Gorakhpur Rural Assembly Caste Equations गोरखपुर जिले की इस मिश्रित शहरी-ग्रामीण सीट का ऐसा चुनावी सामाजिक गणित सामने रखते हैं, जहां निषाद, दलित, मुस्लिम, यादव, ब्राह्मण, व्यापारी वर्ग, सैंथवार, क्षत्रिय और दूसरे पिछड़े समुदायों की महत्वपूर्ण मौजूदगी है। पुराने चुनावी अनुमानों में निषाद और दलित वोट को सबसे अहम आधारों में गिना गया, जबकि मुस्लिम मतदाता भी बड़ी संख्या में बताए गए। यही वजह है कि गोरखपुर ग्रामीण का जातिगत समीकरण किसी एक समुदाय पर निर्भर नहीं रहता।
2026 की आधिकारिक मतदाता सूची के अनुसार गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा में 3,82,880 मतदाता हैं। इनमें 2,05,992 पुरुष, 1,76,868 महिला और 20 ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल हैं। यह आंकड़ा 10 अप्रैल 2026 की अंतिम मतदाता सूची पर आधारित है।
गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा संख्या 323 है। 2022 के चुनाव में भाजपा के बिपिन सिंह ने 1,26,376 वोट हासिल कर सीट जीती थी। समाजवादी पार्टी के विजय बहादुर यादव को 1,02,306 वोट मिले और जीत का अंतर 24,070 वोट रहा।
उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों के चुनावी परिणाम काफी हद तक जटिल जातिगत समीकरणों और ‘सोशल इंजीनियरिंग’ पर निर्भर करते हैं, जिन्हें आगामी 2027 के चुनाव की दिशा तय करने में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।
राज्य के सभी 75 जिलों में चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) के तहत मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन किया गया है, जिससे कुल मतदाताओं की संख्या में बदलाव दर्ज हुआ हैं।
गोरखपुर जिले के गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा के 2012 से 2022 तक का तुलनात्मक विश्लेषण में बदलाव दर्ज हुआ है। उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों के 2007 से 2022 तक के चुनावी इतिहास, विजेता-उपविजेता प्रत्याशियों और मत प्रतिशत के तुलनात्मक विश्लेषण के लिए मदद ली जा सकती है।
गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| विधानसभा | गोरखपुर ग्रामीण |
| विधानसभा संख्या | 323 |
| जिला | गोरखपुर |
| लोकसभा क्षेत्र | गोरखपुर |
| आरक्षण | सामान्य |
| वर्तमान विधायक | बिपिन सिंह |
| पार्टी | भाजपा |
| 2026 कुल मतदाता | 3,82,880 |
| पुरुष मतदाता | 2,05,992 |
| महिला मतदाता | 1,76,868 |
| ट्रांसजेंडर मतदाता | 20 |
| 2022 विजेता | बिपिन सिंह |
| 2022 विजेता के वोट | 1,26,376 |
| 2022 उपविजेता | विजय बहादुर यादव |
| 2022 उपविजेता के वोट | 1,02,306 |
| 2022 जीत का अंतर | 24,070 |
| प्रमुख सामाजिक समूह | निषाद, दलित, मुस्लिम, यादव, ब्राह्मण, व्यापारी व अन्य OBC |
Gorakhpur Rural Assembly Caste Equations: निषाद, दलित और मुस्लिम बड़े सामाजिक आधार
Gorakhpur Rural Assembly Caste Equations के पुराने चुनावी आकलन में करीब 3.95 लाख मतदाताओं के बीच निषाद और दलित वोटों को सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण बताया गया था। पुराने अनुमान में निषाद मतदाता करीब 80 हजार बताए गए थे। उसी आकलन में दलित और निषाद को मिलाकर करीब 1.55 लाख, मुस्लिम करीब 1.30 लाख, ब्राह्मण करीब 40 हजार, व्यापारी करीब 40 हजार और क्षत्रिय करीब 5 हजार बताए गए थे।
