Raniganj Assembly Caste Equations में ब्राह्मण मतदाता सबसे प्रभावशाली सामाजिक समूहों में गिने जाते हैं। इनके साथ पिछड़ा वर्ग, क्षत्रिय, मुस्लिम, यादव और अनुसूचित जाति मतदाता चुनावी संतुलन बनाते हैं। पुराने सामाजिक आकलनों में ब्राह्मण मतदाता करीब 80 हजार बताए गए थे, जबकि OBC का व्यापक आधार करीब 60 हजार माना गया। 2026 की अंतिम मतदाता सूची में रानीगंज विधानसभा का वास्तविक वोटर बेस 3,12,723 है।

रानीगंज विधानसभा संख्या 250 है और यह प्रतापगढ़ लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। सीट सामान्य श्रेणी की है। वर्तमान विधायक समाजवादी पार्टी के राकेश कुमार वर्मा उर्फ डॉ. आर.के. वर्मा हैं। 2022 में उन्होंने भाजपा के अभय कुमार उर्फ धीरज ओझा को सिर्फ 2,649 वोट से हराया था। 2024 लोकसभा चुनाव में इसी विधानसभा खंड में SP की BJP पर बढ़त बढ़कर 14,840 वोट हो गई। इससे 2027 में SP को शुरुआती राजनीतिक बढ़त दिखाई देती है, लेकिन रानीगंज का जातिगत समीकरण और पुराना चुनावी इतिहास मुकाबले को खुला रखता है।

उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों के चुनावी परिणाम काफी हद तक जटिल जातिगत समीकरणों और ‘सोशल इंजीनियरिंग’ पर निर्भर करते हैं, जिन्हें आगामी 2027 के चुनाव की दिशा तय करने में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।

राज्य के सभी 75 जिलों में चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) के तहत मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन किया गया है, जिससे कुल मतदाताओं की संख्या में बदलाव दर्ज हुआ हैं।

प्रतापगढ़ जिले के   रानीगंज विधानसभा के 2012 से 2022 तक का तुलनात्मक विश्लेषण में बदलाव दर्ज हुआ है। उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों के 2007 से 2022 तक के चुनावी इतिहास, विजेता-उपविजेता प्रत्याशियों और मत प्रतिशत के तुलनात्मक विश्लेषण के लिए मदद ली जा सकती है।

रानीगंज विधानसभा एक नजर में

विवरणजानकारी
विधानसभारानीगंज
विधानसभा संख्या250
जिलाप्रतापगढ़
लोकसभा क्षेत्रप्रतापगढ़
आरक्षणसामान्य
वर्तमान विधायकराकेश कुमार वर्मा उर्फ डॉ. आर.के. वर्मा
पार्टीसमाजवादी पार्टी
2026 कुल मतदाता3,12,723
SIR से पहले वोटर बेस3,49,979
SIR में मतदाता कमी37,256
कमी10.65%
2022 विजेताराकेश कुमार वर्मा, SP
2022 उपविजेताअभय कुमार उर्फ धीरज ओझा, BJP
2022 जीत का अंतर2,649 वोट
2024 लोकसभा खंड में SP वोट85,038
2024 BJP वोट70,198
2024 BSP वोट18,640
2024 SP की BJP पर बढ़त14,840 वोट
प्रमुख सामाजिक समूहब्राह्मण, OBC, क्षत्रिय, मुस्लिम, यादव, SC

2026 की अंतिम मतदाता सूची में प्रतापगढ़ जिले की सात विधानसभा सीटों पर कुल 21,75,863 मतदाता हैं। इनमें रानीगंज के 3,12,723 वोटर हैं। जिले में विश्वनाथगंज और पट्टी के बाद रानीगंज तीसरे सबसे बड़े मतदाता आधार वाली सीट है।

Raniganj Assembly Caste Equations: ब्राह्मण वोट सबसे बड़ी चुनावी धुरी

Raniganj Assembly Caste Equations की सबसे स्पष्ट विशेषता ब्राह्मण मतदाताओं का प्रभाव है। पुराने चुनावी विश्लेषण में रानीगंज को ऐसी सीट बताया गया है जहां ब्राह्मण वोट किसी भी प्रमुख प्रत्याशी की जीत-हार तय करने की क्षमता रखता है। एक पुराने विस्तृत अनुमान में करीब 80 हजार ब्राह्मण मतदाता बताए गए थे।

