By Oneindia Staff
Published: Sunday, October 4, 2026, 23:14 [IST]
दिल्ली में सर्दियां शुरू होने से पहले प्रदूषण पर निगरानी और सख्त करने की तैयारी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने गुरुवार को शास्त्री पार्क स्थित DMRC आईटी पार्क में दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर यानी ICCC का उद्घाटन किया। यह सेंटर अब प्रदूषण के खिलाफ दिल्ली के लिए 24 घंटे चलने वाले वॉर रूम की तरह काम करेगा।
700 से ज्यादा निर्माण साइट्स पर AI की नजर, क्या-क्या दिखेगा?
नए सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत निर्माण स्थलों की डिजिटल निगरानी है। 500 वर्गमीटर से ज्यादा क्षेत्र वाली निर्माण साइट्स पर प्रदूषण और धूल से जुड़े नियमों की निगरानी की जाएगी। AI आधारित कैमरों से प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों को पकड़ने की कोशिश होगी। PM10 का स्तर बढ़ने पर संबंधित विभाग और साइट संचालक को अलर्ट भेजा जा सकेगा।
DPCC पहले से 500 वर्गमीटर या उससे ज्यादा वाली निर्माण साइट्स के लिए धूल नियंत्रण और ऑनलाइन निगरानी की व्यवस्था चला रहा है। नए कमांड सेंटर का मकसद इन निगरानी प्रणालियों को एक जगह जोड़कर कार्रवाई को तेज करना है।
सिर्फ प्रदूषण देखना नहीं, कार्रवाई तक पहुंचेगा सिस्टम
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सिर्फ आंकड़े जमा करने से प्रदूषण कम नहीं होगा। जरूरत इस बात की है कि गड़बड़ी दिखते ही कार्रवाई हो। ICCC में इसी सोच के साथ डिटेक्ट, एनालाइज, एक्ट और वेरिफाई के चार चरणों पर काम होगा। मतलब पहले उल्लंघन पकड़ा जाएगा। फिर उसकी जांच होगी। इसके बाद संबंधित विभाग को अलर्ट जाएगा। कार्रवाई के बाद यह भी देखा जाएगा कि समस्या वास्तव में दूर हुई या नहीं।
सड़क साफ करने वाली मशीनें भी अब रडार पर
प्रदूषण सिर्फ निर्माण स्थलों से नहीं आता। सड़क की धूल भी बड़ा स्रोत है। इसलिए मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों को जीपीएस से जोड़ा गया है। कमांड सेंटर से उनकी लोकेशन, रूट, सफाई का काम, तय दूरी और काम में लगा समय देखा जा सकेगा। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि मशीनें निर्धारित समय और रूट पर चल रही हैं या नहीं।
फील्ड में जाने वाली वायुदूत टीमें प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों की जांच करेंगी। इन टीमों के बॉडी कैमरे ICCC से जोड़े जाएंगे। DPCC अधिकारियों के लिए निरीक्षण के दौरान बॉडी कैमरा रखना जरूरी होगा। इसका मकसद फील्ड कार्रवाई का रिकॉर्ड रखना और जवाबदेही तय करना है।
सर्दियों में 78 टीमें संभालेंगी मोर्चा
सर्दियों में ICCC के साथ दिल्ली की 78 सब डिविजन टीमें काम करेंगी। किसी हॉटस्पॉट या नियम तोड़ने की सूचना मिलने पर संबंधित टीम को अलर्ट भेजा जाएगा। खुले में कूड़ा और बायोमास जलाने पर नजर रखने के लिए नए कैमरे भी लगाए जाएंगे। दिल्ली में पहले से निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण और प्रदूषण उल्लंघन की निगरानी के लिए अलग-अलग टीमें काम करती रही हैं।
लोग भी सीधे भेज सकेंगे शिकायत और सुझाव
सरकार ने लोगों को भी इस सिस्टम से जोड़ने की बात कही है। जन सुझाव पोर्टल के जरिए लोग प्रदूषण से जुड़ी शिकायत, सुझाव और अच्छे काम की जानकारी साझा कर सकेंगे। सरकार का कहना है कि अच्छे प्रयास करने वालों को सम्मानित भी किया जाएगा। यानी निगरानी सिर्फ सरकारी टीमों तक सीमित नहीं रहेगी, लोगों को भी इसमें जोड़ा जाएगा।
मनजिंदर सिंह सिरसा बोले- सेंटर तय समय से पहले तैयार
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के मुताबिक ICCC को तय समय से करीब छह महीने पहले तैयार किया गया है। सेंटर में अलग-अलग AQI स्टेशनों का डेटा, पुराने आंकड़े और स्थानीय प्रदूषण स्रोतों की जानकारी एक साथ देखी जाएगी।
सर्दियों में यहां अधिकारी शिफ्ट में 24 घंटे मौजूद रहेंगे। सेंटर में उनके लिए किचन, पैंट्री, मेस और बंक बेड जैसी सुविधाएं भी रखी गई हैं। सरकार का दावा है कि इसके साथ स्मॉग गन, मिस्ट स्प्रे, धूल नियंत्रण, हरित क्षेत्र, स्वच्छ परिवहन और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर भी काम जारी है।
अब असली परीक्षा यह होगी कि कैमरों और डेटा से मिलने वाली जानकारी कितनी तेजी से जमीन पर कार्रवाई में बदलती है। दिल्ली की हवा में सुधार का असर आखिरकार निगरानी के आंकड़ों से नहीं, बल्कि जमीन पर दिखने वाले नतीजों से तय होगा।