जबलपुर के नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में मरीजों का दबाव लगातार बढ़ रहा है, लेकिन अस्पताल के विस्तार को अब तक शासन की मंजूरी नहीं मिली है।

.

लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने एक्सटेंशन के लिए 241 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार कर भेज दी है। यह प्रस्ताव केंद्र तक पहुंच चुका है और राज्य शासन के संज्ञान में भी है, लेकिन अब तक इस पर ठोस निर्णय नहीं हुआ है।

दूसरी ओर, जबलपुर के बाद शुरू हुए रीवा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के विस्तार को हाल ही में मंजूरी मिल चुकी है। इसके लिए करीब 175 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत किया गया है। ऐसे में जबलपुर के अस्पताल के विस्तार में हो रही देरी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति के चलते रीवा को मंजूरी मिल गई, जबकि जबलपुर का प्रस्ताव अब भी अटका है।

कई वार्डों में फ्लोर बेड की नौबत

सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और स्कूल ऑफ एक्सीलेंस इन न्यूरो सर्जरी को मिलाकर करीब 300 बेड हैं। मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण कई वार्डों में फ्लोर बेड लगाकर उपचार करना पड़ता है। जबलपुर सहित पूरे महाकौशल क्षेत्र से रोजाना 350 से 550 मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं।

अस्पताल शुरू होने के बाद बीते छह वर्षों में ओपीडी, आईपीडी और ऑपरेशन थिएटर (ओटी) का कामकाज करीब 20 गुना तक बढ़ने का दावा किया गया है। ऐसे में मौजूदा संसाधनों पर दबाव बढ़ गया है। विस्तार के बाद लीवर और हृदय प्रत्यारोपण जैसी सुविधाएं शुरू करने के साथ नए विभाग जोड़ने की भी योजना है।

अस्पताल की शुरूआत से लेकर बीते 6 वर्षों में ओपीडी, आईपीडी और ओटी करीब 20 गुना तक बढ़ गई है।

अस्पताल की शुरूआत से लेकर बीते 6 वर्षों में ओपीडी, आईपीडी और ओटी करीब 20 गुना तक बढ़ गई है।

लंबे समय से अटका है विस्तार का प्रस्ताव

अस्पताल में बढ़ते मरीजों को देखते हुए प्रबंधन ने विस्तार की जरूरत बताते हुए शासन स्तर पर प्रयास शुरू किए थे। इसके लिए अलग-अलग स्तरों पर पत्राचार किया गया और पीडब्ल्यूडी से डीपीआर तैयार कराकर भेजी गई। विस्तार के लिए नर्सिंग कॉलेज से जुड़ी जमीन चिह्नित की गई है। इसके बावजूद अब तक निर्माण को लेकर आधिकारिक मंजूरी नहीं मिली है।

डॉक्टरों के 110 पद स्वीकृत हैं, इसके मुकाबले करीब 50 डॉक्टर ही हैं।

डॉक्टरों के 110 पद स्वीकृत हैं, इसके मुकाबले करीब 50 डॉक्टर ही हैं।

डॉक्टरों के 110 पद स्वीकृत, करीब 50 ही कार्यरत

अस्पताल में भवन विस्तार के साथ मानव संसाधन बढ़ाने की जरूरत भी सामने आ रही है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, डॉक्टरों के 110 पद स्वीकृत हैं, लेकिन करीब 50 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। नर्सिंग स्टाफ के 165 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 160 भरे हुए हैं। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, करीब 160 अतिरिक्त नर्सिंग कर्मचारियों की जरूरत है।

क्लास-4 के करीब 100 कर्मचारी ठेका कंपनी के माध्यम से सफाई और सुरक्षा का काम संभाल रहे हैं। इनकी संख्या भी जरूरत के मुकाबले कम बताई जा रही है। स्कूल ऑफ एक्सीलेंस इन न्यूरोसर्जरी भी सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल के अंतर्गत संचालित है। ऐसे में दोनों संस्थानों के बीच स्टाफ साझा करना पड़ता है।

जल्द जानकारी साझा करेंगे

नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. नवनीत सक्सेना का कहना है कि सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल के विस्तार को लेकर डीपीआर भेजी जा चुकी है। इस संबंध में जल्द ही जानकारी साझा की जाएगी। फिलहाल विस्तार को लेकर अधिकृत पुष्टि नहीं आई है।