13 अक्टूबर 2026, बेंगलुरु: कर्नाटक में सूखा राहत की पहली किस्त जारी करने का आदेश, 217 तालुकों के किसानों को मिलेगा फायदा – कर्नाटक सरकार ने सूखे से जूझ रहे किसानों के लिए राहत की पहली किस्त जारी करने का फैसला कर लिया है। उप मुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने बुधवार को बताया कि इसके लिए सरकारी आदेश जारी हो चुका है, और जिलों के उपायुक्तों को राशि तुरंत वितरित करने के निर्देश दिए जाएंगे।

राज्य सरकार ने यह भी साफ किया कि वह केंद्र से मदद का इंतजार नहीं करेगी। पहली किस्त राज्य सरकार अपने ही संसाधनों से किसानों को देगी, जबकि केंद्र की गाइडलाइन के मुताबिक प्रभावित किसानों को प्रति हेक्टेयर 8,500 रुपये तक की राहत का प्रावधान है।

तालुकों की संख्या बढ़कर 217

राज्य के करीब 240 तालुकों में से अब तक 217 को सूखाग्रस्त घोषित किया जा चुका है। बाकी 23 तालुकों में अभी जमीनी जांच चल रही है, और अधिकारियों के मुताबिक आगे 10 से 15 और तालुक इस सूची में जुड़ सकते हैं।

पिछले महीने 25 सितंबर को विधानसभा में जब यह राहत पहली बार घोषित हुई थी, तब राज्य में 177 तालुक सूखाग्रस्त घोषित हुए थे और करीब 46 से 50 लाख किसानों को 2,500 रुपये प्रति किसान की एकमुश्त इनपुट सब्सिडी देने की बात कही गई थी। तब से तालुकों की संख्या में बड़ा इजाफा हुआ है और अब असल भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो रही है।

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सरकार के मुताबिक राज्य की करीब 90 प्रतिशत फसलें इस सूखे से प्रभावित हुई हैं, और सिंचित क्षेत्रों में भी नुकसान देखा गया है। कुल अनुमानित नुकसान करीब 46 हजार करोड़ रुपये आंका गया है।

केंद्र से मांगी गई बड़ी मदद

राज्य सरकार ने केंद्र को दो अलग-अलग ज्ञापन सौंपे हैं, जिनमें करीब 11 हजार से 11,500 करोड़ रुपये की सहायता मांगी गई है। हालांकि अब तक केंद्र सरकार की ओर से कोई राशि जारी नहीं हुई है।

इसी बीच राज्य सरकार ने बैंकों को भी निर्देश दिया है कि सूखा-प्रभावित तालुकों में किसान क्रेडिट कार्ड और कृषि ऋण की वसूली को स्थगित किया जाए। साथ ही ऋण पुनर्गठन की दिशा में भी कदम उठाने को कहा गया है।

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने इस मुद्दे पर कहा है कि सूखे की इस स्थिति में किसानों को संभालना सरकार की जिम्मेदारी है। राज्य सरकार ने यह भी कहा है कि कर्ज माफी और ब्याज माफी जैसी मांगों पर बाद में अलग से समीक्षा की जाएगी।

किसान संगठनों का कहना है कि पहली किस्त जल्द खातों में पहुंचे, क्योंकि रबी सीजन की बुवाई का समय नजदीक है और बीज-खाद के लिए किसानों को तुरंत पैसे की जरूरत है।

राज्य के कृषि विभाग के मुताबिक इस साल राज्य में औसतन करीब 36 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज हुई है, जिसका सबसे ज्यादा असर उत्तर और मध्य कर्नाटक के जिलों में देखा गया है। कई इलाकों में बोरवेल और तालाब सूख जाने से सिंचाई वाली फसलों पर भी संकट खड़ा हो गया है।

सरकार ने सूखे की गंभीरता के आधार पर तालुकों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा है। जिन तालुकों में नुकसान ज्यादा है, वहां किसान क्रेडिट कार्ड और कृषि ऋण की वसूली पर 60 महीने तक की मोहलत मिलेगी, जबकि मध्यम असर वाले तालुकों में यह अवधि 36 महीने और बाकी में 12 महीने रखी गई है।

पेयजल संकट से निपटने के लिए सरकार ने अलग से 117 करोड़ रुपये जारी किए हैं, और विधायकों के माध्यम से 189 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राहत भी दी गई है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में राहत पैकेज में चारे और पशुपालन से जुड़ी मदद भी जोड़ी जा सकती है।

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