उत्तराखंड सरकार ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों के एमबीबीएस इंटर्न्स का वजीफा 17,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह किए जाने का ऐलान किया गया है। और पदक विजेता खिलाड़ियों के लिए 245 सरकारी नौकरियों को मंजूरी दी गई।

उत्तराखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे मेडिकल छात्रों और राज्य के होनहार खिलाड़ियों के लिए शुक्रवार का दिन बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई राज्य कैबिनेट की अहम बैठक में प्रदेश के विकास और जनहित से जुड़े कई बड़े फैसलों पर मुहर लगाई गई। इनमें सबसे प्रमुख फैसला एमबीबीएस इंटर्न्स के महीने के वजीफे (स्टाइपेंड) में सीधे 8,000 रुपये की बढ़ोतरी करना रहा। अब तक जिन्हें हर महीने 17,000 रुपये मिलते थे, उन्हें अब 25,000 रुपये दिए जाएंगे। इस फैसले से मेडिकल की पढ़ाई पूरी कर रहे युवाओं के चेहरे खिल उठे हैं। इसके साथ ही, कैबिनेट ने देश और दुनिया के मंच पर राज्य का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों के लिए भी सरकारी नौकरियों के दरवाजे पूरी तरह खोल दिए हैं।

राज्य सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी ने कैबिनेट बैठक के बाद प्रेस को फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार काफी समय से चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही थी। उन्होंने बताया कि पहले सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप कर रहे एमबीबीएस छात्रों का स्टाइपेंड 17,000 रुपये प्रति माह तय किया गया था। लंबे समय से छात्र इसमें बढ़ोतरी की मांग कर रहे थे, जिसे ध्यान में रखते हुए धामी कैबिनेट ने इसे बढ़ाकर सीधे 25,000 रुपये प्रतिमाह करने का फैसला लिया है।

सरकार के कदम से किसे होगा फायदा

उत्तराखंड में इस समय कुल पांच सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं, जो श्रीनगर (गढ़वाल), हल्द्वानी, देहरादून, हरिद्वार और अल्मोड़ा में स्थित हैं। इन सभी संस्थानों में एमबीबीएस के साथ-साथ पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) मेडिकल पाठ्यक्रम भी चलाए जाते हैं। सरकार के इस कदम का सीधा फायदा इन पांचों सरकारी मेडिकल कॉलेजों के सैकड़ों इंटर्न्स को मिलेगा, जो दिन-रात अस्पतालों में मरीज सेवा में डटे रहते हैं।

प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ समझे जाने वाले इन पांचों सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कुल मिलाकर 625 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध हैं। इसके अलावा, उत्तराखंड में चार निजी मेडिकल कॉलेज भी संचालित हो रहे हैं, जिनमें 900 एमबीबीएस सीटें हैं। हालांकि, स्टाइपेंड बढ़ाने का यह ताजा फैसला फिलहाल सरकारी कॉलेजों के छात्रों पर ही लागू होगा। जानकारों का मानना है कि वजीफे में इस सम्मानजनक इजाफे से युवा डॉक्टरों का मनोबल बढ़ेगा और वे अधिक लगन से राज्य के सुदूर व पहाड़ी इलाकों के अस्पतालों में अपनी सेवाएं देने के लिए प्रेरित होंगे।

कैबिनेट के फैसले में खिलाड़ियों की भी मौज

कैबिनेट बैठक में केवल स्वास्थ्य क्षेत्र ही नहीं, बल्कि खेल और खिलाड़ियों के प्रोत्साहन को लेकर भी बड़ा कदम उठाया गया। राज्य सरकार ने अलग-अलग सरकारी विभागों में पदक विजेता खिलाड़ियों के लिए 245 पदों पर आउट ऑफ टर्न (बिना परीक्षा सीधी) नियुक्ति को हरी झंडी दी है। यह पूरी प्रक्रिया 'उत्तराखंड खेल नीति 2021' के तहत अमल में लाई जाएगी।

इस नीति के मुताबिक, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में देश व राज्य का मान बढ़ाने वाले पदक विजेता खिलाड़ी अब सीधे राजपत्रित और अराजपत्रित पदों पर नियुक्त किए जा सकेंगे। सूचना महानिदेशक ने स्पष्ट किया कि इन 245 पदों का बंटवारा खेल विभाग, युवा कल्याण विभाग, गृह विभाग, परिवहन विभाग, शिक्षा विभाग और वन विभाग जैसे प्रमुख महकमों में किया जाएगा। इस फैसले से राज्य के उन युवा एथलीटों को बहुत बड़ा संबल मिला है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद दिन-रात मैदान में पसीना बहाते हैं। बैठक खत्म होने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी बात साझा की। उन्होंने लिखा कि कैबिनेट बैठक में राज्य के संतुलित विकास को गति देने, विभिन्न क्षेत्रों में सुधार लाने, खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने, स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने, न्यायिक प्रणाली को सुदृढ़ करने और कर्मचारियों के कल्याण से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं।