
दिल्ली एयरपोर्ट सुरक्षा में बड़ी चूक.
दिल्ली एयरपोर्ट पर बड़ी सुरक्षा चूक सामने आई. बिना इमिग्रेशन क्लीयरेंस 3 इटैलियन पैसेंजर्स भारत से बाहर चले गए. तीनों अमृतसर से एअर इंडिया की फ्लाइट से दिल्ली पहुंचे थे. इस पूरे मामले को लेकर नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एअर इंडिया के SOP के 5 प्रावधानों के उल्लंघन का जिक्र किया. जिसे लेकर मंत्रालय ने एअर इंडिया को कारण बताओ नोटिस जारी कर 7 दिन में जवाब मांगा.
दरअसल, एअर इंडिया की स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के तहत बोर्डिंग पास को दो तरह से बांटा गया है. घरेलू यात्रियों के लिए ‘D’ और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए ‘I’. मंत्रालय के अनुसार, इस मामले में अपनाई गई प्रक्रिया SOP के मुताबिक नहीं थी. दिल्ली पहुंचने पर, उन तीनों यात्रियों की पहचान अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के तौर पर की जानी चाहिए थी. उन्हें घरेलू यात्रियों की भीड़ से अलग करके इमिग्रेशन की ओर भेजा जाना चाहिए था. इसके बजाय, उन्हें गेट 39 से ‘इंटरनेशनल-टू-इंटरनेशनल ट्रांसफर एरिया’ में ले जाया गया.
इमिग्रेशन से गुजरे बिना फ्लाइट में सवार
वहां से वे डिपार्चर एरिया में गए और इमिग्रेशन चेकपॉइंट से गुजरे बिना ही लुफ्थांसा की फ्लाइट में सवार हो गए. मंत्रालय ने आगे बताया कि ये तीनों यात्री एयर इंडिया के ‘हब-एंड-स्पोक’ सिस्टम के तहत यात्रा कर रहे थे, जिसमें यात्रियों को पहले छोटे एयरपोर्ट से एक बड़े हब एयरपोर्ट तक ले जाया जाता है. ये तीनों यात्री अमृतसर से दिल्ली पहुंचे थे. अमृतसर में, उन्हें एयर इंडिया की घरेलू फ्लाइट के लिए ‘D’ (घरेलू) बोर्डिंग पास जारी किए गए थे.
उन्हें अमृतसर में ही आगे की लुफ्थांसा फ्लाइट के लिए भी बोर्डिंग पास जारी कर दिए गए थे, जो नियमों का उल्लंघन है. इसके बाद तीनों दिल्ली से लुफ्थांसा की फ्लाइट से म्यूनिख रवाना हो गए.
एअर इंडिया से कहां-कहां हुई चूक?
मंत्रालय के अनुसार, तय नियमों के मुताबिक यात्रियों को सिर्फ ‘D’ (घरेलू) और ‘I’ (अंतरराष्ट्रीय) कैटेगरी के बोर्डिंग पास जारी किए जाने थे. दिल्ली पहुंचने पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को अलग-अलग रखा जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. सिर्फ ‘I’ कैटेगरी के बोर्डिंग पास वाले यात्रियों को ही ‘इंटरनेशनल-टू-इंटरनेशनल ट्रांसफर डेस्क’ तक पहुंचना चाहिए था, फिर भी ‘D’ कैटेगरी के बोर्डिंग पास वाले यात्री वहां पहुंच गए. हब-एंड-स्पोक एयरपोर्ट पर 24 घंटे के लिए एक नोडल अफसर तैनात किया जाना चाहिए था.
यह पक्का करने के लिए कि कोई भी यात्री जरूरी औपचारिकताएं पूरी किए बिना अंतरराष्ट्रीय रवानगी वाले इलाके में न पहुंचे, चौबीसों घंटे निगरानी करने वाली टीम की जरूरत थी, इस मामले में निगरानी का सिस्टम भी नाकाम रहा.
एअर इंडिया से और क्या पूछा गया?
मंत्रालय ने पूछा है कि अमृतसर में यात्रियों को लुफ्थांसा के बोर्डिंग पास क्यों जारी किए गए. मंत्रालय ने पूछा कि ‘D’ कैटेगरी के तीन यात्री अंतरराष्ट्रीय ट्रांसफर एरिया तक कैसे पहुंच गए और एयर इंडिया और SATS के किन कर्मचारियों ने उन्हें संभाला. उसने घटना के समय नोडल अफसर और निगरानी टीम के कहां होने और दिल्ली एयरपोर्ट पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों का जरूरी मिलान समय पर क्यों नहीं हुआ, इस बारे में भी जानकारी मांगी.

इसके अलावा, मंत्रालय ने पूछा कि क्या पैसेंजर मैनिफेस्ट, जनरल डिक्लेरेशन और API-PNR डेटा इमिग्रेशन अधिकारियों को समय पर दिया गया था, क्या इन दस्तावेजों में तीनों यात्रियों का स्टेटस सही ढंग से दर्ज किया गया था, और यह गलती कब पता चली?
जवाब न मिलने पर होगा एक्शन
सबसे अहम बात यह है कि विमान में सवार होने से पहले यात्रियों को रोका नहीं गया. गड़बड़ी का पता बाद में मैन्युअल मिलान के दौरान चला. दूसरे शब्दों में, न तो सिस्टम और न ही निगरानी तंत्र ने समय रहते इस चूक का पता लगाया. बताया जा रहा है कि अगर एयरलाइन तय समय के अंदर जवाब नहीं देती है, तो मंत्रालय उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर प्रशासनिक और रेगुलेटरी कार्रवाई करने का फैसला कर सकता है.

कुमार कुन्दन
साल 2004 में "जी न्यूज" से पत्रकारिता की शुरुआत किया। इसके बाद "टोटल टीवी", "न्यूज24", " इंडिया टीवी", इसके बाद "राजस्थान पत्रिका" अखबार और फिर टीवी 9 भारतवर्ष से जुड़ा.
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