रायपुर/बिलासपुर19 मिनट पहलेलेखक: चंद्रकुमार दुबे
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छत्तीसगढ़ के सूक्ष्म और लघु उद्योगों के 280.65 करोड़ रुपए भुगतान विवादों में फंसे हैं। प्रदेश में ऐसे 890 मामले लंबित हैं। इनमें 179.29 करोड़ रुपए के 488 प्रकरण आवेदन स्तर पर हैं, जबकि 101.36 करोड़ के 402 मामलों की सुनवाई जारी है।
भुगतान अटकने का असर छोटे उद्यमियों की कार्यशील पूंजी पर पड़ता है। इससे कच्चा माल खरीदने, कर्मियों को वेतन देने और रोजमर्रा का कारोबार चलाने में परेशानी होती है। अपने ही पैसे की वसूली के लिए दफ्तरों और कानूनी प्रक्रिया के चक्कर लगाने से उनकी लागत भी बढ़ती है।
भुगतान विवादों को वर्षों तक लंबित रहने से रोकने के लिए केंद्र सरकार ने समय-सीमा तय की है। नई व्यवस्था के तहत पहले 90 दिन में मध्यस्थता के जरिए समझौते का प्रयास होगा। समाधान नहीं निकलने पर अगले 30 दिन में मामला आर्बिट्रेशन यानी पंचाट में भेजा जाएगा।
दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद 90 दिन में फैसला देना होगा। इस तरह पूरी प्रक्रिया करीब 210 दिन में पूरी करने का लक्ष्य है। नई व्यवस्था से छोटे उद्यमियों को राहत मिलने की उम्मीद है।
एक साल में 1168 मामलों की सुनवाई, निपटारे की रफ्तार ढाई गुना: छत्तीसगढ़ सूक्ष्म एवं लघु उद्यम सुविधा परिषद (एमएसईएफसी) की रिपोर्ट के मुताबिक 24 दिसंबर 2024 से 24 दिसंबर 2025 के बीच 30 बैठकें हुईं। इनमें 1168 मामलों की सुनवाई की गई। परिषद ने 123 मामले खारिज किए और 51 में आदेश जारी किए। वहीं, 72 विवाद आपसी समझौते से सुलझाए गए।
इनमें 14 करोड़ 30 लाख 15 हजार 129 रुपए की राशि शामिल थी। रिपोर्ट के अनुसार 2019 से 2024 के बीच औसतन चार मामले प्रतिमाह निपटाए जाते थे। वर्ष 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 10 हो गई। यानी मासिक निपटारे की दर में करीब 150% वृद्धि हुई।
छत्तीसगढ़ एमएसईएफसी के मेंबर कौन्तेय जायसवाल के अनुसार जो केस पेडिंग है सभी में सुनवाई चल रही है और प्रोसेस में है। लंबित मामले तीन साल से पेडिंग है। इनमें 2 प्रतिशत पुराने रिमांड होकर आए हैं।
15 दिन में लिखित आपत्ति देनी होगी, नहीं तो माल स्वीकार माना जाएगा
उद्योग संघ के अनुसार खरीदार कई बार माल की गुणवत्ता पर देर से आपत्ति लगाकर भुगतान रोकते हैं। नए प्रावधान में माल मिलने के 15 दिन के तक लिखित आपत्ति नहीं करने पर उसे स्वीकार किया हुआ माना जाएगा। खरीदार ने जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा कर लिया है तो बाद में गुणवत्ता का आधार बनाकर भुगतान रोकना भी मुश्किल होगा।
खरीदारों में बड़ी कंपनियों के अलावा राज्य व केंद्र सरकार के उपक्रम शामिल है। इनमें एसीसी,बीएसपी, जिंदल, सिम्लेक्स सहित सरकारी विभाग में पीडल्यूडी, पीएचई, सीएसआईडीसी,पर्यटन विभाग सहित अन्य है।
यह संशोधन लघु उद्योगों के हित में है। इससे खरीदारों की मनमानी पर रोक लगेगी और भुगतान विवादों के जल्द समाधान का रास्ता खुलेगा। -हरीश केडिया, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ लघु उद्योग संघ
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