MLC चुनाव के अगले दिन यानी 24 अक्टूबर को JDU ने मोकामा विधायक अनंत सिंह को पार्टी से बाहर निकाल दिया है। प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा की तरफ से एक्शन लिया गया है। उनके साथ उनकी पत्नी और पूर्व विधायक नीलम देवी की भी सदस्यता रद्द कर दी गई है। साथ ही विध
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एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में पढ़िए, अनंत सिंह को पार्टी से बाहर निकालने की पूरी कहानी...
अपने ऊपर बयानबाजी से खफा थे निशांत
JDU सूत्रों की मानें तो अनंत सिंह को पार्टी से बाहर निकालने में सबसे बड़ी भूमिका नीतीश कुमार के बेटे और स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार की है। निशांत के एक भरोसेमंद नेता ने बताया कि अनंत सिंह ने जिस दिन निशांत कुमार पर बयान दिया था उसी दिन वे उनसे खफा हो गए थे। उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा को उनके खिलाफ सख्त एक्शन लेने की बात कही थी।
दरअसल, अनंत सिंह ने कहा था कि निशांत कुमार को प्रचार में नहीं जाना चाहिए था, क्योंकि यह छोटा चुनाव है और पार्टी का चुनाव नहीं है।
निशांत के बाद नीतीश पर बयान ने बढ़ाई नाराजगी
नीरज के विरोध में अनंत सिंह ने न केवल निशांत पर ही बयान दिया। उन्होंने नीतीश कुमार को लेकर भी बयान दिया। अनंत सिंह ने नीतीश कुमार को लेकर कहा था कि हमने पार्टी के लिए कुर्बानी दी है... किसी ने उतनी कुर्बानी नहीं दी है। नीतीश कुमार के कारण मुझ पर गोली चली 9-9 लोगों का मर्डर हुआ है। इस बयान के बाद राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की किरकिरी हुई।
आखिर में ललन सिंह और नीतीश कुमार की सहमति से एक्शन
पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने अनंत सिंह और नीरज कुमार के विवाद को खत्म करने की जिम्मेदारी पार्टी के सीनियर लीडर और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह को दी थी। तब ललन सिंह ने अनंत सिंह का समर्थन किया था।
उन्होंने कहा कि अनंत सिंह के मामले में पार्टी से भी गलती हुई है। ताली दोनों हाथ से नहीं बजती है। तब उन्होंने कहा था कि वे अनंत सिंह को समझा दिए हैं, पार्टी के खिलाफ बयान नहीं देंगे।
- ललन सिंह के इस बयान के बाद भी अनंत सिंह नहीं रुके। वे लगातार जनसुराज समर्थित प्रत्याशी अनुज सिंह के समर्थन में रोड करते रहे। JDU लीडरशिप के खिलाफ बयान देते रहे।
- 23 अक्टूबर को तो अनंत सिंह को ललन सिंह पर भी तंज कसा था। उन्होंने कहा, ‘वे ललन सिंह को नहीं जानते।' बिहार में 100 ललन सिंह हैं, किसके बारे में पूछ रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा था कि मैं चाहता हूं कि JDU मुझ पर कार्रवाई करे।
- इसके बाद 24 अक्टूबर को ललन सिंह दिल्ली से पटना पहुंचे। यहां उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व सीएम नीतीश कुमार के साथ करीब 20 मिनट बैठक की। इसके बाद अनंत सिंह पर एक्शन की सहमति बन गई।

पटना में अनंत सिंह ने पार्टी लाइन से हटकर जनसुराज के प्रत्याशी को लेकर प्रचार किया।
सहानुभूति का फायदा अनुज को न मिल जाए इसलिए चुनाव तक इंतजार
अनंत सिंह पर एक्शन की सहमति 15 अक्टूबर को हो मिल गई थी, लेकिन लीडरशिप चुनाव तक इंतजार करते रहा कि कहीं इस एक्शन का फायदा अनंत सिंह समर्थित उम्मीदवार अनुज सिंह को चुनाव में फायदा न मिल जाए। अनंत सिंह पर कार्रवाई का सहानुभूति वोट उन्हें न मिल जाए। यही कारण है कि कार्रवाई के लिए चुनाव खत्म होने का इंतजार किया गया।
…तो क्या अनंत सिंह की जाएगी विधायकी?
इसका अभी सीधा जवाब देना मुश्किल है। अब यह मामला विधानसभा से होते हुए हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट तक जा सकता है।
विधान परिषद चुनाव में पार्टी के कैंडिडेट नीरज कुमार के खिलाफ प्रचार करने वाले अनंत सिंह पर बिहार JDU अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने उनको संगठन या पार्टी से निकाला है। लेकिन अभी उनका यह फैसला सिर्फ पार्टी संगठन के स्तर पर लागू होगा।
यानी विधानसभा के अंदर कुशवाहा का फैसला मान्य नहीं होगा। इस पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार फैसला लेंगे। अगर फैसला अनंत सिंह के खिलाफ गया तो वह कोर्ट जा सकते हैं।

