उत्तराखंड मेडिकल एडमिशन फर्जी सर्टिफिकेट मामला क्या है? नीट यूजी में 234 नंबर पर MBBS में मिला एडमिशन

उत्तराखंड मेडिकल एडमिशन फर्जी सर्टिफिकेट मामला क्या है?

उत्तराखंड में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे से MBBS में एडमिशन के लिए कथित फर्जी सर्टिफिकेट बनाने का मामला सामने आया है. जांच में पता चला कि NEET UG में 234 अंक पाने वाली एक छात्रा को सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट मिली थी. चार छात्राओं समेत पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है. जांच में कुछ सर्टिफिकेट्स में दिए गए पते और डॉक्यूमेंट्स पर भी सवाल उठे हैं. पुलिस अब आधार कार्ड, मोबाइल नंबर, फोटो और ऑनलाइन आवेदन की जानकारी जुटा रही है. अधिकारियों को आशंका है कि इस मामले के पीछे कोई संगठित नेटवर्क भी हो सकता है.

234 अंक वाली छात्रा को मिला MBBS में एडमिशन

देहरादून में सरकारी MBBS सीटों पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे से हुए एडमिशन की जांच में कई अहम बातें सामने आई हैं. पुलिस के अनुसार, स्वाति नाम की छात्रा ने NEET UG में 234 अंक हासिल किए थे और उसे श्रीनगर मेडिकल कॉलेज अलॉट हुआ था. वहीं परी को 338 अंक पर हल्द्वानी, खुशी को 301 अंक पर श्रीनगर और तृप्ति को 400 अंक पर हरिद्वार का मेडिकल कॉलेज मिला था. इन अभ्यर्थियों की NEET रैंक करीब 27 हजार से 88 हजार के बीच बताई गई है.

चार छात्राओं समेत पांच पर केस

मामले में चार छात्राओं समेत पांच लोगों के खिलाफ दो अलग-अलग थानों में मुकदमा दर्ज किया गया है. जिलाधिकारी कार्यालय के निर्देश पर हुई जांच में संबंधित आवेदनों के डॉक्यूमेट्स में गड़बड़ी सामने आई थी. इसके बाद फर्जी पाए गए सर्टिफिकेट्स निरस्त कर दिए गए. रायपुर थाने में कंडोली के पटवारी जगदीश कुमार और क्लेमनटाउन थाने में पटवारी डिंपल की शिकायत पर केस दर्ज हुआ है. पुलिस ने BNS की धारा 318(4), 338 और 340 के तहत कार्रवाई शुरू की है.

फर्जी सर्टिफिकेट्स के पीछे नेटवर्क की आशंका

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि सर्टिफिकेट्स किस तरह तैयार कराए गए. जिन पते के आधार पर सर्टिफिकेट्स बनाए गए, वहां अभ्यर्थियों के रहने के सबूत नहीं मिले. इसलिए जांच केवल छात्रों तक सीमित नहीं रहने की संभावना है. पुलिस आवेदन में लगाए गए आधार कार्ड, फोटो, मोबाइल नंबर और अन्य दस्तावेजों की जांच करेगी. इन डॉक्यूमेंट्स को तैयार कराने की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में है.

SIT करेगी मामले की जांच

पुलिस अधीक्षक-नगर प्रमोद कुमार के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए SIT गठित करने की तैयारी है. SIT रायपुर और क्लेमनटाउन थानों में दर्ज दोनों मामलों की संयुक्त जांच कर सकती है.

मामले में राजस्व विभाग की प्रमाण पत्र सत्यापन प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं. पुलिस यह जांच करेगी कि सर्टिफिकेट जारी करने से पहले संबंधित पते और डॉक्यूमेंट्स का फिजिकल वेरिफिकेशन किया गया था या नहीं.

सपना यादव

सपना यादव

दिल्ली में जन्मीं सपना यादव TV9 भारतवर्ष डिजिटल में बतौर असिस्‍टेंट प्रड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता जगत में 4 वर्षों से ज्‍यादा के अनुभव के साथ काम जारी है. ह्यूमन इंटरेस्ट, राजनीति, वर्ल्ड, एजुकेशन, नॉलेज, करंट अफेयर्स से जुड़ी खबरों में खास दिलचस्पी रखती हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी से BA Hons. हिस्ट्री की पढ़ाई करने के बाद उन्‍होंने पत्रकारिता को लक्ष्‍य बनाया, फिर जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी से पीजी डिप्लोमा इन टीवी जर्नलिज्म किया, जामिया से ही हिस्ट्री में मास्टर्स भी किया और फिर इसके बाद गुरु जम्बेश्वर साइंस एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया. मास कम्‍यूनिकेशन में पत्रकारिता की डिग्री लेने के बाद जमीनी स्तर पर खबरों के महत्व को समझा. इसके बाद उन्‍होंने बतौर ट्रेनी TV9 भारतवर्ष डिजिटल में एक साल तक काम किया. ट्रेनी के दौरान अलग-अलग तरह की खबरों का अनुभव लेने के बाद TV9 भारतवर्ष डिजिटल में असिस्‍टेंट प्रड्यूसर के पद पर काम शुरू किया. यहां पर एंकरिंग, वॉइस ओवर, वीडियो प्रोडक्शन, न्यूज राइटिंग जैसे काम किए. इस समय वह एजुकेशन डेस्क पर कार्यरत हैं और स्टूडेंट्स के लिए करियर से जुड़े विकल्पों, बोर्ड परीक्षाओं, नौकरियों और प्रतियोगी परीक्षाओं और यूनिवर्सिटीज की महत्वपूर्ण जानकारियों को कवर कर रही हैं. सपना यादव को ट्रेवल करना, लिखना- पढ़ना पसंद है और वो प्रकृति को करीब से महसूस करना ज्यादा पसंद करती हैं. पत्रकारिता में सफर अभी जारी है.

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