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देवीलाल गुप्ता | संतकबीर नगर1 घंटे पहले
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सरयू नदी के बढ़े जलस्तर ने 20 गांवों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
संतकबीरनगर में सरयू नदी के बढ़े जलस्तर ने तहसील क्षेत्र के 20 गांवों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नदी और महातटबंध के बीच बसे गांवों में बाढ़ का पानी घुसने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। कई गांवों के रास्ते जलमग्न होने से लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बाढ़ का असर अब बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ने लगा है। मांझा क्षेत्र के नौ परिषदीय विद्यालयों में पानी भरने के बाद उन्हें बंद कर दिया गया है। इससे इन स्कूलों में पढ़ने वाले 800 से अधिक छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हुई है।
हालांकि सरयू का जलस्तर अब घटने लगा है, लेकिन गांवों से बाढ़ का पानी पूरी तरह नहीं निकला है। ग्रामीण अभी भी पानी से घिरे हुए हैं और राहत-बचाव व्यवस्था को लेकर सवाल उठा रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से पर्याप्त संख्या में नाव उपलब्ध कराने की मांग की है।

9 स्कूलों में भरा पानी, 800 से ज्यादा बच्चे प्रभावित
बाढ़ के कारण हँसर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय धमचिया, सियर कला, गायघाट दक्षिणी, भौवापार, कठहा खैरगाड़, केवटहिया और उच्च प्राथमिक विद्यालय गायघाट दक्षिणी समेत नौ परिषदीय विद्यालय प्रभावित हुए हैं। स्कूल परिसरों में पानी भरने के कारण यहां पढ़ाई बंद करनी पड़ी है।
खंड शिक्षा अधिकारी हँसर ज्ञान प्रकाश मिश्र ने बताया कि बाढ़ के कारण नौ विद्यालय बंद हो गए हैं। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए जल्द ही वैकल्पिक व्यवस्था करने का प्रयास किया जा रहा है।

ग्रामीण बोले- पर्याप्त नावें नहीं, बचाव कार्य में लापरवाही
गायघाट दक्षिणी के ग्रामीणों का आरोप है कि बाढ़ के बीच प्रशासन की ओर से पर्याप्त नावों की व्यवस्था नहीं की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि बचाव कार्य को लेकर कई बार जानकारी देने के बावजूद अपेक्षित मदद नहीं मिल रही है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से प्रभावित गांवों में अतिरिक्त नावें उपलब्ध कराने और जरूरतमंद परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाने की मांग की है।

'बाढ़ ने रोजी-रोटी छीनी, अब बच्चों की पढ़ाई भी रुकी'
गायघाट निवासी प्रभुनाथ यादव, रामशंकर यादव, हरिकेश यादव, राम प्रसाद चौहान और अनिरुद्ध समेत ग्रामीणों ने बताया कि बाढ़ के कारण रोजमर्रा का काम प्रभावित हुआ है। खेतों और आसपास के इलाकों में पानी भरने से उनकी आजीविका पर असर पड़ा है।
ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ का पानी घटने लगा है, लेकिन अभी हालात सामान्य नहीं हुए हैं। ऐसे में प्रशासन को राहत और बचाव कार्य तेज करने के साथ बच्चों की पढ़ाई जल्द शुरू कराने की व्यवस्था करनी चाहिए।
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