24 अक्टूबर की दोपहर से अनंत सिंह के आवास पर मिठाई बन रही थी। इसी बीच शाम में पार्टी ने कार्रवाई कर दी।
दरअसल, दल-बदल विरोधी कानून (संविधान की 10वीं अनुसूची) और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के मुताबिक, विधायकों की सदस्यता 6 कारणों से जा सकती है…
1. अपनी इच्छा से पार्टी छोड़ने पर
कानून में अपनी इच्छा से पार्टी छोड़ने को सदस्यता खत्म करने का प्रमुख आधार बताया गया है। इसका मतलब सिर्फ औपचारिक रूप से पार्टी से इस्तीफा देना नहीं है। इसका दायरा उससे कहीं ज्यादा बड़ा है।
अगर कोई सांसद या विधायक औपचारिक रूप से पार्टी से इस्तीफा नहीं देता है, तब भी उसके व्यवहार और गतिविधियों से निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि उसने इच्छा से पार्टी की सदस्यता छोड़ दी है।
उदाहरण- 2017 में जनता दल यूनाइटेड (JDU) के शरद यादव और अनवर अली की सदस्यता राज्यसभा के सभापति ने इस आधार पर खत्म कर दी थी कि उन्होंने कई सार्वजनिक मंचों पर पार्टी की आलोचना की थी। विपक्षी दलों की रैलियों में भी हिस्सा लिया था।
यही नियम अनंत सिंह की विधायकी को फंसा सकता है। हालांकि, अगर अनंत सिंह की विधायकी खत्म हुई तो वह इस फैसले को कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं।
2. पार्टी के निर्देशों का उल्लंघन करना
अगर कोई सांसद या विधायक सदन में अपनी पार्टी के निर्देश के खिलाफ मतदान करता है या मतदान से अनुपस्थित रहता है, तो उसे अयोग्य ठहराया जा सकता है।
यह नियम तभी लागू होता है, जब पार्टी ने उसे मतदान के संबंध में कोई निर्देश दिया हो। इस निर्देश को आम तौर पर 'पार्टी व्हिप' कहा जाता है।
अनंत सिंह पर यह नियम अभी लागू नहीं होगा। यह तब लागू होगा जब बिहार विधानसभा के सत्र के दौरान किसी बिल पर वोटिंग हो और JDU व्हिप जारी करे। उस व्हिप का अनंत सिंह उल्लंघन करें।

7 सितंबर को JDU ऑफिस में अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच सुलह कराने को लेकर पार्टी के सीनियर नेताओं ने दोनों के साथ बैठक की थी।
3. निर्दलीय सदस्य के किसी पार्टी में शामिल होने पर
अगर कोई व्यक्ति निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतता है और बाद में किसी राजनीतिक दल में शामिल हो जाता है, तो उसे अयोग्य घोषित किया जा सकता है।
हालांकि, अनंत सिंह पर यह नियम लागू नहीं होता। क्योंकि वह ऑलरेडी पार्टी के सिंबल पर चुने गए हैं।
4. मनोनीत सदस्य के छह महीने बाद किसी पार्टी में शामिल होने पर
अगर कोई मनोनीत सांसद या विधायक सदन का सदस्य बनने के छह महीने बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल होता है, तो उसे अयोग्य घोषित किया जा सकता है।
जबकि, अनंत सिंह लोगों के वोट से नवंबर 2025 में विधानसभा चुनकर पहुंचे हैं। यह नियम राज्यपाल कोटे से मनोनीत विधान पार्षदों पर लागू होता है।
5. संवैधानिक रूप से अयोग्य होने पर
संविधान के ऑर्टिकल-191(1) के तहत…
- लाभ का पद: यदि विधायक सरकार के तहत किसी ऐसे 'लाभ के पद' पर हो, जिसे कानूनन छूट न मिली हो।
- मानसिक रूप से अस्वस्थ: यदि अदालत उसे मानसिक रूप से अस्वस्थ घोषित कर दें।
- दिवालियापन: यदि वह दिवालिया घोषित हो जाए।
- नागरिकता छोड़ दे: यदि वह अपनी इच्छा से किसी दूसरे देश की नागरिकता ले लें।
6. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951
इस कानून की धारा 8 के तहत आपराधिक मामलों और चुनावी अपराधों के आधार पर सदस्यता रद्द होती है…
- 2 साल या उससे अधिक की सजा: यदि किसी आपराधिक मामले में 2 साल या उससे अधिक की सजा हो जाए। इसके अलावा सजा पूरी होने के बाद अगले 6 साल तक वह चुनाव लड़ने के लिए भी अयोग्य रहता है।
- चुनावी भ्रष्ट आचरण: चुनाव में भ्रष्ट आचरण (जैसे-रिश्वत देना, धर्म/जाति के नाम पर वोट मांगना, चुनाव खर्च की गलत जानकारी देना) का दोषी पाए जाने पर।
2022 में भी गई थी अनंत सिंह की विधायकी
अगर अनंत सिंह की विधायकी जाती है तो ये दूसरी मर्तबा होगा जब वे अपनी विधायकी का टर्म पूरा नहीं कर पाएंगे। इससे पहले 2022 में भी अनंत सिंह की विधायकी गई थी। तब अनंत सिंह के घर से AK-47 मिलने के मामले में उन्हें 10 साल की सजा हुई थी। सजा होने के बाद जुलाई 2022 में उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द हुई थी।
तब मोकामा में हुए उपचुनाव में उनकी पत्नी नीलम देवी विधायक बनी थी।हाईकोर्ट ने उनकी सजा को रद्द कर दिया था। इसके बाद 2025 में वे चुनाव जीते।