पर्यावरण संरक्षण, प्रकृति प्रेम और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए बरौनी के प्राथमिक विद्यालय पिपरा देवस (उर्दू) में इको क्लब फॉर मिशन लाइफ (Mission LiFE) के तहत जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें छात्र-छात्रा
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उद्देश्य- प्रकृति प्रेम और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास
पूरे अभियान का मूल उद्देश्य केवल पौधरोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों के बाल-मन में प्रकृति के प्रति संवेदना और जिम्मेदारी का भाव जगाना है। विद्यालय प्रबंधन का मानना है कि यदि स्कूली स्तर पर ही बच्चों में पर्यावरण संरक्षण के संस्कार डाल दिए जाएं, तो वे भविष्य में एक जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनेंगे। कार्यक्रम के दौरान मुख्य उद्देश्यों पर बच्चों को प्रेरित किया गया।

जमा किए गए पौधे।
प्रकृति से भावनात्मक जुड़ाव
इस दौरान बच्चों को पेड़-पौधों और पर्यावरण के महत्व को समझाते हुए प्रकृति प्रेम विकसित करने के लिए प्रेरित किया गया। बताया गया कि पर्यावरण की रक्षा को केवल सरकार या प्रशासन का काम न मानकर इसे अपना सामाजिक कर्तव्य समझना है। रोजमर्रा की आदतों में बदलाव लाकर पृथ्वी के प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग करना है।
दैनिक जीवन में बदलाव और पर्यावरण संरक्षण का संदेश
कार्यक्रम के दौरान स्वस्थ और पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने के व्यावहारिक उपाय बताए। पर्यावरण असंतुलन के दुष्परिणामों से अवगत कराया गया। कम से कम कचरा उत्पन्न करने और सिंगल यूज प्लास्टिक से दूरी बनाने का संकल्प दिलाया गया। इलेक्ट्रॉनिक्स कचरे के सुरक्षित निपटान के साथ बिजली और जल संरक्षण की जानकारी साझा की गई।
एक पेड़ मां के नाम
अभियान को व्यावहारिक रूप देने के लिए एक पेड़ मां के नाम पहल चलाई गई, जो बेहद सफल और भावनात्मक साबित हुई। इस मुहिम से प्रेरित होकर विद्यालय के छात्र-छात्राएं अपने-अपने घरों से छोटे-छोटे पौधे लाकर योगदान देने पहुंचे। इसके साथ ही शिक्षकों के सहयोग से भी कई पौधे उपलब्ध कराए गए। जमा 200 से अधिक पौधे विद्यालय परिसर और आसपास के सुरक्षित स्थानों पर लगाए जाएंगे।
कुशल मार्गदर्शन और शिक्षकों का सहयोग
इस जागरूकता अभियान और कार्यक्रम का आयोजन विद्यालय के हेड मास्टर सत्येन्द्र कुमार मिश्रा के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। वहीं, कार्यक्रम के सुचारू संचालन और संयोजन में इको क्लब के सदस्य व सहयोगी शिक्षक रितेश कुमार की मुख्य भूमिका रही। शिक्षकों का मानना है कि बच्चों का यह छोटा सा प्रयास भविष्य में पर्यावरण संतुलन के क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने का काम करेगा।