हालांकि दूसरे विस्तृत चुनावी आकलन में अलग जातिगत तस्वीर मिलती है। 2017 के संदर्भ में यादव करीब 40 हजार, मुस्लिम करीब 75 हजार, ब्राह्मण 30 हजार, निषाद 75 हजार, दलित 60 हजार, क्षत्रिय 15 हजार, सैंथवार 15 हजार और अन्य पिछड़े वर्ग के करीब 52 हजार मतदाता बताए गए थे।
दोनों पुराने आंकड़ों में स्पष्ट अंतर है। इसलिए इन्हें 2026 की आधिकारिक जाति-वार मतदाता सूची नहीं माना जाना चाहिए। ये केवल सीट के पुराने चुनावी सामाजिक प्रभाव का संकेत देते हैं।
गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा का संकेतात्मक जातिगत समीकरण
| जाति/समुदाय | पुराने चुनावी अनुमान |
|---|---|
| निषाद | करीब 75-80 हजार |
| दलित | करीब 60 हजार |
| मुस्लिम | अलग-अलग अनुमानों में करीब 75 हजार से 1.30 लाख |
| यादव | करीब 40 हजार |
| ब्राह्मण | करीब 30-40 हजार |
| व्यापारी वर्ग | करीब 40 हजार का पुराना अनुमान |
| अन्य पिछड़ा वर्ग | करीब 52 हजार का एक पुराना अनुमान |
| क्षत्रिय | करीब 5-15 हजार |
| सैंथवार | करीब 15 हजार का पुराना अनुमान |
| 2026 कुल मतदाता | 3,82,880 |
पुराने जातिगत अनुमानों को जोड़कर 2026 की कुल मतदाता संख्या से मिलाना उचित नहीं है। अलग-अलग आकलन अलग समय, पद्धति और सामाजिक वर्गीकरण के आधार पर तैयार किए गए थे। नई मतदाता सूची में जाति-वार बदलाव का सार्वजनिक आधिकारिक डेटा उपलब्ध नहीं है।
निषाद वोट गोरखपुर ग्रामीण के जातिगत समीकरण की बड़ी धुरी
गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा में निषाद मतदाताओं की भूमिका लंबे समय से चुनावी चर्चा में रही है। पुराने आकलनों में उनकी संख्या करीब 75 से 80 हजार के बीच बताई गई। यह उन्हें सीट के सबसे बड़े अलग सामाजिक समूहों में रखता है।
निषाद राजनीति का असर पिछले चुनावों में उम्मीदवार चयन में भी दिखाई दिया है। 2017 में अलग निषाद उम्मीदवारों ने उल्लेखनीय वोट हासिल किए थे, जबकि 2022 में बसपा और कांग्रेस दोनों ने निषाद पृष्ठभूमि के उम्मीदवार उतारे। 2022 में बसपा के दारा सिंह निषाद को 15,982 वोट मिले और कांग्रेस के देवेंद्र निषाद को 1,492 वोट मिले।
इन आंकड़ों से साफ है कि निषाद वोट किसी एक दल के साथ स्थायी रूप से नहीं जुड़ा माना जा सकता।
दलित वोट भी मजबूत सामाजिक आधार
पुराने चुनावी अनुमान में गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा में दलित मतदाताओं की संख्या करीब 60 हजार बताई गई थी। एक दूसरे पुराने अनुमान में निषाद और दलित को मिलाकर करीब 1.55 लाख मतदाताओं का बड़ा सामाजिक आधार बताया गया था।
दलित वोट सीट पर बसपा सहित दूसरे दलों की चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। लेकिन पिछले चुनावों में दलित मतों का पूरा हिस्सा किसी एक राजनीतिक दल के साथ गया हो, ऐसा आधिकारिक जाति-वार मतदान डेटा उपलब्ध नहीं है।
2027 में दलित मतदाताओं की भूमिका निषाद, मुस्लिम, यादव और अन्य OBC समूहों के साथ बनने वाले सामाजिक गठजोड़ पर भी निर्भर करेगी।
मुस्लिम मतदाता क्यों रहते हैं चर्चा में?
गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या को लेकर पुराने अनुमानों में बड़ा अंतर है। एक पुराने विश्लेषण में संख्या करीब 1.30 लाख बताई गई, जबकि दूसरे 2017 आधारित अनुमान में करीब 75 हजार मुस्लिम मतदाता बताए गए।
यह अंतर बताता है कि जाति और धर्म आधारित चुनावी आंकड़ों को सावधानी से पढ़ना जरूरी है।
फिर भी सीट के कई शहरी और अर्धशहरी हिस्सों में मुस्लिम मतदाताओं की मजबूत मौजूदगी है। 2022 में AIMIM उम्मीदवार मोहम्मद इस्लाम को 3,519 वोट मिले थे, लेकिन केवल किसी मुस्लिम उम्मीदवार के वोट से समुदाय का कुल मतदान व्यवहार नहीं समझा जा सकता।
यादव वोट और समाजवादी पार्टी का पुराना आधार
पुराने चुनावी अनुमान में यादव मतदाताओं की संख्या करीब 40 हजार बताई गई थी। 2012, 2017 और 2022 के चुनावों में विजय बहादुर यादव इस सीट पर प्रमुख राजनीतिक चेहरा रहे हैं।
2022 में समाजवादी पार्टी के विजय बहादुर यादव को 1,02,306 वोट मिले थे, जो पुराने यादव मतदाता अनुमान से ढाई गुना से ज्यादा है। इसका मतलब है कि उनका समर्थन केवल यादव मतदाताओं तक सीमित नहीं था।
इसी तरह भाजपा के विजेता बिपिन सिंह को 1.26 लाख से अधिक वोट मिले। दोनों प्रमुख उम्मीदवारों के वोट बताते हैं कि जातिगत आधार के साथ व्यापक सामाजिक समर्थन यहां जरूरी है।
ब्राह्मण और व्यापारी मतदाता भी महत्वपूर्ण
गोरखपुर ग्रामीण के पुराने जातिगत आंकड़ों में ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या करीब 30 से 40 हजार के बीच बताई गई है। एक पुराने आकलन में व्यापारी वर्ग को भी करीब 40 हजार बताया गया था।
गोरखपुर ग्रामीण नाम होने के बावजूद यह सीट पूरी तरह ग्रामीण नहीं है। इसके कई हिस्सों का सामाजिक और आर्थिक चरित्र शहरी तथा अर्धशहरी है। इसलिए व्यापार, सड़क, बिजली, जलनिकासी, आवासीय विस्तार और नगर सेवाएं भी मतदान व्यवहार में भूमिका निभाती हैं।
यही विशेषता गोरखपुर ग्रामीण के जातिगत समीकरण को जिले की पूरी तरह ग्रामीण सीटों से अलग बनाती है।
गोरखपुर ग्रामीण वोटर लिस्ट 2026: कुल 3,82,880 मतदाता
10 अप्रैल 2026 की अंतिम मतदाता सूची के अनुसार गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा में कुल 3,82,880 मतदाता हैं। इनमें 2,05,992 पुरुष, 1,76,868 महिला और 20 ट्रांसजेंडर मतदाता हैं।
गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा वोटर लिस्ट 2026
| मतदाता वर्ग | संख्या |
|---|---|
| पुरुष | 2,05,992 |
| महिला | 1,76,868 |
| ट्रांसजेंडर | 20 |
| कुल मतदाता | 3,82,880 |
2022 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर कुल निर्वाचक करीब 4,19,269 थे। 2026 की सूची में यह आधार घटकर 3.83 लाख के करीब रह गया है।
मतदाता संख्या में इस बदलाव को किसी खास जाति या राजनीतिक दल से जोड़ना उचित नहीं होगा। SIR के बाद कौन से सामाजिक समूह में कितने मतदाता जुड़े या हटे, उसका सार्वजनिक जाति-वार आधिकारिक डेटा उपलब्ध नहीं है।
2022 में बिपिन सिंह को मिले 1,26,376 वोट
2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के बिपिन सिंह ने 1,26,376 वोट, यानी करीब 49.59 प्रतिशत मत हासिल किए। समाजवादी पार्टी के विजय बहादुर यादव को 1,02,306 वोट, यानी करीब 40.14 प्रतिशत मत मिले। जीत का अंतर 24,070 वोट रहा।
गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा चुनाव 2022
| प्रत्याशी | पार्टी | वोट | वोट प्रतिशत |
|---|---|---|---|
| बिपिन सिंह | भाजपा | 1,26,376 | 49.59% |
| विजय बहादुर यादव | समाजवादी पार्टी | 1,02,306 | 40.14% |