इसके साथ OBC का व्यापक सामाजिक आधार भी बड़ा है। पुराने अनुमानों में पिछड़ा वर्ग करीब 60 हजार बताया गया। मुस्लिम, क्षत्रिय, यादव और अनुसूचित जाति मतदाता इस मुख्य समीकरण को संतुलित करते हैं।

2022 में SP ने कुर्मी समाज से आने वाले राकेश कुमार वर्मा को उम्मीदवार बनाया और सिर्फ 2,649 वोट से सीट जीती। विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में उनकी जाति पिछड़ी, कुर्मी क्षत्रिय दर्ज है। यह परिणाम बताता है कि OBC नेतृत्व के साथ SP ब्राह्मण, मुस्लिम, यादव, दलित और दूसरे समुदायों का पर्याप्त हिस्सा जोड़ने में सफल रही।

रानीगंज विधानसभा का संकेतात्मक जातिगत समीकरण

पुराने चुनावी आकलनों में रानीगंज की सामाजिक संरचना अलग-अलग तरीके से दर्ज हुई है। एक पुराने विस्तृत प्रोफाइल में निम्न अनुमान दिए गए थे:

जाति/समुदायपुराना संकेतात्मक अनुमान
ब्राह्मणकरीब 80,000
पिछड़ा वर्ग / OBCकरीब 60,000
क्षत्रियकरीब 50,000
मुस्लिमकरीब 40,000
यादवकरीब 20,000
अनुसूचित जातिपुराने दूसरे आकलन में करीब 45,000
अन्य समुदायशेष मतदाता
2026 आधिकारिक कुल वोटर3,12,723

एक नए स्थानीय राजनीतिक आकलन में भी ब्राह्मण मतदाता करीब 80 हजार बताए गए, लेकिन यादव और अन्य OBC के अनुमानों में पुराने आंकड़ों से अंतर है। इसलिए किसी एक अनुमान को वर्तमान जातिवार मतदाता सूची मानना सही नहीं होगा।

महत्वपूर्ण: निर्वाचन नामावली जाति के आधार पर प्रकाशित नहीं होती। ऊपर दिए गए आंकड़े केवल पुराने राजनीतिक-सामाजिक अनुमान हैं। अलग-अलग श्रेणियों में OBC और यादव जैसे समूह ओवरलैप भी कर सकते हैं, इसलिए इन्हें जोड़कर कुल मतदाता संख्या निकालना उचित नहीं है।

रानीगंज वोटर लिस्ट 2026 में 3,12,723 मतदाता

2027 के चुनावी गणित का सबसे महत्वपूर्ण नया आधार 2026 की अंतिम मतदाता सूची है।

SIR के बाद रानीगंज विधानसभा में 3,12,723 मतदाता रह गए हैं। मतदाता संख्या में 37,256 की कमी, यानी करीब 10.65 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई। इस हिसाब से पुनरीक्षण से पहले वोटर बेस लगभग 3,49,979 था।

मतदाता सूचीसंख्या
SIR से पहले वोटर बेस3,49,979
2026 अंतिम मतदाता3,12,723
शुद्ध कमी37,256
कमी10.65%

37 हजार से अधिक मतदाताओं का यह बदलाव 2022 के सिर्फ 2,649 वोट के जीत अंतर और 2024 के 14,840 वोट के SP-BJP अंतर—दोनों से काफी बड़ा है।

इसका अर्थ यह नहीं है कि हटे मतदाता किसी एक जाति या पार्टी से जुड़े थे। ऐसी कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। लेकिन 2027 में पुराने बूथवार हिसाब को नई मतदाता सूची के अनुसार दोबारा तैयार करना सभी दलों के लिए जरूरी होगा।

ब्राह्मण वोट पर BJP और SP दोनों की नजर

रानीगंज में ब्राह्मण मतदाता संख्या और राजनीतिक नेतृत्व—दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण रहे हैं।

2012 में SP के प्रो. शिवाकांत ओझा ने सीट जीती थी। 2017 में BJP के अभय कुमार उर्फ धीरज ओझा विजयी हुए। इससे पता चलता है कि ब्राह्मण नेतृत्व ने अलग-अलग चुनावों में SP और BJP दोनों के लिए मजबूत आधार बनाया है।

2022 में स्थिति बदली। SP ने OBC चेहरे राकेश कुमार वर्मा को मैदान में उतारा, जबकि BJP ने अपने मौजूदा ब्राह्मण विधायक धीरज ओझा को दोबारा टिकट दिया। मुकाबला बेहद करीबी रहा और SP ने 2,649 वोट से सीट जीत ली।

2027 में BJP के लिए ब्राह्मण वोट को एकजुट रखना महत्वपूर्ण होगा। वहीं SP को यह साबित करना होगा कि उसका OBC नेतृत्व ब्राह्मण और दूसरे सवर्ण मतदाताओं में भी पर्याप्त स्वीकार्यता बनाए रख सकता है।

OBC और कुर्मी वोट SP के लिए क्यों महत्वपूर्ण?

