
गुजरात के प्राइमरी स्कूलों की रिपोर्ट.
Gandhinagar News: गुजरात के प्राथमिक शिक्षा विभाग में 2,000 से अधिक एक-शिक्षक स्कूलों को लेकर बड़ा प्रशासनिक घमासान छिड़ गया है. केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की हालिया UDISE+ (यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस) 2025-26 रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि राज्य के 2,335 प्राथमिक स्कूल महज एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं. रिपोर्ट सामने आने के बाद गुजरात शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारियों (DPEOs) और प्रशासनिक अधिकारियों (AOs) को कारण बताओ नोटिस जारी किया. “प्रशासनिक विफलता, आलस्य और कर्तव्य में लापरवाही” का आरोप लगाया था.
अब अधिकारियों ने सरकार को करारा जवाब देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि उनके पास शिक्षकों का आंतरिक तबादला या प्रतिस्थापन करने का कोई प्रशासनिक अधिकार ही नहीं है. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, UDISE+ रिपोर्ट जारी होने के बाद प्राथमिक शिक्षा निदेशक (DPE) ने मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act, 2009) और ‘गुजरात सिविल सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1971’ के तहत राज्य भर के सभी DPEOs और AOs को कारण बताओ नोटिस थमा दिया था.
नोटिस में RTE अधिनियम, 2009 की धारा 25(1) का उल्लेख करते हुए कहा गया कि हर प्राथमिक स्कूल में छात्र-शिक्षक अनुपात बनाए रखना अनिवार्य है. कानूनन कोई भी स्कूल एकल-शिक्षक के भरोसे नहीं चलाया जा सकता. शिक्षा विभाग ने अधिकारियों के रवैये को “गंभीर प्रशासनिक और संवैधानिक विफलता” करार देते हुए वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने सहित सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी थी. साथ ही, तुरंत शिक्षकों की व्यवस्था कर प्रमाण पत्र सौंपने का निर्देश दिया था.
“नीतिगत फैसले सरकार के हाथ में, हमारे पास पावर नहीं”
शो-कॉज नोटिस का जवाब देते हुए राज्य के विभिन्न जिलों में तैनात DPEOs ने अपनी लाचारी व्यक्त की है. नाम न छापने की शर्त पर एक DPEO ने बताया कि जिलों के अधिकारियों के पास शिक्षकों के अंतर-जिला या आंतरिक स्थानांतरण का कोई कानूनी या प्रशासनिक अधिकार नहीं है. अधिकारियों ने अपने जवाब में कहा कि यह नीतिगत निर्णय राज्य सरकार के स्तर पर लिया जाता है. जब उनके पास शिक्षकों की नियुक्ति या तबादले का अधिकार ही नहीं है, तो वे अपने अधीन आने वाले स्कूलों में शिक्षकों की कमी को कैसे दूर कर सकते हैं.
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“नई भर्ती और स्कूल बंद करने की प्रक्रिया जारी”
पूरे मामले पर प्राथमिक शिक्षा निदेशक प्रकाश त्रिवेदी ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा- DPEOs और AOs ने नोटिस के जवाब और स्पष्टीकरण जमा करा दिए हैं. फिलहाल, किसी भी अधिकारी के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई है. जहां शून्य (Zero) शिक्षक हैं, वहां अस्थायी व्यवस्था की गई है, जो UDISE डेटा में नहीं दिखती. राज्य सरकार ने चल रही भर्ती प्रक्रिया में इन एक-शिक्षक और शून्य-शिक्षक वाले स्कूलों में स्थायी शिक्षकों को नियुक्त करने का निर्णय लिया है. इसके अलावा, शून्य नामांकन वाले स्कूलों को बंद करने के निर्देश दिए गए हैं और उसकी प्रक्रिया चल रही है.”
| विषय / श्रेणी | स्कूलों की स्थिति | शिक्षकों और छात्रों की संख्या |
| सिंगल-टीचर स्कूल | 2,335 स्कूल | 1-1 शिक्षक (कुल 80,053 बच्चे) |
| शून्य छात्र (Zero-Student) स्कूल | कई स्कूल (0 छात्र नामांकित) | 74 शिक्षक तैनात |
| राज्य का कुल औसत | 53,425 स्कूल (सरकारी व निजी) | औसतन 7 शिक्षक/स्कूल (औसत 217 छात्र/स्कूल) |
UDISE+ 2025-26 रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के डिजिटल प्लेटफॉर्म UDISE+ की रिपोर्ट में गुजरात के प्राथमिक शिक्षा तंत्र की चिंताजनक तस्वीर सामने आई है. यहां राज्य के 2,335 स्कूलों में केवल एक-एक शिक्षक तैनात है और उनके भरोसे 80,053 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं. वहीं दूसरी ओर ऐसे कई स्कूल भी हैं जहां एक भी छात्र नामांकित न होने के बावजूद 74 शिक्षक पोस्टेड हैं. हालांकि, राज्य के कुल 53,425 सरकारी और निजी स्कूलों का औसत निकालें तो प्रति स्कूल 7 शिक्षक तैनात हैं और औसत नामांकन 217 छात्रों का है.

तन्वी गुप्ता
तन्वी गुप्ता मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला की रहने वाली हैं. स्कूल-कॉलेज धर्मशाला से करने के बाद शिमला में हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी से MMC की पढ़ाई की. मीडिया में 12 साल से ज्यादा का अनुभव है. चंडीगढ़, हैदराबाद में नौकरी करने के बाद फिलहाल दिल्ली में जॉब कर रही हैं. प्रिंट, टेलीविजन के बाद 2017 से डिजिटल मीडिया के लिए काम कर रही हैं. इससे पहले आजतक, न्यूज18, द ट्रिब्यून, ईटीवी भारत और इंडिया न्यूज सहित कुछ अन्य मीडिया संस्थानों में काम कर चुकी हैं. क्राइम, इतिहास और साइंस एक्सपेरिमेंट्स की खबरों में खास रूचि है. फिलहाल टीवी9 डिजिटल में बतौर असिस्टेंट न्यूज एडिटर काम संभाल रही हैं. नौकरी के अलावा खेल-कूद और घूमने फिरने में भी काफी दिलचस्पी है. नेशनल लेवल पर वॉलीबॉल और बैडमिंटन खेल चुकी हैं. साथ ही खो-खो खेल में भी स्टेट लेवल तक खेल चुकी हैं. इसके अलावा एनसीसी 'C' सर्टिफिकेट प्राप्त है. गाना सुनना तो पसंद है ही. लेकिन सिंगिंग का भी शौक रखती हैं. स्कूल और कॉलेज लेवल पर सिंगिंग में भी काफी पुरस्कार मिल चुके हैं.
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