| दारा सिंह निषाद | बसपा | 15,982 | 6.27% |
| मोहम्मद इस्लाम | AIMIM | 3,519 | 1.38% |
| देवेंद्र निषाद महाराज | कांग्रेस | 1,492 | 0.59% |
| जीत का अंतर | — | 24,070 | — |
मुख्य दो उम्मीदवारों ने मिलकर करीब 90 प्रतिशत मत हासिल किए। 2017 की तुलना में 2022 में मुकाबला भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच ज्यादा केंद्रित दिखाई दिया।
2017 में जीत का अंतर सिर्फ 4,410 वोट था
2017 में भाजपा के बिपिन सिंह ने 83,686 वोट हासिल किए थे। समाजवादी पार्टी के विजय बहादुर यादव को 79,276 वोट मिले। जीत का अंतर केवल 4,410 वोट था।
उस चुनाव में संजय कुमार निषाद को 34,901 और बसपा के राजेश पांडेय को 30,097 वोट मिले थे। इस वजह से मुकाबला बहुकोणीय रहा और तीसरे-चौथे उम्मीदवार को मिले वोट परिणाम के अंतर की तुलना में काफी बड़े थे।
गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा चुनाव 2017
| प्रत्याशी | पार्टी | वोट |
|---|---|---|
| बिपिन सिंह | भाजपा | 83,686 |
| विजय बहादुर यादव | समाजवादी पार्टी | 79,276 |
| संजय कुमार निषाद | — | 34,901 |
| राजेश पांडेय | बसपा | 30,097 |
| जीत का अंतर | — | 4,410 |
2017 और 2022 की तुलना बताती है कि पांच साल में भाजपा का जीत का अंतर 4,410 से बढ़कर 24,070 वोट हो गया।
2012 में विजय बहादुर यादव ने जीती थी सीट
2012 में भाजपा के विजय बहादुर यादव ने 58,849 वोट हासिल कर गोरखपुर ग्रामीण सीट जीती थी। समाजवादी पार्टी के जफर अमीन डक्कू को 41,864 और बसपा के रामभुआल निषाद को 41,338 वोट मिले थे। कांग्रेस की काजल निषाद को 17,636 वोट मिले थे।
2012 से 2022 तक चुनावी तस्वीर
| वर्ष | विजेता | पार्टी | विजेता के वोट | प्रमुख प्रतिद्वंद्वी |
|---|---|---|---|---|
| 2012 | विजय बहादुर यादव | भाजपा | 58,849 | जफर अमीन डक्कू |
| 2017 | बिपिन सिंह | भाजपा | 83,686 | विजय बहादुर यादव |
| 2022 | बिपिन सिंह | भाजपा | 1,26,376 | विजय बहादुर यादव |
यह चुनावी इतिहास दिखाता है कि उम्मीदवार और पार्टी दोनों का समीकरण समय के साथ बदला है। विजय बहादुर यादव 2012 में भाजपा से जीते, जबकि बाद के चुनावों में समाजवादी पार्टी से मुख्य प्रतिद्वंद्वी बने।
जातिगत समीकरण के बावजूद शहरी मुद्दों का बढ़ता असर
गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा की विशेषता यह है कि यहां ग्रामीण और शहरी दोनों तरह के क्षेत्र आते हैं। पुराने चुनावी विश्लेषण में भी इस सीट के मतदाताओं के बीच विकास के मुद्दों को जातिगत समीकरण के समानांतर महत्वपूर्ण बताया गया था।
सड़क, जलनिकासी, शहर से कनेक्टिविटी, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे मुद्दे यहां सीधे मतदाताओं को प्रभावित करते हैं।
गोरखपुर ग्रामीण के प्रमुख चुनावी मुद्दे
| मुद्दा | चुनावी संदर्भ |
|---|---|
| सड़क | ग्रामीण और शहरी हिस्सों की कनेक्टिविटी |
| जलनिकासी | तेजी से बढ़ती आबादी वाले क्षेत्रों की समस्या |
| बिजली | घरेलू और कारोबारी दोनों जरूरत |
| रोजगार | युवा मतदाताओं का प्रमुख सवाल |
| शिक्षा | शहरी विस्तार के साथ संस्थानों की मांग |
| स्वास्थ्य | स्थानीय चिकित्सा सुविधाओं की जरूरत |
| ट्रैफिक | शहर से जुड़े इलाकों में दबाव |
| नगर सेवाएं | बढ़ती कॉलोनियों में बुनियादी सुविधाएं |
| कृषि | बाहरी ग्रामीण हिस्सों में किसान मुद्दे |
यही वजह है कि गोरखपुर ग्रामीण में केवल जातिगत गणित के आधार पर मतदान व्यवहार को समझना पर्याप्त नहीं है।
निषाद-दलित-मुस्लिम समीकरण कितना महत्वपूर्ण?