रानीगंज के मौजूदा विधायक राकेश कुमार वर्मा कुर्मी समुदाय से हैं। पुराने सामाजिक आकलनों में व्यापक OBC आधार करीब 60 हजार बताया गया है।

2022 में SP को 75,583 वोट मिले। यह संख्या किसी एक OBC समुदाय से कहीं अधिक है। इसलिए जीत को केवल कुर्मी या पिछड़े वोट से जोड़ना सही नहीं होगा।

SP के लिए 2027 का सबसे महत्वपूर्ण फॉर्मूला OBC आधार को बनाए रखते हुए मुस्लिम, यादव, दलित और सवर्ण मतदाताओं का हिस्सा जोड़ना होगा।

BJP की रणनीति इसके उलट गैर-यादव OBC और कुर्मी मतदाताओं में SP की बढ़त कम करने पर केंद्रित हो सकती है।

मुस्लिम वोट का बड़ा चुनावी असर

रानीगंज विधानसभा में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या भी महत्वपूर्ण मानी जाती रही है। पुराने सामाजिक अनुमान में करीब 40 हजार मुस्लिम वोटर बताए गए थे।

सीट के चुनावी इतिहास में मुस्लिम उम्मीदवारों ने भी महत्वपूर्ण प्रदर्शन किया है। 2012 में BSP के मंशा अहमद को 50,472 वोट मिले थे, जबकि 2017 में BSP के शकील अहमद खान 58,022 वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे।

2022 में AIMIM उम्मीदवार अनिल कुमार को 11,748 वोट मिले। यह संख्या SP की 2,649 वोट की जीत से चार गुना से भी अधिक थी।

इसलिए 2027 में मुस्लिम वोट कितना एकजुट रहता है और किस दल की ओर जाता है, यह सीधे परिणाम को प्रभावित कर सकता है।

दलित और BSP वोट भी नजरअंदाज नहीं किए जा सकते

रानीगंज में BSP का चुनावी इतिहास मजबूत रहा है।

2002 और 2007 में पार्टी ने लगातार सीट जीती। 2012 में वह दूसरे स्थान पर रही और 2017 में भी BSP के शकील अहमद खान को 58,022 वोट मिले।

2022 में BSP का वोट घटकर 21,411 रह गया।

चुनावBSP वोट
विधानसभा 201250,472
विधानसभा 201758,022
विधानसभा 202221,411
लोकसभा 2024, रानीगंज खंड18,640

BSP का वोट घटने से हाल के चुनावों में BJP-SP मुकाबला ज्यादा सीधा हुआ है। लेकिन करीब 15-20 हजार वोट वाला तीसरा दल भी करीबी सीट पर परिणाम बदल सकता है।

यदि BSP 2027 में दलित के साथ मुस्लिम या OBC वोट वापस जोड़ती है तो मुकाबला फिर त्रिकोणीय हो सकता है।

रानीगंज विधानसभा चुनाव 2022: सिर्फ 2,649 वोट से जीती SP

2022 विधानसभा चुनाव रानीगंज के सबसे करीबी मुकाबलों में रहा।

SP के राकेश कुमार वर्मा को 75,583 वोट मिले, जबकि BJP के अभय कुमार उर्फ धीरज ओझा को 72,934 वोट मिले। BSP के अजय यादव को 21,411 और AIMIM प्रत्याशी को 11,748 वोट मिले।

SP की जीत का अंतर सिर्फ 2,649 वोट रहा।

प्रत्याशीपार्टीवोटवोट प्रतिशत
राकेश कुमार वर्माSP75,58340.05%
अभय कुमार उर्फ धीरज ओझाBJP72,93438.65%
अजय यादवBSP21,41111.35%
अनिल कुमारAIMIM11,7486.23%
NOTA1,1390.60%
SP की जीत2,649

SP और BJP के बीच वोट शेयर का अंतर सिर्फ करीब 1.4 प्रतिशत अंक था। यही वजह है कि 2027 में प्रत्याशी चयन और छोटे सामाजिक वोट ब्लॉक भी बेहद महत्वपूर्ण होंगे।

