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शिक्षक कभी सेवानिवृत्त नहीं होता। उसकी जिम्मेदारी का दायरा भले ही बदल जाए, लेकिन बच्चों के प्रति उसका स्नेह और समाज के प्रति उसकी संवेदना उम्र और पद की सीमाओं से परे होती है। महासमुंद की शासकीय आशीबाई गोलछा कन्या उच्चतर माध्यमिक शाला में ऐसा ही एक प्रेरक उदाहरण देखने को मिला, जहां पूर्व माध्यमिक विभाग की सेवानिवृत्त शिक्षिका चंचला गुप्ता ने यह साबित किया कि सेवा की भावना पद के साथ समाप्त नहीं होती।

सेवानिवृत्ति के बाद भी विद्यालय और बच्चों से उनका जुड़ाव बना हुआ है। बच्चों को मध्याह्न भोजन के लिए घर से थाली लेकर स्कूल न आना पड़े। उनकी इस छोटी-सी परेशानी को श्रीमती गुप्ता ने अपनी बड़ी जिम्मेदारी समझा। उन्होंने विद्यालय के प्राथमिक और माध्यमिक विभाग के विद्यार्थियों के लिए 222 नग थालियां भेंट कर दीं। यह महज थालियों का दान नहीं। यह बच्चों की सुविधा को समझने और उनकी जरूरत को अपना मानने की सोच है। थालियां मिलने की खुशी बच्चों के चेहरों पर साफ दिखाई दी। उनके लिए यह उपहार उपयोगी वस्तु नहीं। यह अपनी शिक्षिका के स्नेह और अपनत्व का अहसास भी था। अवसर को गुप्ता ने बच्चों के साथ खुशियां बांटने का भी बनाया। उन्होंने विद्यार्थियों को जलेबी-पकौड़े का नाश्ता कराया। उन्होंने मध्याह्न भोजन में न्योता भोज भी कराया। सेवानिवृत्त शिक्षिका और बच्चों के बीच आत्मीयता का यह दृश्य विद्यालय के लिए यादगार बन गया।

सिर्फ सुविधा नहीं, प्रतिभाओं को भी दिया सम्मान: गुप्ता की संवेदनशीलता बच्चों की मूलभूत सुविधाओं तक सीमित नहीं रही। उन्होंने शिक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए पूर्व माध्यमिक विभाग में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार प्रदान किए। उन्होंने विद्यालय के लिए प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स भी भेंट किया, ताकि विद्यार्थियों को आवश्यकता पड़ने पर प्राथमिक उपचार की सुविधा मिल सके। विद्यालय परिवार ने कहा, अनुकरणीय है यह सेवा प्राचार्य जीआर सिन्हा, प्रधान पाठक (माध्यमिक) जीएल साहू और प्रधान पाठक (प्राथमिक) डेमेश्वरी गजेंद्र ने गुप्ता के सेवा कार्य की सराहना की। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद भी बच्चों के प्रति उनका स्नेह और विद्यालय के प्रति लगाव अनुकरणीय है। बच्चों की सुविधा, शिक्षा, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक प्रतिभाओं को ध्यान में रखकर किया गया उनका सहयोग निश्चित रूप से अन्य लोगों को भी प्रेरणा देगा। इस अवसर पर चंचला गुप्ता ने भावुक होकर कहा कि शिक्षक का रिश्ता नौकरी तक सीमित नहीं होता।