पुराने चुनावी विश्लेषण में निषाद और दलित मतदाताओं को मिलाकर करीब 1.55 लाख और मुस्लिम मतदाताओं को करीब 1.30 लाख बताया गया था। हालांकि दूसरे अनुमान इन संख्याओं को काफी कम बताते हैं।
इस अंतर के बावजूद तीनों सामाजिक समूहों की चुनावी भूमिका महत्वपूर्ण है।
अगर किसी दल को निषाद, दलित और मुस्लिम वोटों में बड़ी हिस्सेदारी मिलती है तो सामाजिक गठजोड़ मजबूत हो सकता है, लेकिन पिछले चुनाव परिणाम बताते हैं कि यादव, ब्राह्मण, व्यापारी और दूसरे OBC मतदाताओं का समर्थन भी परिणाम तय करने में अहम रहता है।
2024 लोकसभा चुनाव में मुकाबला और ज्यादा करीब
2024 के लोकसभा चुनाव में गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा खंड में भाजपा उम्मीदवार को 1,13,300 वोट और समाजवादी पार्टी उम्मीदवार को 1,10,208 वोट मिले। दोनों के बीच अंतर केवल 3,092 वोट रहा।
यह 2022 विधानसभा चुनाव के 24,070 वोट के अंतर से काफी कम है।
हालांकि लोकसभा और विधानसभा चुनावों की परिस्थितियां अलग होती हैं, इसलिए इस परिणाम को 2027 की सीधी भविष्यवाणी नहीं माना जा सकता। फिर भी यह बताता है कि गोरखपुर ग्रामीण में अलग चुनाव और उम्मीदवार के साथ मुकाबले की प्रकृति तेजी से बदल सकती है।
2027 में गोरखपुर ग्रामीण के जातिगत समीकरण की प्रमुख धुरियां
2027 के चुनावी विश्लेषण में गोरखपुर ग्रामीण की सामाजिक संरचना को कई हिस्सों में देखना होगा।
| 2027 चुनावी पहलू | स्थिति |
|---|---|
| निषाद वोट | प्रमुख OBC सामाजिक आधार |
| दलित वोट | बड़ा सामाजिक समूह |
| मुस्लिम मतदाता | महत्वपूर्ण शहरी-अर्धशहरी मौजूदगी |
| यादव वोट | प्रभावी OBC आधार |
| ब्राह्मण | उल्लेखनीय सवर्ण मतदाता |
| व्यापारी वर्ग | शहरी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण |
| अन्य OBC | कई छोटे-बड़े सामाजिक समूह |
| 2026 कुल वोटर बेस | 3,82,880 |
| 2022 जीत का अंतर | 24,070 |
| 2024 लोकसभा खंड अंतर | 3,092 |
| प्रमुख मुद्दे | विकास, रोजगार, सड़क, जलनिकासी, नगर सेवाएं |
2027 का वास्तविक जातिगत समीकरण टिकट वितरण, राजनीतिक गठबंधन और चुनाव के समय की परिस्थितियों के बाद ही साफ होगा।
पुराने जातिगत आंकड़ों में अंतर क्यों?