2012 से 2022 तक लगातार बदला रानीगंज का चुनावी रंग

रानीगंज किसी एक पार्टी की सुरक्षित सीट नहीं रही है।

2012 में SP जीती, 2017 में BJP ने सीट छीन ली और 2022 में SP ने फिर वापसी की।

चुनावविजेतापार्टीवोटजीत का अंतर
2012प्रो. शिवाकांत ओझाSP63,07612,604
2017अभय कुमार उर्फ धीरज ओझाBJP67,0319,009
2022राकेश कुमार वर्माSP75,5832,649

जीत का अंतर लगातार घटा है—2012 में 12,604, 2017 में 9,009 और 2022 में सिर्फ 2,649 वोट।

यह ट्रेंड रानीगंज को 2027 की सबसे प्रतिस्पर्धी सीटों में रखता है।

2017 में BJP ने 9,009 वोट से जीती थी सीट

2017 में BJP के अभय कुमार उर्फ धीरज ओझा को 67,031 वोट मिले। BSP के शकील अहमद खान को 58,022 और SP के प्रो. शिवाकांत ओझा को 37,816 वोट मिले।

2017 प्रत्याशीपार्टीवोट
अभय कुमार उर्फ धीरज ओझाBJP67,031
शकील अहमद खानBSP58,022
प्रो. शिवाकांत ओझाSP37,816
BJP की जीत9,009

2017 में विपक्षी वोट SP और BSP में बंटा था। 2022 में SP ने अपना वोट लगभग दोगुना किया और सीट पलट दी।

2012 में SP-BSP का सीधा मुकाबला

2012 विधानसभा चुनाव में SP के प्रो. शिवाकांत ओझा को 63,076 वोट मिले। BSP के मंशा अहमद 50,472 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे।

SP ने 12,604 वोट से सीट जीती।

2012 प्रत्याशीपार्टीवोट
प्रो. शिवाकांत ओझाSP63,076
मंशा अहमदBSP50,472
लक्ष्मी नारायण पांडेयBJP16,779
SP की जीत12,604

2012, 2017 और 2022 के नतीजों से साफ है कि रानीगंज में SP, BJP और BSP तीनों अलग-अलग समय पर मजबूत रहे हैं।

2024 लोकसभा चुनाव में SP को 14,840 वोट की बढ़त

2024 लोकसभा चुनाव रानीगंज के 2027 वाले चुनावी गणित का सबसे महत्वपूर्ण नया संकेत देता है।

प्रतापगढ़ लोकसभा क्षेत्र के रानीगंज विधानसभा खंड में SP के शिवपाल सिंह पटेल को 85,038 वोट मिले। BJP के संगम लाल गुप्ता को 70,198 और BSP को 18,640 वोट मिले।

SP की BJP पर बढ़त 14,840 वोट रही।

2024 लोकसभा: रानीगंज विधानसभा खंडवोटवोट प्रतिशत
SP85,03846.70%
BJP70,19838.55%
BSP18,64010.24%
SP की BJP पर बढ़त14,840

2022 में SP की विधानसभा बढ़त सिर्फ 2,649 वोट थी। 2024 में विधानसभा खंड स्तर पर यह अंतर 14,840 हो गया।

दोनों चुनावों की प्रकृति और उम्मीदवार अलग थे, इसलिए इसे 2027 का सीधा स्विंग नहीं माना जा सकता। फिर भी SP के लिए यह बड़ा सकारात्मक संकेत है।

2019 से 2024 में कैसे बदला लोकसभा ट्रेंड?

2019 लोकसभा चुनाव में रानीगंज विधानसभा खंड में BJP को 80,118 वोट मिले थे। BSP को 73,914 और JDL को 6,767 वोट मिले।

BJP उस समय BSP से 6,204 वोट आगे थी।

2024 में SP 85,038 वोट लेकर पहले स्थान पर पहुंची और BJP से 14,840 वोट आगे हो गई।

लोकसभा चुनावपहले स्थान की पार्टीवोटBJP वोटराजनीतिक अंतर
2019BJP80,11880,118BJP +6,204 बनाम BSP
2024SP85,03870,198SP +14,840

यह बदलाव दिखाता है कि विपक्षी वोट का बड़ा हिस्सा 2024 तक SP के पीछे अधिक संगठित हो गया।

2022 से 2024 में SP-BJP का अंतर कैसे बदला?

