शहर की सड़कों पर लगातार बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए अब पूरी यातायात व्यवस्था को नए सिरे से तैयार करने की कवायद शुरू हो गई है। शनिवार को रेसीडेंसी कोठी में महापौर पुष्यमित्र भार्गव की अध्यक्षता में हुई हाई पावर बैठक में तीन चरणों वाला ट्रैफिक

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इसमें तत्काल राहत के लिए लेफ्ट टर्न और बॉटलनेक सुधारने से लेकर अगले तीन साल में फ्लाईओवर, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी विकसित करने की योजना है।

बैठक में कलेक्टर शिवम वर्मा, निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल, एडिशनल पुलिस कमिश्नर आरके सिंह, एआरटीओ राजेश गुप्ता सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

पहले साल इन समस्याओं पर होगा फोकस

शहर के 17 प्रमुख चौराहों के लेफ्ट टर्न चौड़े किए जाने के बाद अब अन्य व्यस्त चौराहों पर भी यही काम किया जाएगा। सड़क की ज्योमेट्री के कारण जहां ट्रैफिक रुकता है, वहां डिजाइन में सुधार किया जाएगा।

इसके साथ ही प्रमुख सड़कों से अतिक्रमण हटाने, ऑन-स्ट्रीट पार्किंग पर रोक, आवारा मवेशियों पर कार्रवाई और कमर्शियल वाहनों की लोडिंग-अनलोडिंग के लिए रात का समय तय करने की योजना है। सीसीटीवी आधारित ई-चालान और मोबाइल कोर्ट से कार्रवाई भी बढ़ाई जाएगी।

इंदौर की सड़कों पर लगा जाम। -फाइल

इंदौर की सड़कों पर लगा जाम। -फाइल

1500 इंटरसिटी बसें शहर से बाहर करने की तैयारी

मीडियम टर्म प्लान में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को सबसे बड़ा विस्तार देने की तैयारी है। सिटी बसों की संख्या करीब 350 से बढ़ाकर 1500 करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ शहर के भीतर चलने वाली करीब 1500 इंटरसिटी बसों को शहर की सीमा से बाहर करने के लिए नीति तैयार की जाएगी।

गंगवाल, सरवटे, नायता मुंडला और कुमेडी बस टर्मिनलों के बीच 24 घंटे कनेक्टिविटी विकसित करने की योजना है। ट्रैफिक दबाव कम करने के लिए थोक मंडियों और लोडिंग-अनलोडिंग जोन को भी शहर के बाहरी हिस्सों में शिफ्ट करने पर काम होगा।

25 से ज्यादा फ्लाईओवर, बदलेगी बाजार-ऑफिस की टाइमिंग

शहर में वाहनों की औसत गति 16-17 किमी प्रति घंटे के आसपास बताई गई। इसे बढ़ाने के लिए प्रमुख व्यस्त क्षेत्रों में 25 से ज्यादा फ्लाईओवर बनाने की योजना पर काम होगा।

पीक ऑवर्स में ट्रैफिक का दबाव कम करने के लिए ऑफिस और बाजारों के खुलने-बंद होने के समय में बदलाव का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है।

3 साल बाद मेट्रो-बस-रेल का एक नेटवर्क

लॉन्ग टर्म प्लान में अलग ट्रैफिक इंजीनियरिंग सेल बनाने का प्रस्ताव है। ट्रैफिक पुलिस की संख्या मौजूदा करीब 1200 से बढ़ाकर 2500-3000 करने का लक्ष्य रखा गया है।

भविष्य में मेट्रो, सिटी बस और सब-अर्बन रेल को एक नेटवर्क से जोड़ने पर जोर रहेगा। इसके अलावा साइकिल ट्रैक और पैदल यात्रियों के लिए विशेष स्ट्रीट विकसित करने की योजना है।

3-E फॉर्मूले से बदलेगा ट्रैफिक सिस्टम

पूरे प्लान को 70% Engineering, 15% Enforcement और 15% Education के फॉर्मूले पर तैयार किया गया है। यानी सड़क और चौराहों के डिजाइन सुधारने के साथ ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन कराने और लोगों को जागरूक करने पर भी बराबर ध्यान दिया जाएगा।