
ईरान में अमेरिकी सैनिकों ने उतारा था रेस्क्यू मिशनImage Credit source: getty image
सोचिए, आपका फाइटर जेट दुश्मन के इलाके में गिर चुका है, पैराशूट ठीक से नहीं खुला और शरीर में कई जगह फ्रैक्चर है. नीचे जमीन पर दुश्मन की सेना आपको खोज रही है और आपके पास छिपने के अलावा कोई रास्ता नहीं है. ऐसे में अगर मदद का भरोसा हो भी, तो सवाल यही है कि वह मदद आप तक पहुंचेगी कैसे? अप्रैल 2026 में ईरान में अमेरिकी एयरफोर्स के अधिकारी के साथ कुछ ऐसा ही हुआ. F-15E फाइटर जेट के गिरने के बाद उसके दो क्रू मेंबर अलग-अलग जगह जा गिरे.
अप्रैल में अमेरिकी F-15E स्ट्राइक ईगल ईरान के ऊपर एक मिशन पर था. इसी दौरान विमान को एक मिसाइल से निशाना बनाया गया और वह क्रैश हो गया. विमान में दो अमेरिकी अधिकारी थे, जिन्हें यहां उनके कॉल साइन ‘अल्फा’ और ‘ब्रावो’ से जाना गया और विमान ईरान में ही जा गिरा था. दोनों ने विमान से बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन जमीन पर पहुंचने के बाद उनकी लोकेशन अलग हो गई. अल्फा को अमेरिकी सेना ने करीब छह घंटे के अंदर खोज लिया.
अल्फा को बचाने में लगा 6 घंटा
बेहद जोखिम भरा रेस्क्यू ऑपरेशन किया गया, जिसमें 21 एयरक्राफ्ट शामिल थे और इनमें दो हेलिकॉप्टर भी थे. इस दौरान 90 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक भी शामिल थे. ईरान में अमेरिकी हेलिकॉप्टरों पर गोलीबारी भी हुई, लेकिन टीम अल्फा को सुरक्षित निकालने में कामयाब रही. इस मिशन की डिटेल में जानकारी तब सामने आई, जब ब्रावो ने CBS न्यूज के ’60 मिनट्स’ प्रोग्राम को इंटरव्यू दिया. इस इंटरव्यू में उन्होंने मिशन के बारे में बात की. उन्होंने बताया कि विमान से गिरने के बाद उनकी हालत काफी खराब हो गई थी.
रीढ़ की हड्डी, हाथ और कंधा हुआ फ्रैक्चर
इसकी वजह बताते हुए उन्होंने बताया कि पैराशूट से वो सीधे जमीन पर उतरे थे, इसकी वजह से उसकी रीढ़ की हड्डी, हाथ और कंधे में फ्रैक्चर हुआ. सिर और चेहरे पर भी चोटें आईं थी. हालांकि, अमेरिकी सेना के लिए असली चुनौती ब्रावो के ही लिए थी, क्योंकि उसका कोई पता नहीं था. इंटरव्यू के दौरान ब्रावो ने बताया कि इसके बावजूद उसने क्रैश साइट के पास रुकने के बजाय खुद को छिपाने के लिए पहाड़ी इलाके की तरफ बढ़ना शुरू किया.
Wow. Never thought wed see this footage of the F-15 pilot rescue from early in the Iran war.
Note the pentagon heavily censors one of the helicopters used by the special operators – wonder what capability theyre hiding by blurring all the details 🙂 pic.twitter.com/POeSNOHoNM
— Bilawal Sidhu (@bilawalsidhu) September 14, 2026
वह करीब 7 हजार फीट ऊंची एक रिज तक पहुंच गया. वहां से उसने अपनी लोकेशन छिपाते हुए अमेरिकी सेना से संपर्क करने की कोशिश की. इसी बीच ईरानी सेना और दूसरे हथियारबंद लोग उसकी तलाश कर रहे थे. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, कुछ मौकों पर खोजी टीमें उससे कुछ सौ मीटर की दूरी तक पहुंच गई थीं. कई घंटों तक छिपे रहने के बाद ब्रावो ने अमेरिकी टीम से संपर्क किया. उसने बताया कि वह घायल है और आगे बढ़ रहा है. इसके बाद उसका एक और मैसेज आया- ‘भगवान अच्छे हैं.’ इसके बाद CIA की मदद से उसकी लोकेशन का पता लगाने की कोशिश हुई.
46 साल बाद ईरान की जमीन पर अमेरिकी सैनिक
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी एजेंसियों ने ईरानी सेना को भ्रमित करने के लिए गुमराह करने की रणनीति भी अपनाई. साथ ही अमेरिकी विमान और ड्रोन इलाके में मौजूद ईरानी बलों पर कार्रवाई कर रहे थे, ताकि रेस्क्यू टीम के लिए रास्ता बनाया जा सके. ब्रावो को निकालने के लिए आखिरकार करीब 90 से ज्यादा अमेरिकी स्पेशल ऑपरेटरों को ईरान के अंदर भेजा गया. यह इसलिए भी खास था क्योंकि 1980 के बाद पहली बार अमेरिकी सैनिकों के ईरान की जमीन पर उतरने की बात सामने आई.
करीब 46 साल पहले अमेरिकी सेना ने ईरान में अमेरिकी बंधकों को छुड़ाने के लिए ऑपरेशन ईगल क्लॉ चलाया था, लेकिन वह मिशन असफल रहा था. 2026 के इस अभियान में उसी इतिहास की छाया भी दिखाई दी, लेकिन इस बार अमेरिकी सेना अपने एयरमैन को निकालने में सफल रही. ब्रावो करीब 50 घंटे तक दुश्मन के इलाके में घायल हालत में छिपा रहा था. टीम ने उसे वहां से निकाला और सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया.
रेस्क्यू के बाद भी खत्म नहीं हुआ मिशन
ब्रावो को सुरक्षित निकालने के बाद अमेरिकी टीम के सामने एक और चुनौती आ गई. रेस्क्यू में इस्तेमाल किए गए विमान ईरान में ही फंस गए. हालांकि, अमेरिकी सैनिकों को बाहर निकाल लिया गया और बाद में दुश्मन के हाथ सैन्य तकनीक न लगे, इसलिए अमेरिकी सेना ने उस विमान को वहीं नष्ट कर दिया. इस पूरे मिशन में बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिक, हेलिकॉप्टर और लड़ाकू विमान शामिल थे. करीब चार महीने बाद वीडियो सामने आया.

अंकिता
शिव की नगरी काशी से अपने करियर की शुरुआत करने वाली अंकिता पाण्डेय ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से पत्रकारिता में अपनी मास्टर्स की डिग्री पूरी की है. पत्रकारिता में आने के लिए उन्होंने बनारस के लोकल न्यूज पेपर "काशीवार्ता" से अपनी शुरुआत की, बाद में दिल्ली जैसे महानगरी का रुख करते हुए उन्होंने TV9 भारतवर्ष में अक्टूबर साल 2023 से जुड़ी. आज वह इस ऑर्गनाइजेशन में बतौर सब-एडिटर काम कर रही हैं. क्राइम, एंटरटेनमेंट और अन्य सभी को न्यूज के साथ विजुअल तरीके से पेश करने में रुचि है. पत्रकारिता के अलावा कविताएं लिखना, फोटोग्राफी करना और म्यूजिक का भी शौक रखती हैं.
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