चुनावSP वोटBJP वोटअंतर
विधानसभा 202275,58372,934SP +2,649
लोकसभा 202485,03870,198SP +14,840

दोनों चुनावों के बीच SP-BJP का सापेक्ष अंतर 12,191 वोट बढ़ा।

यह बदलाव विपक्ष के लिए सकारात्मक है, लेकिन लोकसभा और विधानसभा की अलग चुनावी परिस्थितियों के कारण इसे सीधे 2027 की भविष्यवाणी नहीं माना जाना चाहिए।

BJP के लिए 2027 में वापसी का रास्ता

BJP की सबसे बड़ी ताकत रानीगंज में मजबूत ब्राह्मण और सवर्ण आधार है। 2017 की जीत और 2022 में सिर्फ 2,649 वोट से हार बताती है कि पार्टी का संगठन कमजोर नहीं है।

2027 में BJP के लिए तीन प्रमुख लक्ष्य होंगे—ब्राह्मण मतदाताओं को एकजुट रखना, OBC और कुर्मी मतदाताओं में SP की बढ़त कम करना और दलित वोट का बड़ा हिस्सा हासिल करना।

अगर पार्टी इन तीनों आधारों को जोड़ती है तो 2024 की 14,840 वोट की दूरी विधानसभा चुनाव में काफी कम हो सकती है।

SP के लिए 2027 का अवसर

SP के पास मौजूदा विधायक और लगातार दो चुनावी बढ़त का फायदा है।

2022 विधानसभा चुनाव में पार्टी 2,649 वोट से जीती और 2024 लोकसभा चुनाव में रानीगंज खंड से 14,840 वोट आगे रही।

मौजूदा विधायक का कुर्मी-OBC आधार भी SP के लिए महत्वपूर्ण है। लेकिन 2022 की बेहद छोटी जीत बताती है कि पार्टी केवल पिछले परिणाम के भरोसे नहीं रह सकती।

उसके लिए OBC + यादव + मुस्लिम + दलित हिस्सेदारी को बनाए रखते हुए ब्राह्मण और दूसरे सवर्ण मतदाताओं में स्वीकार्यता बढ़ाना जरूरी होगा।

BSP 2027 का तीसरा महत्वपूर्ण फैक्टर

रानीगंज में BSP को केवल तीसरे स्थान की पार्टी मानना चुनावी इतिहास को नजरअंदाज करना होगा।

2002 और 2007 में BSP ने सीट जीती। 2012 और 2017 में वह दूसरे स्थान पर रही। 2022 में पार्टी का वोट घटा, लेकिन फिर भी 21,411 वोट मिले।

2024 में BSP 18,640 वोट पर रही।

2022 में BJP-SP का अंतर सिर्फ 2,649 वोट था। इसलिए BSP के 15-20 हजार वोट में छोटा बदलाव भी मुख्य मुकाबले का परिणाम बदल सकता है।

2026 की नई मतदाता सूची क्यों महत्वपूर्ण?

रानीगंज में SIR के बाद 37,256 मतदाता कम हुए हैं।

तुलनासंख्या
2026 SIR में वोटर कमी37,256
2022 SP जीत का अंतर2,649
2024 SP-BJP अंतर14,840

मतदाता सूची में हुआ बदलाव पिछले दोनों प्रमुख चुनावी अंतर से बड़ा है।

इसलिए 2027 में नई सूची के अनुसार बूथ मैनेजमेंट, समर्थक मतदाताओं की पहचान और मतदान प्रतिशत निर्णायक होंगे। पुराने 2022 के बूथ डेटा को सीधे लागू करना पर्याप्त नहीं होगा।

स्थानीय मुद्दे भी बदल सकते हैं जातिगत वोट

रानीगंज के चुनावी विमर्श में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और स्थानीय विकास से जुड़े मुद्दे लगातार सामने आते रहे हैं। अतिक्रमण और खराब सड़कों की समस्या भी पुराने चुनावी प्रोफाइल में प्रमुख स्थानीय मुद्दों में गिनी गई थी।

ये मुद्दे किसी एक जाति तक सीमित नहीं हैं। अगर 2027 का मुकाबला 2022 की तरह करीबी रहा तो स्थानीय विधायक के कामकाज और उम्मीदवार की उपलब्धता जैसे सवाल कुछ हजार मतदाताओं की दिशा बदल सकते हैं।

2027 में किन फैक्टरों से तय होगा रानीगंज चुनाव?