गोरखपुर ग्रामीण के उपलब्ध पुराने सामाजिक आंकड़ों में मुस्लिम, दलित और अन्य सामाजिक समूहों की संख्या को लेकर बड़ा अंतर है।
एक अनुमान में मुस्लिम मतदाता करीब 1.30 लाख बताए गए, जबकि दूसरे में 75 हजार। इसी तरह एक जगह दलित और निषाद मिलाकर 1.55 लाख बताए गए, जबकि दूसरे विस्तृत आकलन में निषाद 75 हजार और दलित 60 हजार बताए गए थे।
इसका कारण अलग सर्वे पद्धति, समय और सामाजिक वर्गीकरण हो सकता है।
इसीलिए 2027 के लिए इन आंकड़ों को निश्चित वोटर संख्या के बजाय पुराने चुनावी संकेत के रूप में देखना ज्यादा उचित है।
2026 की नई वोटर लिस्ट से बदला पुराना आधार
2022 में गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा में कुल मतदाताओं की संख्या करीब 4,19,269 थी। 2026 की अंतिम सूची में यह घटकर 3,82,880 रह गई।
| समय | कुल मतदाता |
|---|---|
| 2022 चुनावी आधार | करीब 4,19,269 |
| 2026 अंतिम मतदाता सूची | 3,82,880 |
| अंतर | करीब 36,389 कम |
इस बदलाव का सीधा अर्थ यह नहीं है कि सभी जातियों की संख्या समान अनुपात में कम हुई है। जाति-वार नेट बदलाव का आधिकारिक सार्वजनिक डेटा उपलब्ध नहीं है।
इसलिए पुराने जातिगत अनुमानों को 2026 वोटर संख्या के अनुपात में घटाकर नई जाति-वार संख्या निकालना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा।
उत्तर प्रदेश के 403 विधानसभा के जातिगत समीकरण और UP Elections 2027
उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों के जातिगत समीकरण अलग-अलग सामाजिक संरचना, स्थानीय राजनीतिक इतिहास और उम्मीदवारों के आधार पर बनते हैं। पूर्वांचल में निषाद, यादव, कुर्मी, सैंथवार, मौर्य-कुशवाहा, दलित, ब्राह्मण, ठाकुर और मुस्लिम समुदायों का प्रभाव सीट-दर-सीट बदलता है।
उत्तर प्रदेश के 403 विधानसभा के जातिगत समीकरण और UP Elections 2027 से जुड़े सीटवार सामाजिक आंकड़े, चुनावी गणित और राजनीतिक अपडेट के लिए X पर @CasteEquations — https://x.com/CasteEquations को फॉलो किया जा सकता है।
गोरखपुर ग्रामीण का चुनावी गणित: जाति के साथ शहरीकरण भी बड़ा फैक्टर
गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा के जातिगत समीकरण में पुराने अनुमानों के अनुसार निषाद करीब 75-80 हजार, दलित करीब 60 हजार, यादव 40 हजार और ब्राह्मण करीब 30-40 हजार बताए गए हैं। मुस्लिम मतदाताओं को लेकर पुराने अनुमानों में 75 हजार से 1.30 लाख तक का बड़ा अंतर है। ये आंकड़े आधिकारिक 2026 जाति-वार मतदाता संख्या नहीं हैं।
2026 में कुल मतदाता संख्या 3,82,880 है। 2022 में बिपिन सिंह को 1,26,376 और विजय बहादुर यादव को 1,02,306 वोट मिले थे। जीत का अंतर 24,070 वोट था। 2024 के लोकसभा चुनाव में इसी विधानसभा खंड का अंतर घटकर केवल 3,092 वोट रह गया।
इसलिए 2027 में गोरखपुर ग्रामीण का चुनावी गणित केवल निषाद, दलित, मुस्लिम या यादव वोट से तय नहीं होगा। नई वोटर लिस्ट, तेजी से बढ़ता शहरी चरित्र, उम्मीदवारों की स्थानीय पकड़, विकास, रोजगार, सड़क और जलनिकासी जैसे मुद्दे तथा विभिन्न सामाजिक समूहों के वास्तविक मतदान व्यवहार को साथ रखकर ही सीट की पूरी राजनीतिक तस्वीर समझी जा सकेगी।
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