट्टी की कटाई जारी रखी। मिट्टी कट जाने के कारण हालिया बारिश में पोल की पकड़ खोखली हो चुकी थी और वह हादसे से दो दिन पहले से ही एक तरफ झुका हुआ था।

मिट्टी कटाव के बाद दो बिजली के खंभे कमजोर हो गए हैं, जो कभी भी गिर सकते हैं।

मिट्टी कटाव के बाद दो बिजली के खंभे कमजोर हो गए हैं, जो कभी भी गिर सकते हैं।

FSL ने माना- हादसे का मूल कारण अवैध मिट्टी कटाई थी

हादसे के पांच घंटे बाद घटनास्थल पर पहुंची फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम ने प्राथमिक जांच के बाद स्पष्ट माना कि हादसे का मूल कारण सरकारी जमीन पर अवैध मिट्टी कटाई ही है। एफएसएल टीम के अनुसार मिट्टी की गहराई तक कटाई किए जाने के कारण बिजली पोल की नींव पूरी तरह से अस्थिर हो चुकी थी। बैरिकेडिंग को जिन बांस-बल्लों के सहारे खड़ा किया गया था, उनकी जमीन में पकड़ मिट्टी न होने से बेहद कमजोर थी। श्रद्धालुओं की भीड़ का दबाव पड़ते ही बैरिकेडिंग टूटी और पोल गिर गया, जिसने भगदड़ का रूप ले लिया।

बैरिकेडिंग कमजोर होने से भीड़ गिरी, इसके बाद बिजली का खंभा भी गिरा, जिसके बाद अफवाह फैल गई कि करंट आ गया है, जबकि तार ऊपर ही था। लोग बदहवास होकर भागे और खेत में गिरी महिलाओं के ऊपर 100-150 लोग चढ़ गए।