चुनावी फैक्टरसंभावित प्रभाव
ब्राह्मण वोटसीट की सबसे प्रभावशाली सामाजिक धुरियों में
कुर्मी/OBC वोटमौजूदा SP नेतृत्व की प्रमुख ताकत
मुस्लिम वोटविपक्षी गठजोड़ में महत्वपूर्ण
यादव वोटSP के सामाजिक आधार का हिस्सा
दलित वोटBSP-SP-BJP के बीच बड़ा स्विंग फैक्टर
क्षत्रिय वोटसवर्ण चुनावी संतुलन में महत्वपूर्ण
BSP का प्रदर्शनमुकाबले को दोतरफा या त्रिकोणीय बना सकता है
प्रत्याशी चयनब्राह्मण-OBC वोट ट्रांसफर पर सीधा असर
2024 में SP की बढ़तSP के लिए सकारात्मक संकेत
2026 नई वोटर सूचीबूथवार पुराने गणित में बड़ा बदलाव
स्थानीय मुद्देजातिगत सीमाओं से बाहर वोट प्रभावित कर सकते हैं

रानीगंज विधानसभा में फिलहाल कौन आगे?

हालिया चुनावी नतीजों के आधार पर समाजवादी पार्टी को मामूली शुरुआती बढ़त मानी जा सकती है।

पार्टी ने 2022 विधानसभा चुनाव जीता और 2024 लोकसभा चुनाव में भी रानीगंज खंड से BJP पर 14,840 वोट की बढ़त बनाई।

लेकिन 2022 की जीत सिर्फ 2,649 वोट की थी। इससे स्पष्ट है कि सीट SP के लिए सुरक्षित नहीं है।

BJP के पास मजबूत ब्राह्मण-सवर्ण आधार और 2017 की जीत का संगठनात्मक नेटवर्क है। BSP का 15-20 हजार वोट और उम्मीदवार चयन दोनों मुख्य दलों के समीकरण को बदल सकते हैं।

इसलिए 2027 में टिकट घोषित होने के बाद ही रानीगंज की वास्तविक चुनावी तस्वीर अधिक स्पष्ट होगी।

रानीगंज विधानसभा के जातिगत समीकरण और 2027 का चुनावी निष्कर्ष

रानीगंज विधानसभा के जातिगत समीकरण में ब्राह्मण वोट सबसे प्रभावशाली सामाजिक आधारों में गिना जाता है। पुराने विस्तृत आकलन में ब्राह्मण करीब 80 हजार, व्यापक OBC करीब 60 हजार, क्षत्रिय 50 हजार और मुस्लिम करीब 40 हजार बताए गए थे। यादव और अनुसूचित जाति मतदाताओं के पुराने अलग-अलग अनुमानों में अंतर मिलता है, इसलिए इन्हें 2026 की आधिकारिक जातिवार संख्या नहीं माना जाना चाहिए।

2026 की अंतिम मतदाता सूची में रानीगंज का वास्तविक वोटर बेस 3,12,723 है। SIR में 37,256 मतदाताओं की कमी, यानी 10.65 प्रतिशत बदलाव ने पुराने बूथवार और सामाजिक गणित को भी प्रभावित किया है।

राजनीतिक रूप से SP फिलहाल आगे दिखाई देती है। 2022 में पार्टी सिर्फ 2,649 वोट से जीती थी, लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव में उसकी रानीगंज खंड बढ़त बढ़कर 14,840 वोट हो गई।

2027 में SP का संभावित सामाजिक फॉर्मूला कुर्मी/OBC + यादव + मुस्लिम + दलित हिस्सेदारी रहेगा। BJP के लिए ब्राह्मण-सवर्ण + गैर-यादव OBC + दलित समर्थन को मजबूत करना जरूरी होगा। BSP यदि अपने पुराने दलित-मुस्लिम या OBC आधार में वापसी करती है तो मुकाबला फिर तीनतरफा हो सकता है।

करीब 3.13 लाख मतदाताओं वाली रानीगंज विधानसभा का अंतिम नतीजा ब्राह्मण वोट की दिशा, OBC-कुर्मी समर्थन, मुस्लिम और दलित वोट के बंटवारे, उम्मीदवार चयन तथा 2026 की नई मतदाता सूची के बाद बने बूथवार जातिगत समीकरण से तय होने की संभावना है।

  • समाचार संपादन, ब्रेकिंग अलर्ट और फैक्ट-चेक पर फ़ोकस। ज़मीनी रिपोर्टों को डेटा के साथ जोड़ना पसंद। कॉफ़ी, डेडलाइन और सत्य , तीनों से समझौता नहीं।

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