दरभंगा के तारडीह प्रखंड की लगमा पंचायत के बथई गांव स्थित मृत कमला नदी पर आवागमन की समस्या को लेकर प्रशासन और संबंधित विभाग हरकत में आया है। 1 अगस्त को ग्रामीणों की आवाजाही के लिए बांस-बल्ले का अस्थायी चचरी पुल तैयार कराया गया, लेकिन यह राहत 24 घंटे भ

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नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण चचरी पुल के ऊपर से तेज बहाव शुरू हो गया, जिससे लोगों ने फिर इस रास्ते का उपयोग बंद करना शुरू कर दिया।

नदी का जलस्तर बढ़ने से चचरी पुल डूबा।

नदी का जलस्तर बढ़ने से चचरी पुल डूबा।

एक दिन की राहत, फिर वही परेशानी

ग्रामीणों का कहना है कि जिस पुल को सुविधा के नाम पर बनाया गया, वह बारिश के पहले ही तेज बहाव के सामने असुरक्षित नजर आने लगा। अब लोग पुल पार करने से डर रहे हैं। इक्का-दुक्का लोग ही जोखिम उठाकर पार कर रहे हैं, जबकि अधिकांश ग्रामीण वैकल्पिक लंबे रास्ते का सहारा लेने को मजबूर हैं।

4.90 करोड़ की योजना, लेकिन पुल अब भी अधूरा

मृत कमला नदी पर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत करीब 4.90 करोड़ रुपये की लागत से उच्चस्तरीय आरसीसी पुल का निर्माण कराया जाना है। निर्माण स्थल पर लगे शिलापट्ट के अनुसार कार्य 29 फरवरी 2024 से शुरू होकर 28 फरवरी 2025 तक पूरा होना था, लेकिन समयसीमा खत्म हुए कई महीने बीत जाने के बाद भी पुल अधूरा पड़ा है।

करीब छह महीने पहले विभाग ने वर्ष 2007 में बने पुराने लोहे के पुल को तोड़ दिया था। उस समय न तो डायवर्जन बनाया गया और न ही कोई वैकल्पिक सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराया गया। इसके कारण बथई समेत आसपास के हजारों ग्रामीणों को 12 से 15 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। कई लोगों ने मजबूरी में जान जोखिम में डालकर नदी पार की।

लगातार शिकायतों के बाद बनी चचरी पुल

ग्रामीणों की लगातार शिकायतों के बाद विभाग ने चचरी पुल बनाकर आवागमन बहाल करने की कोशिश की। लेकिन बारिश और बढ़ते जलस्तर ने इस अस्थायी व्यवस्था की भी पोल खोल दी।

ग्रामीण मनोज यादव, मनोहर यादव, शंकर झा, शिवशंकर कुमार और आदित्य कुमार झा का कहना है कि यदि चचरी पुल ही बनाना था तो पुराने पुल को तोड़ते समय ही इसकी व्यवस्था क्यों नहीं की गई। समय पर वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध कराया जाता तो लोगों को महीनों तक परेशानी नहीं झेलनी पड़ती।

कल बना चचरी पुल और आज डूब गया।

कल बना चचरी पुल और आज डूब गया।

अब उठ रहे हैं कई सवाल

ग्रामीणों ने परियोजना को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं—

  • 4.90 करोड़ रुपये की आरसीसी पुल परियोजना समय पर पूरी क्यों नहीं हुई?
  • निर्माण में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और संवेदक पर क्या कार्रवाई होगी?
  • पुराने पुल को तोड़ते समय वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
  • बारिश में पानी के ऊपर से गुजरने वाला चचरी पुल कितना सुरक्षित है?
  • आखिर बथई गांव के लोगों को स्थायी आरसीसी पुल कब मिलेगा?
पहले लोग ऐसे पार करते थे नदी।

पहले लोग ऐसे पार करते थे नदी।

ग्रामीणों में बढ़ रहा आक्रोश

चचरी पुल के एक दिन के भीतर ही पानी में डूबने की स्थिति बनने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि विभाग स्थायी समाधान देने के बजाय केवल औपचारिकता निभा रहा है। जिस पुल को राहत के तौर पर बनाया गया, वह बारिश की पहली चुनौती भी नहीं झेल सका।

ग्रामीणों की मांग है कि अब अस्थायी इंतजामों के बजाय 4.90 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे स्थायी आरसीसी पुल का निर्माण जल्द पूरा कराया जाए, ताकि वर्षों से चली आ रही आवागमन की समस्या का स्थायी समाधान हो सके।