20 दिन में रेप के 13 केस दर्ज: दिल्ली-एनसीआर की पुलिस पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, खुद लेगी एक्शन

सुप्रीम कोर्ट का एक्शनImage Credit source: getty image

दिल्ली-NCR में सितंबर की शुरुआत से रेप और यौन हमले के कम से कम 13 मामले सामने आने के बाद मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है. इनमें महिलाओं के साथ-साथ नाबालिगों से जुड़े मामले भी शामिल हैं. हाल ही में आस्था कुंज पार्क में 17 साल की लड़की से कथित गैंगरेप और एक चलती स्लीपर बस में नाबालिग से कथित यौन हमले जैसे मामलों ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए.

इन घटनाओं के बीच सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को खुद संज्ञान लेते हुए suo motu मामला दर्ज करने का निर्देश दिया. कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक जगहों को खराब रोशनी, निगरानी की कमी या गश्त की कमी के कारण महिलाओं और बच्चों के लिए खतरनाक नहीं बनने दिया जा सकता. सुप्रीम कोर्ट ने इन घटनाओं को सिर्फ अलग-अलग अपराध मानने के बजाय सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े बड़े सवाल के तौर पर देखा.

निर्भया के 14 साल बाद भी सुरक्षा पर सवाल

कोर्ट ने कहा कि केवल घटनाओं के बाद चिंता जताना काफी नहीं है, बल्कि जिम्मेदारी तय करने और अपराध रोकने के लिए ठोस कदम जरूरी हैं. अदालत ने 2012 के निर्भया मामले की याद दिलाने वाला संदर्भ भी दिया. न्यायमूर्ति परदीवाला ने कहा, ‘2012 के निर्भया मामले से दर्दनाक तुलना किए बिना कोई नहीं रह सकता, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या तब से लेकर एक दशक में कानून प्रवर्तन तंत्र में कोई सार्थक प्रगति हुई है.’

इस पूरे मामले में कम से कम 13 घटनाओं का जिक्र इसलिए अहम है क्योंकि ये घटनाएं अलग-अलग जगहों- पार्क, बस, घर और दूसरे सार्वजनिक या निजी स्थानों से जुड़ी बताई गई हैं. ऐसे में सवाल है कि आखिर अपराध होने से पहले पुलिस और प्रशासन क्या कर सकते हैं और सार्वजनिक जगहों को सुरक्षित बनाने के लिए क्या व्यवस्था होनी चाहिए.

13 मामलों के बाद क्यों लिया गया suo motu संज्ञान?

  • सितंबर की शुरुआत से दिल्ली-NCR में 13 रेप और यौन हमले रिपोर्ट हुए.
  • इनमें महिलाओं और नाबालिगों से जुड़े मामले शामिल हैं.
  • आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय लड़की से कथित गैंगरेप का मामला सामने आया.
  • एक नाबालिग से चलती स्लीपर बस में कथित यौन हमले का भी जिक्र हुआ.
  • सुप्रीम कोर्ट ने इन घटनाओं पर खुद संज्ञान लेकर सुनवाई शुरू करने का निर्देश दिया.

Delhi Ncr Rape Cases (2)

सुप्रीम कोर्ट ने इसे मामले में क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि दिल्ली-NCR में सामने आई घटनाएं कानून लागू करने वाली एजेंसियों और सार्वजनिक प्रशासन की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं. कोर्ट के मुताबिक, लोगों को बिना डर के सार्वजनिक जगहों पर आने-जाने का अधिकार है और यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार से जुड़ा है.

कोर्ट ने खास तौर पर कहा कि पार्क, सड़क, बस, मेट्रो स्टेशन, सबवे और फुटब्रिज जैसी जगहें खराब रोशनी या निगरानी की कमी के कारण हाई-रिस्क जोन नहीं बननी चाहिए. यानी सुरक्षा का मतलब सिर्फ अपराध होने के बाद आरोपी को पकड़ना नहीं है. ऐसी व्यवस्था भी जरूरी है जिससे अपराध की संभावना को पहले ही कम किया जा सके.

Suo motu का आसान मतलब क्या है?

Suo motu का मतलब है कि अदालत किसी व्यक्ति या संगठन की याचिका का इंतजार किए बिना किसी गंभीर मुद्दे पर खुद संज्ञान लेती है. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में हाल की रेप और यौन हमले की घटनाओं को देखते हुए कोर्ट रजिस्ट्री को suo motu जनहित याचिका दर्ज करने का निर्देश दिया है.

इसका मकसद किसी एक घटना की जांच करना भर नहीं है. कोर्ट ने व्यापक रूप से यह सवाल उठाया है कि सार्वजनिक सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाली एजेंसियां अपराध रोकने के लिए क्या कर रही हैं और उनकी जवाबदेही कैसे तय होगी.

रेप रोकने के लिए क्या नियम और व्यवस्था जरूरी है?

सुप्रीम कोर्ट की मौजूदा टिप्पणी का सबसे अहम हिस्सा रोकथाम और जवाबदेही पर है. अदालत ने साफ संकेत दिया कि सार्वजनिक जगहों पर सुरक्षा की कमी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

इसके लिए कुछ बुनियादी चीजें जरूरी हैं-

  • सुनसान इलाकों में पर्याप्त स्ट्रीट लाइट और रोशनी.
  • पार्क, सड़क और सार्वजनिक परिवहन में CCTV और निगरानी.
  • संवेदनशील इलाकों में नियमित पुलिस पेट्रोलिंग.
  • बस, मेट्रो और दूसरे सार्वजनिक परिवहन में सुरक्षा व्यवस्था.
  • अपराध की शिकायत मिलने पर तुरंत पुलिस कार्रवाई.
  • पीड़ित की पहचान और गरिमा की सुरक्षा.
  • जांच में फोरेंसिक और दूसरे वैज्ञानिक सबूतों का सही इस्तेमाल.

सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि अधिकारियों की ओर से केवल चिंता जताना पर्याप्त नहीं है. जरूरी है कि सुरक्षा व्यवस्था में कमियों की पहचान हो और उनके लिए जिम्मेदारी तय की जाए.

पार्क और सार्वजनिक जगहों पर खास ध्यान क्यों?

हालिया मामलों में सार्वजनिक जगहों की सुरक्षा बड़ा मुद्दा बनकर सामने आई है. आस्था कुंज पार्क में 17 साल की लड़की से कथित गैंगरेप का मामला इसी वजह से चर्चा में है. कोर्ट ने ऐसे मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि पार्क और दूसरे सार्वजनिक स्थान लोगों के लिए सुरक्षित होने चाहिए. सिर्फ पार्क ही नहीं, चलती बस में नाबालिग से कथित यौन हमले का मामला भी कोर्ट के सामने आया.

इससे सार्वजनिक परिवहन में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठते हैं. इसलिए रोकथाम की व्यवस्था में केवल पुलिस की संख्या बढ़ाना काफी नहीं होगा. रोशनी, CCTV, पेट्रोलिंग, सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन और तुरंत मदद मिलने की व्यवस्था भी साथ-साथ जरूरी है.

Delhi Ncr Rape Cases

कौन-कौन से केस आए सामने?

2 सितंबर, गुरुग्राम: 61 वर्षीय व्यक्ति पर 5 साल की बच्ची से रेप का आरोप लगा. 2 सितंबर, गाजियाबाद: 14 और 15 साल की दो नाबालिगों से गैंगरेप का आरोप लगा. 3 सितंबर, गाजियाबाद: नौकरी दिलाने का झांसा देकर नाबालिग को होटल ले जाने और गैंगरेप का आरोप लगा. 6 सितंबर, दिल्ली: एक युवती ने नशीला पदार्थ देकर रेप किए जाने का आरोप लगाया. 10 सितंबर, रणहोला: 4 साल की बच्ची ने स्कूल-कैब ड्राइवर पर यौन शोषण का आरोप लगाया. 10 सितंबर, निहाल विहार: 7 साल के बच्चे से पड़ोसी पर यौन शोषण का आरोप लगा. 10 सितंबर, उत्तर दिल्ली: एक नाबालिग लड़की से यौन अपराध का मामला सामने आया. 10 सितंबर, नरेला: 13 साल की छात्रा के अपहरण और रेप का आरोप लगा. 12 सितंबर, स्वरूप नगर: 16 साल की लड़की से कथित गैंगरेप के बाद हत्या का मामला सामने आया. 14 सितंबर, स्वरूप नगर: 9 साल की बच्ची को घर से ले जाकर रेप करने का आरोप लगा. 17 सितंबर, सदर बाजार: 11 साल की छात्रा से दुकान के मालिक पर यौन शोषण का आरोप लगा. सितंबर, गाजियाबाद: फटे कपड़ों में मिली महिला के मामले में गैंगरेप की आशंका जताई गई, लेकिन पुलिस ने रेप की पुष्टि नहीं की थी. 21 सितंबर, कालकाजी: आस्था कुंज पार्क में 17 साल की लड़की से तीन लोगों पर कथित गैंगरेप का आरोप लगा.

अपराध के बाद पीड़ित के साथ कैसा व्यवहार हो?

रेप या यौन हमले के मामले में पुलिस की जिम्मेदारी सिर्फ FIR दर्ज करने तक सीमित नहीं होती. पीड़ित की सुरक्षा, मेडिकल जांच, सबूतों को सुरक्षित रखना और जांच की प्रक्रिया को संवेदनशील तरीके से पूरा करना भी जरूरी है. पीड़ित से ऐसे सवाल या व्यवहार नहीं होना चाहिए जिससे उसे घटना के बाद दोबारा मानसिक परेशानी झेलनी पड़े.

उसकी पहचान और निजी जानकारी की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है. इसी तरह जांच में देरी होने से सबूतों पर असर पड़ सकता है. इसलिए शिकायत के बाद तेजी से कार्रवाई और वैज्ञानिक जांच अपराध की पूरी प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाती है.

अंकिता पाण्डेय

अंकिता पाण्डेय

शिव की नगरी काशी से अपने करियर की शुरुआत करने वाली अंकिता पाण्डेय ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से पत्रकारिता में अपनी मास्टर्स की डिग्री पूरी की है.  पत्रकारिता में आने के लिए उन्होंने बनारस के लोकल न्यूज पेपर "काशीवार्ता" से अपनी शुरुआत की, बाद में दिल्ली जैसे महानगरी का रुख करते हुए उन्होंने TV9 भारतवर्ष में अक्टूबर साल 2023 से जुड़ी. आज वह इस ऑर्गनाइजेशन में बतौर सब-एडिटर काम कर रही हैं. क्राइम, एंटरटेनमेंट और अन्य सभी को न्यूज के साथ विजुअल तरीके से पेश करने में रुचि है. पत्रकारिता के अलावा कविताएं लिखना, फोटोग्राफी करना और म्यूजिक का भी शौक रखती हैं.

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