- Hindi News
- Local
- Mp
- Indore
- The Plot Was Sold After Changing Its Name, With A 2013 Stamp In The 2002 Registry.
इंदौर6 मिनट पहले
- कॉपी लिंक

रियल एस्टेट हब इंदौर में जमीन-प्लॉट हथियाने के लिए फर्जी दस्तावेज और सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर का नया खेल सामने आया है। भास्कर पड़ताल में ऐसे मामले सामने आए, जिनमें कहीं जमीन मालिक के रिकॉर्ड में दर्ज गलत नाम का फायदा उठाकर कथित फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार की गई, तो कहीं 2002 की रजिस्ट्री में 2013 के स्टाम्प लगे मिले।
एक मामले में मालिक की जानकारी के बिना निगम में नामांतरण कर संपत्तिकर खाता खोल दिया गया। कुछ मामलों में अधिकारियों की लॉगिन आईडी का इस्तेमाल कर रात के समय 354 खातों के नाम बदले गए। शिव विलास पैलेस के पास पुराने पंजीयन रिकॉर्ड में भी गड़बड़ी सामने आई थी। पड़ताल से पता चलता है कि जमीन की पावर, रजिस्ट्री, नामांतरण और सरकारी रिकॉर्ड की हर कड़ी में सेंध की गुंजाइश जालसाज तलाश रहे हैं।
केस-1 : 2013 की कथित पावर से 2024 में रजिस्ट्री- कोर्डिया बर्डी गांव में 5 हजार वर्गफीट जमीन की मूल खरीदार तृप्ता अरोरा का नाम रजिस्ट्री में गलती से ‘प्रीतम सिंह अरोरा’ दर्ज हो गया। यही नाम राजस्व रिकॉर्ड और ऋण पुस्तिका में भी चढ़ गया। रिकॉर्ड सुधार के लिए आम मुख्तयार नियुक्त किया गया। आरोप है कि 2013 की कथित नोटरी से तैयार पावर ऑफ अटॉर्नी में दूसरे व्यक्ति ने खुद को अधिकृत बताया।
केस-2 : केस 2022 तक चला, रजिस्ट्री 2002 में कैसे- बिलावली की जमीन को लेकर निर्मला बाई ने 2007 में अल्पना तिवारी से एग्रीमेंट किया था। दोनों पक्षों के बीच लंबे समय तक केस चला। 2021 में अल्पना की मौत के बाद उनके पति प्रदीप से समझौता हुआ और निर्मला को जमीन का कब्जा मिल गया। कुछ समय बाद निर्मला बाहर गईं तो कुछ लोग जमीन पर कब्जा लेने पहुंच गए।
सिस्टम की कमजोर कड़ियां
- आम मुख्तयारनामा सिर्फ संपत्ति संबंधी कार्रवाई का अधिकार देता है। पावर की वैधता और मूल स्वामित्व दस्तावेजों का मिलान जरूरी है।
- संपत्तिकर खाते में नाम दर्ज होना स्वामित्व का अंतिम प्रमाण नहीं, लेकिन गलत एंट्री आगे की रजिस्ट्री का आधार बन सकती है।
- मूल दस्तावेज, इंडेक्स और अंगूठा पंजी में छेड़छाड़ होने पर असली रिकॉर्ड की पहचान मुश्किल हो जाती है।
- 354 खातों के मामले में अधिकारियों की लॉगिन आईडी से नाम बदले जाने की जांच हुई। हर बदलाव का डिजिटल ऑडिट ट्रेल जरूरी है।
- एफआईआर के बाद कागज, स्याही, सील, हस्ताक्षर, अंगूठे के निशान और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच से फर्जीवाड़े की कड़ी सामने आ सकती है।
भास्कर एक्सपर्ट - प्रमोद द्विवेदी/ पं. देवी प्रसाद शर्मा, वरिष्ठ अभिभाषक
खाली या बगैर कब्जे वाली जमीनों पर नजरें
इंदौर में विवादित या खाली पड़ी जमीनों को निशाना बनाकर पुराने टाइटल खोजे जाते हैं और उनके आधार पर फर्जी दस्तावेज तैयार होने की आशंका है। इसमें रिकॉर्ड कीपर-कर्मचारियों की मिलीभगत की भी आशंका रहती है। विभाग को पुराने मामलों में सतर्कता और सिस्टम की कमजोर कड़ियां दूर करनी होंगी।
.