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भास्कर संवाददाता| गुना सरकार 2 हजार रुपये से अधिक के चुनिंदा यूपीआई मर्चेंट (व्यापारियों को किए जाने वाले) भुगतानों पर 0.4% का एमडीआर शुल्क लगाने जा रही है। जिले के सभी व्यापारिक संगठन इसका विरोध कर रहे हैं और नो ट्रांजेक्शन डे मनाने की योजना तक बना रहे हैं। इस बीच नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने अगस्त के महीने के आंकड़े जारी कर दिए हैं। इसमें सामने आया है कि गुना में अगस्त के महीने में 72.95 लाख यूपीआई ट्रांजेक्शन हुए हैं जिनकी वेल्यु 869.37 करोड़ रुपए है।

अब लोग डिजिटल पेमेंट की ओर अधिक बढ़ रहे हैं और मार्च से अगस्त तक जिले में यूपीआई पेमेंट की संख्या में 10.70 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। औसतन हर दिन जिले में 2 लाख 35 हजार यूपीआई पेमेंट हर दिन हो रहे हैं। एनपीसीआई के अनुसार देश और प्रदेश भर में कुल यूपीआई वैल्यू का लगभग 30% हिस्सा मर्चेंट भुगतानों के लिए होता है। इस हिसाब से अगस्त में गुना का कुल मर्चेंट कारोबार 260.81 करोड़ रुपए रहा। मर्चेंट भुगतानों में से औसतन 67% लेन-देन 2,000 रुपए से अधिक मूल्य के होते हैं। इस हिसाब से गुना जिले में ऐसे बड़े मर्चेंट सौदों का टर्नओवर 174.74 करोड़ रुपए प्रति माह बैठता है। जब इस पर 0.4% एमडीआर लगाया जाएगा तो हर महीने औसतन 69.90 लाख रुपए का बोझ यहां के व्यापारियों पर पड़ सकता है। मार्च से अगस्त 2026 तक के 6 महीनों के आंकड़ों को देखें तो गुना जिले में अब तक 4.07 करोड़ से ज्यादा बार कुल 5,487 करोड़ रुपए का लेन-देन हो चुका है। दो सीजन में टूट गया था रिकॉर्ड {मई में सबसे ज्यादा वैल्यू: मई महीने में रबी फसल (गेहूं व सरसों) मंडी में बिकने और शादी-ब्याह की खरीदारी होने से जिले में रिकॉर्ड ₹965.96 करोड़ का यूपीआई लेन-देन हुआ। {

अगस्त में सबसे ज्यादा वॉल्यूम: अगस्त में बड़े कृषि सौदे कम होने से कारोबार की कुल राशि जरूर घटकर ₹869 करोड़ रही, लेकिन त्यौहारों की तैयारी में फुटकर खरीदारी बढ़ने से कुल ट्रांजेक्शन संख्या 72.95 लाख (2.35 लाख/दिन) के उच्च स्तर पर पहुंच गई। व्यापारिक संगठनों के अनुसार इस व्यवस्था से सभी को असर पड़ेगा, लेकिन सबसे ज्यादा बोझ कम मार्जिन वाले व्यापार में आएगा। गोल्ड, ज्वेलरी, टीवी, पेट्रोल और मोबाइल जैसे कारोबार में मार्जिन करीब एक से 1.5 प्रतिशत तक होता है। यदि इसमें 0.4 प्रतिशत एमडीआर में चला गया तो यह बड़ा फर्क डालेगा। वहीं व्यापारियों का यह भी कहना है कि हर चार्ज का भार अंत में एंड यूजर पर ही जाता है। ऐसे में ग्राहक भी इस प्रभाव से अछूते नहीं रहेंगे। हाल ही में हुई व्यापारिक संगठनों की बैठक में नो ट्रांजेक्शन डे मनाने की योजना पर भी चर्चा हुई।