उज्जैन14 घंटे पहले

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उज्जैन में वन रक्षक बनने के लिए 25 किलोमीटर पैदल चलने की परीक्षा दे रहे एक अभ्यर्थी ने मंजिल तक पहुंचने के लिए ऐसा शॉर्टकट अपनाया कि भर्ती प्रक्रिया से ही बाहर हो गया।

चार घंटे में पैदल चाल पूरी करनी थी, लेकिन अभ्यर्थी ने रास्ते में बाइक सवार से लिफ्ट ले ली। बाइक पर बैठकर वह आगे निकल गया। उसे लगा कि मुंह पर कपड़ा बांधकर चेहरा छिपाने से उसकी यह हरकत पकड़ में नहीं आएगी, लेकिन पीछे चल रही वन विभाग की टीम ने उसे बाइक पर जाते देख लिया। टीम ने वीडियो बनाया और डीएफओ तक पहुंचाया। जांच में पहचान सामने आते ही चयन समिति ने उसे अयोग्य घोषित कर दिया।

मामला शनिवार को वन रक्षक भर्ती-2026 की चयन प्रक्रिया के दौरान सामने आया। पैदल चाल नवलखी बीड़ मनोरंजन पार्क से शुरू होकर पंचकोशी मार्ग तक कराई जा रही थी। इसमें अभ्यर्थियों को 25 किलोमीटर की दूरी चार घंटे में पूरी करनी थी। इसी दौरान चेस्ट नंबर 282 वाला अभ्यर्थी रविंद्र शर्मा पैदल चलने के बजाय सड़क से गुजर रहे बाइक सवार के साथ बैठकर आगे बढ़ गया। भर्ती की इस अहम परीक्षा में उसने नियमों को दरकिनार कर दूरी पूरी करने का रास्ता चुना।

मुंह पर कपड़ा बांधा, लेकिन टीम की नजर से नहीं बचा

रविंद्र ने बाइक पर बैठते समय मुंह पर कपड़ा बांध रखा था। संभवत: वह अपनी पहचान छिपाना चाहता था, लेकिन अभ्यर्थियों के पीछे चल रही वन विभाग की टीम की नजर उस पर पड़ गई। टीम ने बाइक पर जाते अभ्यर्थी का वीडियो बनाया और डीएफओ अनुराग तिवारी को भेज दिया। इसके बाद चेस्ट नंबर के आधार पर जांच की गई। बाइक पर बैठकर आगे जाने वाला अभ्यर्थी रविंद्र शर्मा निकला। पहचान स्पष्ट होने के बाद चयन समिति ने उसके खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे अयोग्य घोषित कर दिया।

लिफ्ट देने वाले बाइक सवार को भी पकड़ा

डीएफओ अनुराग तिवारी ने बताया कि रविंद्र के बाइक पर बैठने की जानकारी मिलने के कुछ ही देर बाद कार्रवाई की गई। जिस बाइक सवार से उसने लिफ्ट मांगी थी, उसे भी पकड़ा गया। अधिकारियों ने बाइक का नंबर नोट कर उससे पूछताछ की। यानी जांच केवल अभ्यर्थी तक सीमित नहीं रही, उसे लिफ्ट देने वाले की भूमिका भी जांच के दायरे में आई।

पहले माफी मांगी, फिर स्वास्थ्य खराब होने की बात कही

अधिकारियों के सामने गलती उजागर होने के बाद रविंद्र ने माफी मांगी। बाद में उसने स्वास्थ्य खराब होने की बात कही। हालांकि, पैदल चाल के दौरान अभ्यर्थियों के पीछे एंबुलेंस भी चल रही थी। ऐसे में तबीयत बिगड़ने पर मदद लेने का विकल्प मौजूद था, लेकिन रविंद्र ने बाइक से आगे जाने का रास्ता चुना। वन विभाग ने नियमों के उल्लंघन पर उसे भर्ती की नई बैच से हटा दिया।

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